Breaking News On Unipol : नोएडा-ग्रेटर नोएडा वेस्ट और NH-24 पर अवैध यूनीपोल माफिया का बोलबाला, सीमा विवाद के बहाने अधिकारी बने अनजान, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से सीईओ और नोएडा प्राधिकरण के सीईओ की कार्यशैली पर उठे सवाल, हर महीने सरकारी खजाने से करोड़ों की हो रही लूट!, अवैध यूनिफॉर्म की दबंगई आई सामने

गाजियाबाद/ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, ग्रेटर नोएडा वेस्ट, चिपियाना और NH-24 जैसे बड़े क्षेत्रों में अवैध यूनीपोल माफिया खुलेआम अपने खेल को अंजाम दे रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे अवैध धंधे पर प्राधिकरण के अधिकारी सीमा विवाद (बॉर्डर इश्यू) का बहाना बनाकर अपने ऊपर से पल्ला झाड़ लेते हैं। नतीजा यह है कि यूनीपोल माफिया न केवल दबंगई से काम कर रहे हैं बल्कि सरकार को हर महीने करोड़ों का चूना भी लगा रहे हैं।
रफ़्तार टुडे ने पहले ही खबर लिखी थी और प्राधिकरण के संबंधित अधिकारी को भेजी थी यहां तक के सीईओ और ACEO ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और नोएडा प्राधिकरण को भी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई इस पर सरकार को मंथली 6 करोड़ रुपए से ज्यादा का चुना लगा रहे हैं। इस टाइम करीब 80 यूनीपोल है, नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को अधिकारियों को मुंह चढ़ा रहे हैं ये अवैध यूनीपोल माफिया, अवैध साइटों से होता है खेल होता है।
सीमा विवाद बना ढाल – अधिकारी कर रहे हैं पल्ला झाड़
अवैध यूनीपोल के मामले में अधिकारियों का रवैया बेहद ढुलमुल है। जब भी सवाल उठता है कि बिना लाइसेंस और कॉन्ट्रैक्ट के इतने बड़े पैमाने पर विज्ञापन बोर्ड कैसे लगे, तो अधिकारी तुरंत कह देते हैं – “ये तो सीमा विवाद का मामला है।”
यानी अगर कोई जगह गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा के बीच आती है तो प्राधिकरण खुद को जिम्मेदारी से अलग कर लेता है। इसी अस्पष्टता और लापरवाही ने माफिया को और मजबूत बना दिया है।
हर महीने सरकार को लग रहा है लगभग 6 करोड़ से ज्यादा का चुना
रफ़्तार टुडे की जांच में सामने आया है कि इन अवैध यूनीपोल से माफिया हर महीने करोड़ों की कमाई कर रहे हैं। सरकार को प्रतिमाह लगभग 6 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।
इस वक्त केवल नोएडा और ग्रेटर नोएडा में करीब 80 अवैध यूनीपोल खड़े हैं। प्राधिकरण की अनदेखी और अधिकारियों की मिलीभगत से यह गोरखधंधा दिन-दहाड़े चल रहा है।
बिना लाइसेंस और कॉन्ट्रैक्ट – अवैध खेल जारी
यूनीपोल लगाने के लिए न तो कोई लाइसेंस लिया गया है और न ही कोई कॉन्ट्रैक्ट। फिर भी माफिया अपनी मर्जी से जगह-जगह विशाल अवैध यूनीपोल गाड़े हुए हैं।
मामला यहीं तक सीमित नहीं है।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में कई माफिया अपने नाम से नहीं, बल्कि दूसरों के नाम से लाइसेंस लेकर काम कर रहे हैं, ताकि असली दोषियों तक कोई पहुँच ही न पाए।
FOB और होर्डिंग माफिया भी शामिल
यह पूरा नेटवर्क सिर्फ यूनीपोल तक सीमित नहीं है।
FOB (फुट ओवर ब्रिज) पर लगी विज्ञापन साइट्स से भी भारी कमाई की जा रही है। बड़े-बड़े होल्डिंग्स और यूनिपोल्स को प्राधिकरण की जानकारी के बिना खड़ा किया गया है।
