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Greater Noida Authority News : ‘हरियाली पर नहीं चलेगा कब्ज़ा!’, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का सबसे बड़ा एक्शन, ग्रीन बेल्ट से हटाया कब्ज़ा, दो दर्जन अवैध दुकानें ध्वस्त, पौधरोपण भी शुरू, 8 जेसीबी, 8 डंपर, 100 से ज्यादा स्टाफ, और पुलिस, सीईओ एन.जी. रवि कुमार ने दी सराहना, भविष्य में और तेज़ होंगी कार्रवाइयां


ग्रेटर नोएडा | रफ़्तार टुडे विशेष रिपोर्ट


सुबह-सवेरे शुरू हुआ बुलडोज़र अभियान, चार घंटे में बदल दी तस्वीर

शनिवार की सुबह 6 बजे जैसे ही सूरज की पहली किरणें निकलीं, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की टीम, पुलिस बल और भारी मशीनरी सेक्टर-2 और 3 की ग्रीन बेल्ट में पहुंच गई। कुछ ही घंटों में दो दर्जन से अधिक अवैध दुकानें जमींदोज़ कर दी गईं। यह अभियान पूरे चार घंटे तक चला, जिसमें प्राधिकरण ने करीब एक लाख वर्ग मीटर हरित भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करा लिया।


कब्ज़े में थीं ऑटो पार्ट्स, मार्बल और एल्यूमीनियम की दुकानें

यह इलाका पतवाड़ी गांव से सटा हुआ है और खसरा संख्या 663, 668, 670, 725, 729, 730, 739, 740 व 741 में आता है। यहां पिछले कई वर्षों से ऑटोमोबाइल गैरेज, एल्यूमिनियम वर्क्स और मार्बल की अवैध दुकानें संचालित हो रही थीं। दुकानदारों ने ग्रीन बेल्ट का दुरुपयोग कर व्यवसायिक कब्ज़ा जमा लिया था।


कई बार दिया गया नोटिस, लेकिन नहीं माने अतिक्रमणकारी

प्राधिकरण द्वारा इन अवैध निर्माणों को हटाने के लिए पूर्व में कई बार नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन दुकानदारों ने न तो खुद अतिक्रमण हटाया, न ही क्षेत्र को खाली किया। ऐसे में प्राधिकरण ने सीईओ एन.जी. रवि कुमार के आदेश पर कार्रवाई की ठानी।


8 जेसीबी, 8 डंपर, 100 से ज्यादा स्टाफ – तगड़ी तैयारी में दिखा प्रशासन

इस ऑपरेशन में 8 जेसीबी मशीनें, 8 डंपर, प्राधिकरण के 100 से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी, और नोएडा पुलिस की बड़ी फोर्स तैनात की गई थी। टीम का नेतृत्व परियोजना विभाग के महाप्रबंधक ए.के. सिंह कर रहे थे। साथ ही उद्यान विभाग, भूलेख विभाग और पुलिस कमांडो दस्ते भी मौजूद रहे।


प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में चला ऑपरेशन

कार्रवाई के दौरान जिन प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी रही, उनमें शामिल थे:

  • एडिशनल सीपी हृदेश कठेरिया
  • एसीपी वीर सिंह
  • एसीपी दीक्षा सिंह
  • एसीपी वर्णिका सिंह
  • स्थानीय पुलिस चौकियों और कोतवाली के स्टाफ
  • कमांडो यूनिट

अब शुरू हुआ पौधरोपण, हरियाली लौटाने की कवायद तेज़

अतिक्रमण हटाने के तुरंत बाद प्राधिकरण ने ग्रीन बेल्ट को पुनः बहाल करने के लिए पौधरोपण का कार्य शुरू कर दिया। ओएसडी गुंजा सिंह के अनुसार, ग्रीन बेल्ट को दोबारा हरियाली में बदलना ही अब प्राथमिकता है।


एसीईओ श्रीलक्ष्मी वी.एस. का बड़ा बयान – ‘बख्शा नहीं जाएगा कोई’

एसीईओ श्रीलक्ष्मी वी.एस. ने इस कार्यवाही पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा,

ग्रीन बेल्ट की भूमि पर अवैध निर्माण करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि कोई भी संपत्ति खरीदने या किराए पर लेने से पहले उसकी वैधता की जांच अवश्य करें।


सीईओ एन.जी. रवि कुमार ने दी सराहना, भविष्य में और तेज़ होंगी कार्रवाइयां

सीईओ रवि कुमार ने इस सफल ऑपरेशन के लिए प्राधिकरण की टीम और पुलिस बल की सराहना की। उन्होंने साफ़ किया कि

ग्रीन बेल्ट और सार्वजनिक ज़मीनों को संरक्षित रखने के लिए इस तरह की सख्त कार्रवाइयों का दायरा और बढ़ाया जाएगा।


इन प्रमुख अधिकारियों ने निभाई अहम भूमिका:

  • ओएसडी (भूलेख): रामनयन सिंह
  • डीजीएम (उद्यान): संजय कुमार जैन
  • वरिष्ठ प्रबंधक: चेतराम सिंह, राजेश कुमार निम, पीपी मिश्र
  • सहायक निदेशक (उद्यान): बुद्ध विलास
  • प्रबंधक: प्रशांत समाधिया, मिथिलेश कुमार

क्यों ज़रूरी है ग्रीन बेल्ट की सुरक्षा?

  • ग्रीन बेल्ट शहर की ‘लंग्स’ होती हैं — ये प्रदूषण को कम करने में मदद करती हैं।
  • शहरी तापमान नियंत्रण, भूस्खलन से रोकथाम, और स्थानीय जैवविविधता को संरक्षित रखना ग्रीन बेल्ट का उद्देश्य है।
  • अतिक्रमण के कारण न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान होता है, बल्कि शहर की खूबसूरती और इन्फ्रास्ट्रक्चर भी प्रभावित होता है।

क्या है कानून?

ग्रीन बेल्ट की भूमि पर कोई भी व्यावसायिक या निजी निर्माण पूर्णतः गैरकानूनी है। प्राधिकरण और शहरी विकास नीति के तहत ऐसे निर्माणों पर बिना पूर्व सूचना तोड़फोड़ की जा सकती है।


रफ़्तार टुडे की अपील: ‘हर पेड़ को ज़मीन चाहिए, कब्ज़ा नहीं’

रफ़्तार टुडे की ओर से यह अपील की जाती है कि

हर नागरिक अपने शहर की हरियाली को बचाने में भागीदार बने। ग्रीन बेल्ट सिर्फ सरकारी जिम्मेदारी नहीं, हम सभी की सामूहिक धरोहर है।


आगे क्या होगा?

अब देखने वाली बात होगी कि प्राधिकरण इस तरह की कार्यवाही को किस गति से अन्य क्षेत्रों में भी आगे बढ़ाता है। क्या अगला नंबर बीटा, ओमेगा या किसी अन्य सेक्टर का होगा? क्या अब हरियाली पर कब्ज़ा करना पूरी तरह बंद होगा?


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