Jila Panchayat Elections News पंचायत चुनाव की आहट से गर्माई सियासत, परिसीमन के साथ ही हर वार्ड में सक्रिय हुए दावेदार, नेताओं ने तेज की जनसंपर्क की रफ्तार कार्यकर्ताओं में दिखा नया जोश, चुनावी माहौल में आई गरमी

गौतमबुद्ध नगर, रफ़्तार टुडे। गौतमबुद्ध नगर ज़िले में पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। जैसे-जैसे चुनावी समय नज़दीक आ रहा है, वैसे-वैसे सभी वार्डों में राजनीतिक गतिविधियां भी परवान चढ़ रही हैं। ज़िले के गांव-गांव में चुनावी चर्चाएं आम हो गई हैं। लोग अब केवल विकास या पंचायत की समस्याओं की बात नहीं कर रहे, बल्कि यह भी तय करने लगे हैं कि आने वाले चुनाव में किसे मौका दिया जाए और किसे नकारा जाए। वार्ड परिसीमन की प्रक्रिया ने तो इस माहौल में और भी नई ऊर्जा भर दी है।
गौतमबुद्ध नगर में पंचायत चुनाव की आहट ने राजनीतिक सरगर्मी को चरम पर पहुंचा दिया है। वार्ड परिसीमन से बदले समीकरणों ने इस बार का चुनाव और भी दिलचस्प बना दिया है। नेताओं ने जनता के बीच पैठ बनानी शुरू कर दी है, पार्टियों ने अपने संगठन को सक्रिय कर दिया है और ग्रामीण भी पूरी तरह चुनावी माहौल में डूब चुके हैं। अब देखना यह होगा कि 2026 के पंचायत चुनाव में जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है और किसे नकार देती है।
वार्ड परिसीमन ने बदले चुनावी समीकरण
इस बार का पंचायत चुनाव पहले से कहीं ज्यादा रोचक और चुनौतीपूर्ण होगा, क्योंकि प्रशासन ने वार्डों का नया परिसीमन किया है। इस प्रक्रिया के चलते कई गांव अब अलग-अलग वार्डों में बांटे गए हैं तो कई नए वार्ड भी उभरकर सामने आए हैं। इसका सीधा असर उम्मीदवारों की रणनीति पर पड़ रहा है। जो नेता पहले एक खास गांव या क्षेत्र पर अपनी पकड़ मजबूत मानते थे, अब उन्हें नए सिरे से अपने समीकरण बनाने पड़ रहे हैं।
गांव-गांव में तेज हुई दावेदारी
कासना, नगला, बुढ़सरा, प्रवासी नगर, देवला, अच्छेजा और हिम्मतपुर जैसे बड़े गांवों में संभावित प्रत्याशियों ने अपनी दावेदारी ठोकनी शुरू कर दी है। वहीं सुजाना, मोजरनगर, हरौला और नगला नागर जैसे गांवों में भी चुनावी रंग दिखने लगे हैं। लोगों से मुलाकात, चौपाल बैठकों का आयोजन और सोशल मीडिया पर सक्रियता, प्रत्याशी बनने के इच्छुक चेहरों की पहली पसंद बन गई है। हर कोई अपने-अपने स्तर पर लोगों को यह समझाने की कोशिश कर रहा है कि वही गांव और वार्ड का सच्चा प्रतिनिधि है।
चुनावी माहौल में आई गरमी
वार्ड परिसीमन ने चुनावी चर्चाओं को और ज्यादा गरमा दिया है। गांवों में सुबह-शाम चौपालों और नुक्कड़ बैठकों में केवल एक ही मुद्दा चर्चा में है – “अगला प्रधान कौन?”
प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ गांवों में घूम रहे हैं, वहीं ग्रामीण भी अपने हिसाब से समीकरण जोड़-घटाकर देख रहे हैं। कहीं जातिगत समीकरण बन रहे हैं तो कहीं विकास का मुद्दा प्रमुख है।

पार्टियां भी कूद पड़ीं मैदान में
ग्राम पंचायत चुनावों को लेकर केवल प्रत्याशी ही नहीं बल्कि बड़ी राजनीतिक पार्टियां भी पूरी तरह सक्रिय हो चुकी हैं। बीजेपी, सपा, बसपा और कांग्रेस सभी ने अपने-अपने स्थानीय संगठनों को वार्डवार समीकरण साधने का जिम्मा दे दिया है। बीजेपी ने तो हाल ही में गौतमबुद्ध नगर से धर्मेंद्र कोरी को जिला महामंत्री नियुक्त कर दिया है। इस फैसले ने पार्टी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भर दिया है और संगठन को मजबूती देने की प्रक्रिया और तेज हो गई है।
कार्यकर्ताओं में उत्साह, जनसंपर्क अभियान शुरू
जिला महामंत्री की नियुक्ति के बाद से बीजेपी कार्यकर्ता गांव-गांव में सक्रिय हो गए हैं। कार्यकर्ता बैठकों का दौर चल रहा है और नए चेहरों को पार्टी से जोड़ने का अभियान भी तेज हो गया है। दूसरी ओर विपक्षी पार्टियों ने भी अपने-अपने मजबूत प्रत्याशियों को मैदान में उतारने की तैयारी शुरू कर दी है। कार्यकर्ता लगातार गांवों का दौरा कर रहे हैं और जनता की समस्याओं को सुनकर उन्हें अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं।
छोटे गांव भी पीछे नहीं
छोटे-छोटे गांव, जो पहले चुनावी हलचल से थोड़ा दूर रहते थे, अब पूरी तरह से राजनीति की मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं। वहां भी चौपालों और बैठकों का दौर तेज़ हो गया है। लोग चाहते हैं कि इस बार चुनाव में उनकी भी आवाज सुनी जाए और गांव में विकास के नए काम हों।
जनता की सोच भी बदल रही
इस बार का पंचायत चुनाव केवल जाति या दबंगई पर आधारित नहीं होगा, बल्कि जनता विकास और शिक्षा को भी अहमियत दे रही है। खासकर युवा वर्ग चाहता है कि गांव में रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाए। महिलाएं भी खुलकर अपने विचार रख रही हैं और चाहती हैं कि कोई ऐसा प्रतिनिधि आए जो सच्चे अर्थों में गांव की बेहतरी करे।



