Kisan Mahapanchyat On Authority News : ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर किसानों का हुंकार!, हजारों किसानों की महापंचायत से गूंजा प्राधिकरण परिसर, बोले सोरन प्रधान—“अब सिर्फ आश्वासन नहीं, हक चाहिए”, 10% प्लॉट और नए भूमि अधिग्रहण कानून को लेकर आर-पार की लड़ाई, 44 गांवों के किसानों की एकजुटता बनी आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ किसानों का लंबे समय से चला आ रहा असंतोष शुक्रवार को एक बार फिर बड़े जनआंदोलन के रूप में सामने आया। किसान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले आयोजित विशाल महापंचायत और प्रदर्शन में सैकड़ों नहीं बल्कि बड़ी संख्या में किसान विभिन्न गांवों से प्राधिकरण कार्यालय पहुंचे। किसानों ने आरोप लगाया कि वर्षों से उनकी मांगें लंबित हैं, लेकिन प्राधिकरण और शासन स्तर पर केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं, समाधान नहीं।
महापंचायत में किसानों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान पूरे प्राधिकरण परिसर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। भारी संख्या में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती रही ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
44 गांवों के किसानों की एकजुटता बनी आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत
शुक्रवार को आयोजित महापंचायत में ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के लगभग 44 गांवों से किसान पहुंचे। इस आंदोलन में किसान सभा, किसान एकता संघ, किसान परिषद सहित एक दर्जन से अधिक किसान संगठनों ने भाग लिया। विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक मंच से किसानों की समस्याओं को उठाते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण के बाद भी किसानों को उनका पूरा अधिकार नहीं मिल पा रहा है। किसानों का कहना था कि विकास परियोजनाओं के नाम पर उनकी जमीनें ली गईं, लेकिन बदले में जो सुविधाएं और अधिकार मिलने चाहिए थे, वे आज तक अधूरे हैं। यही कारण है कि अब किसान एकजुट होकर निर्णायक लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं।

प्राधिकरण कार्यालय में प्रवेश को लेकर बढ़ा तनाव
महापंचायत के बाद कुछ किसान अपनी मांगों को सीधे अधिकारियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्राधिकरण कार्यालय के अंदर जाने लगे। मुख्य द्वार पर तैनात पुलिस बल ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच हल्की नोकझोंक भी हुई। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को समझदारी से संभाल लिया और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं होने दी। सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी थी कि प्राधिकरण परिसर के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल, बैरिकेडिंग और निगरानी की विशेष व्यवस्था की गई थी।
सोरन प्रधान बोले—“कई वर्षों से चक्कर लगा रहे, समाधान नहीं मिला”
महापंचायत को संबोधित करते हुए किसान नेता सोरन प्रधान ने कहा कि किसान कई वर्षों से अपनी जायज मांगों को लेकर प्राधिकरण के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन दिया जाता है। उन्होंने कहा कि किसान अब थक चुके हैं और उन्हें अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने सभी किसान संगठनों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि किसानों की ताकत उनकी एकता में है।

10 प्रतिशत विकसित प्लॉट बना सबसे बड़ा मुद्दा
महापंचायत में सबसे प्रमुख मांग 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट दिए जाने की रही। किसानों का कहना है कि विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित भूमि के बदले उन्हें विकसित भूखंड दिए जाने चाहिए, ताकि वे भी विकास प्रक्रिया का हिस्सा बन सकें।
इसके अलावा किसानों ने नए भूमि अधिग्रहण कानून को पूरी तरह लागू करने, लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण करने और किसानों से जुड़े अन्य विवादों का समाधान करने की मांग भी उठाई।
किसानों ने गिनाईं अपनी प्रमुख मांगें
महापंचायत के दौरान किसानों ने कई महत्वपूर्ण मांगों को दोहराया— अधिग्रहित भूमि के बदले 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट दिए जाएं।
नए भूमि अधिग्रहण कानून को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
किसानों के लंबित मुआवजा और अन्य मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जाए।
प्राधिकरण और किसान संगठनों के बीच नियमित संवाद स्थापित किया जाए।
विकास योजनाओं में किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाए।
प्राधिकरण परिसर में सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम
महापंचायत और प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। प्राधिकरण कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वारों पर बैरिकेडिंग की गई और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए। अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।

क्या निकलेगा समाधान या बढ़ेगा आंदोलन?
ग्रेटर नोएडा में किसानों का यह प्रदर्शन एक बार फिर यह संकेत दे गया है कि भूमि अधिग्रहण और किसान हितों से जुड़े मुद्दे अभी भी पूरी तरह सुलझे नहीं हैं। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
अब सभी की निगाहें ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और प्रदेश सरकार पर हैं कि वे किसानों की मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं। यदि जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।



