Greater Noida West News : "बेसमेंट बना तालाब, सुविधाएं हुई गायब!", नॉलेज पार्क 5 और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की सुपरटेक इकोविलेज-2 सोसाइटी की बदहाली से त्रस्त निवासी बोले – ‘योगी जी!, नाव भिजवा दीजिए, अब पानी से होकर ही गाड़ी तक जाना है’, स्मार्ट सिटी नहीं, 'स्वैम्प सिटी' बन गई है सोसाइटी!

ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टुडे।
एक ओर जहां सरकार स्मार्ट सिटीज़ और आदर्श आवासीय योजनाओं की बात कर रही है, वहीं ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर 16बी की सुपरटेक इकोविलेज-2 सोसाइटी की हालत देखकर लगता है जैसे लोग कंक्रीट के बने टापू पर फंसे हों।
यहां के निवासियों को बारिश के मौसम में ना सुरक्षा मिली, ना सफाई और ना ही निकलने का रास्ता! बल्कि अब तो लोग मजाक में नहीं बल्कि हकीकत में प्राधिकरण से नाव की मांग कर रहे हैं ताकि वे अपने बच्चों को स्कूल और खुद को ऑफिस पहुंचा सकें।
बेसमेंट में फैला गंदा पानी, संक्रमण और बीमारियों का डर
सोसाइटी के बी-6 टावर में रहने वाले करीब 100 परिवार दो महीने से ज्यादा समय से बेसमेंट में भरे गंदे और बदबूदार पानी के बीच जी रहे हैं। यह पानी घरों के टॉयलेट से निकला सीवरेज वेस्ट है, जिसमें अब कीड़े और मच्छरों की भरमार हो गई है।
रहवासी अमित गुप्ता कहते हैं –
“हम हर दिन इसी गंदे पानी में से चलकर अपनी गाड़ियों तक पहुंचते हैं। बच्चे स्कूल इसी रास्ते से जाते हैं और कोई सुनने वाला नहीं है। प्राधिकरण को कई बार मेल की, लेकिन अब लगता है हमें ‘नाव’ भेजने की मांग करनी चाहिए।”
बुजुर्ग और बच्चों के लिए बना जानलेवा खतरा
बेसमेंट से लिफ्ट तक जाने के लिए लोगों को इसी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। बच्चों का स्कूल छूट जाए या बुजुर्गों को डॉक्टर के पास जाना हो, पहले उसी बदबूदार गंदगी में उतरना जरूरी है।
रश्मि पांडे, जो बी-6 टावर में रहती हैं, कहती हैं –
“मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की थी, लेकिन वहां से जवाब आता है कि ‘समस्या निस्तारित’। अब बताइए, क्या गंदे पानी में चलना निस्तारण कहलाता है?”
बिल्डर और मेंटेनेंस टीम की लापरवाही बनी लोगों की जान का खतरा
यह कोई नई समस्या नहीं है। सुपरटेक इकोविलेज-2 की मेंटेनेंस टीम और बिल्डर पर पहले भी अव्यवस्थाओं को लेकर आरोप लगते रहे हैं।
यहां के निवासी बताते हैं कि शिकायत करने पर मेंटेनेंस वाले सिर्फ नए बहाने और नई तारीखें देते हैं। न तो सफाई होती है, न ही जल निकासी का समाधान।
“अगर किसी दिन लिफ्ट बंद हो गई और किसी को मेडिकल इमरजेंसी आ गई तो कौन जिम्मेदार होगा?”
मेंटेनेंस के नाम पर सिर्फ वसूली, सुविधा नाम की कोई चीज नहीं
हर महीने मेंटेनेंस चार्ज भरने के बावजूद, यहां रहने वाले लोग खुद को छले गए महसूस करते हैं।
“मेंटेनेंस तो हम देते हैं पूरी ईमानदारी से, लेकिन न तो पार्किंग साफ होती है, न बेसमेंट, और ना ही लिफ्ट चलती रहती है।”
– निवासी दीपिका शर्मा
स्मार्ट सिटी नहीं, ‘स्वैम्प सिटी’ बन गई है सोसाइटी!
सुपरटेक इकोविलेज-2 का हाल देखकर लगता है मानो ग्रेटर नोएडा वेस्ट की सोसाइटीज़ अब जलमहल बनती जा रही हैं।
बारिश आते ही यहां जलभराव, सीवरेज का ओवरफ्लो, बदबू और मच्छरों का साम्राज्य बन जाता है।
पीएम और सीएम पोर्टल पर भी लगाई गई गुहार, फिर भी कोई सुनवाई नहीं
कई निवासियों ने मुख्यमंत्री पोर्टल और प्रधानमंत्री पोर्टल दोनों पर शिकायतें दर्ज कराई हैं।
अमित गुप्ता बताते हैं –
“प्रधानमंत्री पोर्टल पर डाली गई शिकायत लखनऊ तक पहुंची, लेकिन स्थानीय स्तर पर वही मैनेजर अपनी मर्जी से रिप्लाई कर देते हैं कि ‘समस्या हल हो गई।’ जबकि समस्या जस की तस बनी हुई है।”
क्या इंतजार है प्रशासन को किसी हादसे का?
कहीं यह समस्या तब तक बनी रहेगी जब तक कोई बड़ा हादसा या जनहानि ना हो जाए?
यदि कोई बच्चा गंदे पानी में गिर जाए, बिजली का करंट लग जाए या किसी बुजुर्ग को मेडिकल इमरजेंसी के वक्त रास्ता न मिले, तो कौन होगा जवाबदेह?
निवासियों की अपील – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करें हस्तक्षेप
अब स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, नोएडा अथॉरिटी या जिला प्रशासन इस मामले में संज्ञान लेकर बिल्डर और मेंटेनेंस एजेंसी पर सख्त कार्रवाई करेगा।
“योगी सरकार ने बुलडोज़र से माफियाओं का सफाया किया, अब कृपया सीवर माफियाओं और लापरवाह बिल्डरों पर भी कार्रवाई हो!”
सोशल मीडिया पर गूंज रही है आवाज, वायरल हो रहे हैं वीडियो और तस्वीरें
लोगों ने इस नरकीय स्थिति को लेकर ट्विटर (X), फेसबुक और रेडिट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो और तस्वीरें पोस्ट करनी शुरू कर दी हैं।
#EcoVillage2Crisis और #BasementFlood जैसी हैशटैग तेजी से वायरल हो रहे हैं।
बिल्डर और मेंटेनेंस एजेंसी की ज़िम्मेदारियों की जांच होनी चाहिए
राफ्तार टुडे की टीम मांग करती है कि:
- जलभराव की तत्काल निकासी करवाई जाए
- सीवरेज सिस्टम का री-इंस्पेक्शन हो
- बिल्डर और मेंटेनेंस एजेंसी को कारण बताओ नोटिस भेजा जाए
- दोषी एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू हो
- पीड़ित निवासियों को मुआवज़ा दिया जाए
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