इससे यह साफ हो जाता है कि यह पूरा खेल सिर्फ एक-दो लोगों का नहीं बल्कि संगठित माफिया नेटवर्क का है, जिसमें अधिकारी तक शामिल बताए जाते हैं।
पहले भी भेजी गई थी रिपोर्ट, फिर भी कार्रवाई नहीं रफ़्तार टुडे की न्यूज़ पर
रफ़्तार टुडे ने इस अवैध खेल की जानकारी पहले ही अधिकारियों तक पहुंचाई थी। रिपोर्ट सीईओ और ACEO दोनों को भेजी गई थी।
लेकिन आश्चर्यजनक रूप से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उल्टा अधिकारी इस पर आँख मूंदे बैठे हैं और माफिया खुलेआम खेल खेल रहे हैं।
नाम बदलो, ठेका ले लो – भ्रष्ट एजेंसियों की पुरानी चाल
हाल के वर्षों में कुछ ठेकेदारों ने यूनिपोल और एफओबी के माध्यम से करोड़ों की कमाई की और जब बकाया राशि चुकाने की बारी आई, तो अदालत का दरवाजा खटखटाया।
- 2018 में अंश इंटरनेशनल और चिनार इम्पैक्स नाम की दो एजेंसियों और ना जाने कितनी एजेंसी को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से सात यूनिपोल ठेके मिले।
- करोड़ों की देनदारी के बावजूद दोनों एजेंसियों ने पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट, फिर आर्बिट्रेशन कोर्ट और अब वाणिज्यिक न्यायालय का सहारा लिया।
- और दिलचस्प बात ये कि वही एजेंसियां नाम और मालिक बदलकर दोबारा ठेका लेने की कोशिश कर रही हैं — और प्राधिकरण का सिस्टम इसे नजरअंदाज कर रहा है!
लगभग 30 करोड़ का सालाना नुकसान – अधिकारी मालामाल, सरकार बेहाल
एक अनुमान के मुताबिक, हर साल सरकार को लगभग 30 करोड़ रुपए का नुकसान केवल इस अवैध यूनिपोल धंधे से हो रहा है। अधिकारी रिश्वत लेकर मालामाल हो रहे हैं। जबकि सरकार की आय घट रही है और सिस्टम की पोल खुल रही है।
सवालों के घेरे में सीईओ N.G. रवि कुमार, और नोएडा प्राधिकरण के CEO डॉ लोकेश एम
ग्रेटर नोएडा के सीईओ N.G. रवि कुमार और नोएडा प्राधिकरण के CEO डॉ लोकेश एम की भूमिका अब सवालों के घेरे में आ गई है।
क्या उन्हें इस बड़े घोटाले की जानकारी नहीं है? अगर है तो उन्होंने अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या अधिकारी जानबूझकर इस माफिया खेल को पनपने दे रहे हैं?
योगी सरकार की सख्ती पर सवाल
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार लगातार अवैध कब्जों, भू-माफियाओं और संगठित अपराध पर कार्रवाई का दावा करती है। लेकिन सवाल उठता है कि –
जब छोटे-छोटे अवैध ढाँचे भी गिराए जाते हैं, तो इतने बड़े यूनीपोल्स और होर्डिंग्स पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती?क्या यह अधिकारियों और माफिया की मिलीभगत का नतीजा है? क्या सरकार को हर महीने लग रहा करोड़ों का चुना कोई छोटी बात है?
अवैध यूनीपोल हॉटस्पॉट्स
1. ग्रेटर नोएडा वेस्ट (छाजरसी)
2. NH-24 हाइवे
3. चिपियाना
4. नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे
इन जगहों पर सबसे ज्यादा अवैध यूनीपोल खड़े हैं और अधिकारी अब तक सिर्फ “बॉर्डर इश्यू” कहकर पल्ला झाड़ते रहे हैं।
कार्रवाई कब होगी?
अवैध यूनिपोल का यह खेल अब भ्रष्टाचार का खुला उदाहरण बन गया है।
सरकार को करोड़ों का नुकसान
अधिकारी बने अनजान
माफिया हुए मालामाल
अब देखना यह है कि क्या सीईओ और प्राधिकरण इस मामले में कोई ठोस कदम उठाएंगे या फिर यह मामला यूं ही फाइलों और बहानों में दबकर रह जाएगा।



