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Noida Kisan News : “अब किसान पीछे नहीं हटेगा!” — नोएडा प्राधिकरण से वार्ता विफल, भारतीय किसान यूनियन (मंच) ने 3 नवंबर को विशाल महापंचायत का किया ऐलान, कहा – “अब हक लेकर ही लौटेंगे किसान!”, धरने में उमड़ा जनसैलाब — सैकड़ों किसानों ने दिखाई एकजुटता

नोएडा, रफ़्तार टुडे। नोएडा प्राधिकरण मुख्यालय के बाहर भारतीय किसान यूनियन (मंच) का अनिश्चितकालीन धरना तीसरे दिन भी पूरे जोश और संकल्प के साथ जारी रहा। इस दौरान किसानों और प्राधिकरण के बीच हुई करीब तीन घंटे दस मिनट लंबी वार्ता किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। परिणामस्वरूप, वार्ता को विफल घोषित कर दिया गया और किसानों ने तीन नवंबर को “महापंचायत” बुलाने का एलान कर दिया।

धरने की अध्यक्षता मूलचंद शर्मा ने की और संचालन सुनील भाटी द्वारा किया गया। धरना स्थल पर किसानों के बीच प्राधिकरण के ओएसडी क्रांति शेखर, अरविंद कुमार और एसीपी प्रवीण कुमार पहुंचे। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे अपनी समस्याएं अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश के समक्ष रखें। किसानों ने प्रस्ताव स्वीकार करते हुए प्रत्येक गांव से दो-दो प्रतिनिधियों के साथ प्राधिकरण बोर्ड रूम में बैठक की।

तीन घंटे की बातचीत रही बेअसर — किसानों ने कहा “अब समझौता नहीं, समाधान चाहिए”

करीब तीन घंटे तक चली वार्ता में किसानों ने अपने मुआवजा, भूखंड आबंटन, किसान कोटे, आबादी निस्तारण और 5% विकसित भूखंड से संबंधित पुराने लंबित मुद्दे जोरदार ढंग से रखे। किसानों ने कहा कि ये सभी मामले वर्षों से अधर में लटके हैं और अधिकारी केवल आश्वासन पर आश्वासन दे रहे हैं।

हालांकि प्राधिकरण अधिकारियों ने किसानों को समझाने की कोशिश की, परंतु कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया। बैठक के बाद किसान नेताओं ने स्पष्ट कहा “अब किसान पीछे नहीं हटेगा, यह आंदोलन अब निर्णायक चरण में है।”

विमल त्यागी का ऐलान — “अब किसान हक लेकर ही लौटेगा!”

धरने को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन (मंच) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विमल त्यागी ने कहा “नोएडा प्राधिकरण किसानों को हल्के में लेने की भूल न करे। इस बार किसान केवल आश्वासन नहीं, बल्कि अपना हक लेकर ही लौटेंगे। चाहे धरना महीनों क्यों न चले, अब किसान नहीं झुकेगा।”

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार और प्राधिकरण ने समय रहते किसान हितों का समाधान नहीं किया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इसी के तहत विमल त्यागी ने घोषणा की कि
3 नवंबर 2025, सोमवार को नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पर विशाल महापंचायत आयोजित की जाएगी।
इस महापंचायत में प्रदेशभर के किसान जुटेंगे और आगे की रणनीति तय होगी।

सुधीर चौहान ने उठाए तीखे सवाल — “क्यों लटकाए जा रहे हैं किसानों के केस?”

राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधीर चौहान ने वार्ता के दौरान प्राधिकरण अधिकारियों से तीखे सवाल दागे। उन्होंने कहा कि किसानों के 5% भूखंड और मुआवजा के मामलों में दशकों से लापरवाही की जा रही है। “सरकारें आती-जाती रहती हैं, पर किसान के हिस्से की जमीन और मुआवजा आज भी अधर में है। अधिकारी खुद मान रहे हैं कि किसानों को उनका अधिकार नहीं मिला, फिर कार्रवाई क्यों नहीं?”

