Sharda University JyotiCase : 'ज्योति' की लड़ाई अब समाज की भी लड़ाई बनी!, जय हो संस्था और नोएडा लिसिट सॉल्यूशन ने फ्री में केस लड़ने का किया ऐलान, न्याय की राह में साथ खड़े हुए वकील, राजनीतिक गलियारों में भी मचा बवाल

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
शारदा विश्वविद्यालय में बीडीएस द्वितीय वर्ष की छात्रा ज्योति शर्मा की आत्महत्या ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक घटना के बाद एक ओर जहां छात्र आंदोलन पर उतर आए, वहीं अब सामाजिक संगठन और कानूनी संस्थाएं भी न्याय की लड़ाई में पीड़ित परिवार के साथ खड़ी हो गई हैं। जय हो नामक सामाजिक संस्था और ‘नोएडा लिसिट सॉल्यूशन’ नामक प्रतिष्ठित लीगल फर्म ने आगे आकर यह ऐलान किया है कि वे मृतका के परिजनों की तरफ से यह केस बिना किसी शुल्क के लड़ेंगे।
घटना जिसने सबको झकझोर दिया
शुक्रवार को शारदा यूनिवर्सिटी के कैंपस में उस वक्त हड़कंप मच गया जब बीडीएस सेकंड ईयर की छात्रा ज्योति शर्मा का शव हॉस्टल के कमरे में फांसी के फंदे से लटका मिला। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। छात्रा के आत्महत्या की खबर से कैंपस का माहौल तनावपूर्ण हो गया। कई छात्र-छात्राओं ने घटना के विरोध में प्रदर्शन किया, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा।
राजनीतिक गलियारों में भी मचा बवाल
जैसे ही यह घटना सामने आई, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे प्रमुख विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा। नेताओं ने छात्रा की आत्महत्या को सिस्टम की विफलता बताया और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। सपा प्रवक्ता ने यहां तक कहा कि अगर पीड़ित परिवार को समय पर न्याय नहीं मिला, तो पार्टी आंदोलन करेगी।
जय हो और लिसिट सॉल्यूशन की पहल बनी उम्मीद की किरण
इसी बीच, सूरजपुर कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और जय हो संस्था के संस्थापक कपिल शर्मा ने ऐलान किया कि वे इस मामले को पूरी गंभीरता से लड़ेंगे। संस्था से जुड़े हुए वरिष्ठ अधिवक्ताओं की एक टीम मृतका के परिवार से मुलाकात करेगी और यदि वे चाहें तो बिना किसी शुल्क के कानूनी मदद दी जाएगी।
कपिल शर्मा ने कहा –
“ज्योति की आत्महत्या ने हमें झकझोर कर रख दिया है। यह केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है कि एक छात्रा की मौत का सच सामने आए और उसके लिए जवाबदेही तय हो।”
कानून के दायरे में न्याय की उम्मीद
नोएडा लिसिट सॉल्यूशन की टीम के अनुसार, यदि छात्रा की आत्महत्या के पीछे कोई मानसिक उत्पीड़न, शैक्षणिक दबाव या संस्थागत लापरवाही साबित होती है, तो संबंधित पक्षों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। संस्था का कहना है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संस्थागत जवाबदेही का उदाहरण भी बनेगा।
छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में आक्रोश
घटना के बाद छात्र समुदाय में काफी गुस्सा देखा गया। कई छात्र संगठनों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया और न्यायिक जांच की मांग की। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी छात्रा की आत्महत्या को गंभीर विषय बताते हुए महिला छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति गंभीरता बरतने की अपील की है।
परिजनों से मिलने जाएगी अधिवक्ताओं की टीम
जय हो संस्था ने बताया कि अगले कुछ दिनों में अधिवक्ताओं की टीम ज्योति शर्मा के परिजनों से मिलकर उनका पक्ष सुनेगी और केस की रणनीति तय की जाएगी। अगर परिवार कानूनी मदद चाहता है तो केस को अदालत में मजबूती से रखा जाएगा।
ज्योति की आत्मा को शांति मिले, न्याय ही सच्ची श्रद्धांजलि
इस पूरे मामले में सबसे दुखद पहलू यह है कि एक होनहार छात्रा, जो भविष्य में डॉक्टर बनने का सपना देख रही थी, उसे अपने जीवन से हार माननी पड़ी। यह न सिर्फ उसके परिवार के लिए, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए एक चेतावनी है।
संबंधित पक्षों से अपील
- विश्वविद्यालय प्रशासन: विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति को समझे और समय पर काउंसलिंग सेवाएं सुनिश्चित करे।
- राज्य सरकार: घटना की उच्च स्तरीय जांच कराए और दोषियों को सजा दिलाए।
- समाज: आत्महत्या जैसे मामलों में चुप न रहे, आवाज उठाए और पीड़ित परिवार के साथ खड़ा हो।
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