Sharda University News : शारदा विश्वविद्यालय में परमाणु स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीकों पर कार्यशाला, विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा देने वाला बड़ा आयोजन, परमाणु स्पेक्ट्रोस्कोपी का महत्व – विज्ञान की नई भाषा

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। ग्रेटर नोएडा लगातार शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में अपना परचम लहरा रहा है। इसी कड़ी में नॉलेज पार्क स्थित शारदा विश्वविद्यालय ने वैज्ञानिक प्रगति की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उठाया। विश्वविद्यालय की केंद्रीय उपकरण सुविधा (Central Instrumentation Facility) ने हाल ही में दो दिवसीय व्यावहारिक कार्यशाला का सफल आयोजन किया, जिसका मुख्य विषय था परमाणु स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीकों का उपयोग और महत्व।
इस कार्यशाला ने न केवल शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को नई दिशा दी, बल्कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की उनकी क्षमता को भी बढ़ावा दिया।
शिक्षा और शोध का अद्वितीय संगम
कार्यशाला में न केवल शारदा विश्वविद्यालय के छात्र-शोधार्थियों ने भाग लिया, बल्कि गलगोटिया विश्वविद्यालय, एमिटी विश्वविद्यालय और ICAR-भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (करनाल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के स्नातक, स्नातकोत्तर, डॉक्टरेट विद्वान और संकाय सदस्य भी शामिल हुए।
इस विविध सहभागिता ने कार्यक्रम को और भी समृद्ध बना दिया, क्योंकि यहाँ विचारों और अनुभवों का ऐसा आदान-प्रदान हुआ जो शिक्षा और शोध को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में सहायक साबित होगा।
कार्यशाला का उद्घाटन और प्रमुख विचार
कार्यशाला का उद्घाटन डॉ. भुवनेश कुमार (डीन रिसर्च, शारदा विश्वविद्यालय) ने किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप आज उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को केवल किताबों का ज्ञान ही नहीं बल्कि आधुनिक उपकरणों के उपयोग और व्यावहारिक प्रशिक्षण का भी अवसर दें।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि हाइफ़नेटेड तकनीकों में महारत हासिल करना भविष्य की मांग है, और इस कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को वैश्विक मानकों के अनुरूप कौशल हासिल करने का मौका मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और तकनीकी प्रशिक्षण
इस कार्यशाला के सबसे खास आकर्षण रहे डॉ. अतुल कुमार गुप्ता, जिन्होंने प्रतिभागियों को परमाणु स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीकों के संचालन, उपकरणों के प्रयोग और डेटा विश्लेषण पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन दिया।
सत्रों में यह स्पष्ट किया गया कि स्पेक्ट्रोस्कोपी का प्रयोग केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध हमारे जीवन से है। चाहे खाद्य सुरक्षा की जांच हो, मिट्टी और पानी की गुणवत्ता का परीक्षण, दवाइयों का निर्माण या फिर पर्यावरण प्रदूषण की निगरानी – इन सभी में यह तकनीक बेहद उपयोगी है।
प्रमाण पत्र वितरण और सम्मान समारोह
कार्यशाला के समापन समारोह में शारदा विश्वविद्यालय के कुलपति (Vice Chancellor) डॉ. सिबाराम खारा ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए और उनके उत्साह की सराहना की।
उन्होंने कहा –
“इस तरह के आयोजन हमारी शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं और विद्यार्थियों को शोध और नवाचार की ओर प्रेरित करते हैं। शारदा विश्वविद्यालय भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा, ताकि यहाँ के विद्यार्थी और शोधार्थी वैज्ञानिक प्रगति की दौड़ में हमेशा आगे रहें।”
अन्य विशिष्ट उपस्थिति
कार्यशाला के उद्घाटन और सत्रों में कई वरिष्ठ शिक्षाविद भी शामिल हुए। इनमें प्रमुख नाम रहे डॉ. संतोष कुमार मिश्रा, प्रमुख (जीवन विज्ञान विभाग)
डॉ. अनुपम अग्रवाल, एसोसिएट प्रोफेसर (रसायन विज्ञान एवं जैव रसायन विभाग)
इन दोनों शिक्षाविदों ने कार्यशाला को विद्यार्थियों के लिए एक मील का पत्थर बताया और कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिकता से जोड़ते हैं, बल्कि विद्यार्थियों को आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर भी बनाते हैं।
परमाणु स्पेक्ट्रोस्कोपी का महत्व – विज्ञान की नई भाषा
परमाणु स्पेक्ट्रोस्कोपी विज्ञान की वह तकनीक है, जिसके माध्यम से किसी भी पदार्थ की संरचना और उसमें उपस्थित तत्वों की पहचान की जा सकती है।
इसका उपयोग फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री में दवाइयों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में किया जाता है।
कृषि और खाद्य क्षेत्र में यह तकनीक यह जांचने के लिए कारगर है कि किसी फसल या खाद्य पदार्थ में हानिकारक तत्व तो मौजूद नहीं। पर्यावरण विज्ञान में पानी और मिट्टी की शुद्धता को परखने में इसका अहम योगदान है।
वहीं, अनुसंधान प्रयोगशालाओं में वैज्ञानिक नए प्रयोगों और खोजों के लिए इसी तकनीक पर भरोसा करते हैं। इस दृष्टिकोण से देखा जाए तो शारदा विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित यह कार्यशाला भविष्य के वैज्ञानिकों को सीखने और समझने का दुर्लभ अवसर प्रदान करती है।
शारदा विश्वविद्यालय – नवाचार और अनुसंधान का केंद्र
ग्रेटर नोएडा का शारदा विश्वविद्यालय लगातार शिक्षा, नवाचार और शोध के क्षेत्र में अपने प्रयासों से चर्चा में बना हुआ है। यह विश्वविद्यालय अब केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का केंद्र बनता जा रहा है।
इस कार्यशाला ने यह साबित कर दिया कि शारदा विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता सिर्फ डिग्री देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ विद्यार्थियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, व्यावहारिक ज्ञान और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी प्रदान की जाती है।



