Fortis Hospital News : जीवनशैली से बढ़ रहे किडनी रोगों के बीच बड़ी पहल, फोर्टिस ग्रेटर नोएडा में अत्याधुनिक हेमोडायफिल्ट्रेशन मशीन का शुभारंभ, पारंपरिक डायलिसिस से अधिक प्रभावी तकनीक, गंभीर मरीज का सफल उपचार, लाइफस्टाइल बीमारियों को लेकर डॉक्टरों की चेतावनी

ग्रेटर नोएडा, रफ्तार टूडे। विश्व किडनी दिवस के अवसर पर Fortis Hospital Greater Noida ने किडनी रोगों के बढ़ते मामलों को देखते हुए अत्याधुनिक नेक्स्ट-जेनरेशन हेमोडायफिल्ट्रेशन (HDF) मशीन का शुभारंभ किया। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि बदलती जीवनशैली के कारण गुर्दे से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और आधुनिक तकनीक के माध्यम से मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना जरूरी हो गया है।
डॉक्टरों के अनुसार आजकल बॉडीबिल्डिंग के लिए प्रोटीन सप्लीमेंट का अत्यधिक सेवन, नियमित स्वास्थ्य जांच न कराना, आनुवांशिक कारण, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मोटापा जैसे कारक किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं। यही वजह है कि अस्पताल ने उन्नत डायलिसिस तकनीक को मरीजों के लिए उपलब्ध कराया है।
पारंपरिक डायलिसिस से अधिक प्रभावी तकनीक
अस्पताल द्वारा शुरू की गई यह नई तकनीक पारंपरिक हेमोडायलिसिस से अधिक उन्नत मानी जाती है। इसमें डिफ्यूजन और हाई-वॉल्यूम कन्वेक्शन दोनों प्रक्रियाओं का संयोजन होता है, जिससे रक्त में मौजूद छोटे और मध्यम आकार के विषैले तत्वों (टॉक्सिन्स) को अधिक प्रभावी तरीके से हटाया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक डायलिसिस के दौरान मरीज के ब्लड प्रेशर को स्थिर रखने में भी मदद करती है और लंबे समय तक डायलिसिस पर निर्भर मरीजों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।
गंभीर मरीज का सफल उपचार
इस अत्याधुनिक तकनीक का प्रदर्शन करते हुए अस्पताल के डॉक्टरों ने हाल ही में एक 32 वर्षीय महिला मरीज का सफल उपचार भी किया। यह मरीज पहले से किडनी ट्रांसप्लांट करा चुकी थी, लेकिन प्रत्यारोपित गुर्दा काम करना बंद कर चुका था और वह डायलिसिस पर निर्भर थी।
जब मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया गया तो उसकी स्थिति बेहद गंभीर थी। उसे सांस लेने में कठिनाई हो रही थी, ब्लड प्रेशर गिर चुका था और तेज बुखार भी था। डॉक्टरों के अनुसार उस समय मरीज के बचने की संभावना लगभग 10 प्रतिशत ही रह गई थी।
डॉक्टरों की टीम ने अपनाया एडवांस उपचार
इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में Dr. Ravinder Singh Bhadoria (एडिशनल डायरेक्टर – नेफ्रोलॉजी) और Dr. Prashant Kumar (कंसल्टेंट – यूरोलॉजी) के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने पारंपरिक डायलिसिस की जगह एडवांस हेमोडायफिल्ट्रेशन तकनीक अपनाने का निर्णय लिया।
करीब चार घंटे चली इस प्रक्रिया के दौरान मरीज के रक्त से विषैले तत्वों को हटाया गया और उसके ब्लड प्रेशर तथा हृदय की स्थिति को स्थिर रखा गया। उपचार के बाद मरीज की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ और अब वह स्थिर है।
लाइफस्टाइल बीमारियों को लेकर डॉक्टरों की चेतावनी
डॉ. रविंदर सिंह भदोरिया ने कहा कि आजकल किडनी रोगों के अधिकांश मामले जीवनशैली से जुड़े होते हैं। अनियंत्रित मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, प्रोटीन सप्लीमेंट्स का अत्यधिक सेवन और समय पर स्वास्थ्य जांच न कराना किडनी को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते बीमारी का पता चल जाए और इलाज शुरू कर दिया जाए तो किडनी को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है। अन्यथा मरीज को आजीवन डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट का सहारा लेना पड़ सकता है।
बेहतर जीवन गुणवत्ता में मददगार तकनीक
डॉ. प्रशांत कुमार के अनुसार ऑनलाइन एचडीएफ तकनीक पारंपरिक डायलिसिस की तुलना में अधिक प्रभावी होती है। इसमें डिफ्यूजन और कन्वेक्शन दोनों प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाता है, जिससे बड़े आकार के टॉक्सिन्स भी रक्त से बाहर निकल जाते हैं।
यह तकनीक शरीर में सूजन (इंफ्लेमेशन) को कम करने में भी मदद करती है और लंबे समय तक डायलिसिस कराने वाले मरीजों में होने वाली जटिलताओं को कम करती है। इसके अलावा मरीजों को डायलिसिस के दौरान बेहतर ब्लड प्रेशर महसूस होता है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिलता है।
आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने की पहल
अस्पताल के फैसिलिटी डायरेक्टर Siddharth Nigam ने बताया कि नेक्स्ट-जेनरेशन एचडीएफ तकनीक की शुरुआत के साथ फोर्टिस ग्रेटर नोएडा ने अपनी डायलिसिस और नेफ्रोलॉजी सेवाओं को और मजबूत किया है।
उन्होंने कहा कि अस्पताल का लक्ष्य मरीजों को आधुनिक और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराना है, ताकि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के जीवन और उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके।