अशोक चौहान का आरोप — “नोएडा प्राधिकरण ने किसानों को वर्षों से छलने का काम किया है”

राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान ने बैठक के दौरान अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश से कहा कि “नोएडा प्राधिकरण ने हमेशा किसानों को धोखा दिया है। 1976 से 1997 के बीच अधिग्रहित भूमि वाले किसानों को 5% से 10% भूखंड देने, आबादी के निस्तारण और पुनर्वास के वादे किए गए थे — परंतु अब तक यह वादे अधूरे हैं।”

उन्होंने आगे कहा “अब किसान झुकने वाला नहीं। या तो प्राधिकरण पर किसानों की सुनवाई होगी, या फिर किसान वहीं समाधि बनाएंगे। यह आंदोलन अब सम्मान की लड़ाई बन चुका है।”

धरने में उमड़ा जनसैलाब — सैकड़ों किसानों ने दिखाई एकजुटता

धरने स्थल पर माहौल बेहद ऊर्जावान रहा। नारे गूंज रहे थे —
“किसान एकता जिंदाबाद!”,
“हमारा हक हमें दो, नहीं तो कुर्सी छोड़ो!”

धरने में प्रमुख रूप से प्रमोद त्यागी, सूरज प्रधान, चरण सिंह प्रधान, कालू प्रधान, सुरेंद्र प्रधान, गौतम लोहिया, एडवोकेट दिनेश भाटी, मनविंदर भाटी, चिंकू यादव, उमंग शर्मा, मूले चौहान, वीर सिंह टाइगर, गजेंद्र बैसोया, प्रिंस भाटी, आशीष चौहान, राजपाल चौहान, राहुल पंवार, अमित बैसोया, रिंकू यादव, अभिषेक चौहान, अनुप चौहान, मास्टर बीर सिंह चौहान, सुरेंद्र निर्वाण, रोहित यादव, पुष्पेंद्र चौहान, तेज सिंह चौहान, भंवर सिंह चौहान, रोहित शर्मा और नवल चौहान सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।

महापंचायत में होगा निर्णायक फैसला” — किसानों में उत्साह और आक्रोश दोनों

वार्ता विफल होने के बाद किसानों ने 3 नवंबर को होने वाली महापंचायत को लेकर तैयारी तेज कर दी है। भारतीय किसान यूनियन (मंच) के अनुसार, इस बार महापंचायत में आसपास के जिलों — गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, हापुड़, अलीगढ़, मेरठ, बागपत और गाजियाबाद से किसान शामिल होंगे।

किसान नेताओं का कहना है कि महापंचायत में आगामी आंदोलन की अवधि, रणनीति और संघर्ष कार्यक्रम तय किया जाएगा।

किसानों की 5 मुख्य मांगें

1. अधिग्रहित भूमि के बदले 5% से 10% विकसित भूखंड का तत्काल आवंटन।

2. 1976 से 1997 तक के किसान कोटे के लंबित प्लॉट मामलों का निस्तारण।

3. आबादी भूखंडों का वैध समाधान और रजिस्ट्री की सुविधा।

4. भूमि मुआवजा दरों का पुनर्मूल्यांकन और ब्याज सहित भुगतान।

5. किसानों से किए गए सभी पुराने समझौते पत्रों का पालन।

किसानों की आवाज़ — “अब आश्वासन नहीं, अधिकार चाहिए!”

धरने में शामिल एक बुजुर्ग किसान ने कहा “हमने ज़मीन दी, विकास के लिए कुर्बानी दी, लेकिन बदले में सिर्फ वादे मिले। अब किसान को उसका हक चाहिए, न कि झूठे भरोसे।”

धरना स्थल पर महिलाएं भी बड़ी संख्या में मौजूद थीं, जिन्होंने कहा कि वे अपने बेटों के साथ आंदोलन में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेंगी।

आंदोलन के निर्णायक चरण में पहुंचे किसान

नोएडा प्राधिकरण और किसानों के बीच तीसरे दिन की वार्ता विफल रही। किसानों के रुख से साफ है कि अब यह आंदोलन सिर्फ मांगों तक सीमित नहीं, बल्कि अधिकार की लड़ाई बन चुका है। 3 नवंबर की महापंचायत इस संघर्ष की दिशा तय करेगी —
क्या सरकार झुकेगी या किसान?

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Raftar Today
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