Yamuna Authority News : 308 किसानों की जीत, वर्षों की प्रतीक्षा खत्म!, यमुना प्राधिकरण ने किया बड़ा कदम, 6 गांवों के किसानों को आबादी भूखंड का तोहफा, ड्रा प्रक्रिया बनी ऐतिहासिक, शैलेंद्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुआ ड्रा, प्राधिकरण द्वारा शीघ्र कब्जा दिलाने का आश्वासन

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) द्वारा आयोजित की गई आबादी भूखंडों की ड्रा प्रक्रिया ने आखिरकार छह गांवों के 308 किसानों की वर्षों पुरानी उम्मीदों को पंख दे दिए। रामपुर बांगर, चांदपुर, मथुरापुर, अट्टा गुजरान, मूँजखेड़ा और रोनीजा गांवों के किसानों को उनकी अधिग्रहित भूमि के बदले 7% आबादी भूखंड आवंटित किए गए हैं। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखते हुए ड्रा का लाइव प्रसारण यूट्यूब और प्राधिकरण की वेबसाइट पर किया गया।
विकास की ओर बढ़ता किसान — अब ज़मीन सिर्फ सपनों में नहीं, हक़ीक़त में भी
प्राधिकरण द्वारा आयोजित इस ड्रा की अध्यक्षता विशेष कार्याधिकारी (OSD) श्री शैलेंद्र कुमार सिंह ने की। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि जिन भूखंडों का आवंटन हुआ है, उन्हें शीघ्र विकसित कर भौतिक कब्जा (physical possession) दिलाया जाएगा। यह भरोसा उन किसानों के लिए बड़ी राहत है जो लंबे समय से आबादी भूखंड के इंतजार में थे।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन किसानों को इस बार ड्रा में प्लॉट नहीं मिला है, उन्हें आगामी चरण में भूखंड आवंटित किया जाएगा। यानी कोई किसान वंचित नहीं रहेगा — यह भी एक बड़ा संदेश है।
ड्रा प्रक्रिया का सरकारी स्वरूप — पारदर्शिता के मानकों पर खरी उतरी कार्यवाही
इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मिसाल पेश करते हुए यमुना प्राधिकरण ने ड्रा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण अपनी वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के माध्यम से किया। इसके अलावा मौके पर मौजूद रहे:
- डिप्टी कलेक्टर श्रीमती रेणुका दीक्षित
- भूलेख विभाग के तहसीलदार
- अन्य संबंधित अधिकारी और कर्मचारी
सभी अधिकारियों ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि किसानों को उनकी योग्य जमीन का हक सही तरीके से मिले।
6 गांवों में बंटा विकास का विश्वास — भविष्य में और भी गांवों को मिलेगा लाभ
ये छह गांव — रामपुर बांगर, चांदपुर, मथुरापुर, अट्टा गुजरान, मूँजखेड़ा और रोनीजा — वे क्षेत्र हैं जहां यमुना प्राधिकरण ने बीते वर्षों में बड़ी मात्रा में भूमि अधिग्रहण की थी। किसानों की लंबे समय से मांग थी कि उन्हें उनके हिस्से के 7% आबादी भूखंड दिये जाएं। यह प्रक्रिया इसी मांग को सम्मानपूर्वक पूरा करने की दिशा में अहम कदम है।
अब इन भूखंडों के मिलने से किसानों को न केवल शहरी भूमि का स्वामित्व मिलेगा, बल्कि वे अपनी अगली पीढ़ी के लिए स्थायी संपत्ति और आय का साधन भी तैयार कर पाएंगे।
किसानों में खुशी की लहर — मौके पर मौजूद किसानों ने जताया संतोष
ड्रा कार्यक्रम के दौरान सभी छह गांवों के किसान बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। मौके पर जब उनके नाम ड्रा में निकले और उन्हें उनके भूखंड नंबर मिले, तो चेहरे पर खुशी और संतोष साफ दिखाई दिया।
कई किसानों ने कहा कि “प्राधिकरण की यह पहल वास्तव में स्वागत योग्य है, अब हम अपने हक की ज़मीन पर मकान बना सकेंगे और अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित कर सकेंगे।”
भविष्य की दृष्टि — और भी किसानों को मिलेगा लाभ
प्राधिकरण के अनुसार, यह केवल पहला चरण है। बहुत से किसानों को अभी भूखंड आवंटित किया जाना बाकी है। यमुना प्राधिकरण ने वादा किया है कि अगले ड्रा भी जल्द ही आयोजित किए जाएंगे और कोई भी किसान वंचित नहीं रहेगा।
इस प्रकार, यह ड्रा न सिर्फ आज के लाभार्थियों के लिए, बल्कि आगामी लाभार्थियों के लिए भी आशा की किरण बन चुका है।
ऐसे में अब उठता है सवाल — क्या ये 7% आबादी भूखंड योजना किसानों को आत्मनिर्भर बना पाएगी?
उत्तर है — हाँ। क्योंकि:
- इन्हें शहरी विकास के मध्य भूखंड मिल रहा है
- प्राधिकरण द्वारा विकसित इन्फ्रास्ट्रक्चर मिलेगा
- रियल एस्टेट की दृष्टि से यह ज़मीन मूल्यवान होगी
- मकान बनाकर किराए से भी आय अर्जित की जा सकेगी
यह योजना वास्तव में किसान को ज़मीनदार से उद्यमी बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
निष्कर्ष — किसानों की मुस्कान ही असली जीत है
यमुना प्राधिकरण का यह प्रयास निश्चित रूप से गांवों और किसानों को शहरों से जोड़ने वाली सेतु की तरह है। ड्रा प्रक्रिया पारदर्शिता, नियमन और संवेदनशीलता की मिसाल बनी है।
यदि यही रफ्तार रही, तो आने वाले वर्षों में प्राधिकरण क्षेत्र का हर किसान खुद को गर्व से कह सकेगा — हां, हमें भी मिला है विकास का हिस्सा।
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