Jewar International Airport News : “जेवर एयरपोर्ट पर उड़ान से पहले ‘सिस्टम की उड़ान जरूरी’!, एयरोड्रम लाइसेंस के बिना रनवे हुआ बेबस, उद्घाटन फिर खिसका, यात्रियों की उम्मीदें हुईं लैंडिंग गियर पर”, एयरपोर्ट लगभग तैयार— पर DGCA के ‘ग्रीन सिग्नल’ के बिना सब अधूरा

जेवर, रफ़्तार टूडे। उत्तर भारत के सबसे चर्चित और बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) की आसमान में उड़ने की तमन्ना फिलहाल कागज़ी इंतजामों के बादलों में अटकी है। तकनीकी नियमों की ‘टर्बुलेंस’ ने उद्घाटन की तारीख को फिर अनिश्चित कर दिया है, और एयरपोर्ट का पूरा ढांचा तैयार होने के बावजूद उड़ानें अभी भी ‘क्लीयरेंस’ का इंतजार कर रही हैं।
एयरपोर्ट पर निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है—
रनवे दमक रहा है, टर्मिनल चमक रहा है, सिस्टम जगमगा रहा है… लेकिन उड़ान?
वो अभी भी एयरोड्रम लाइसेंस की ‘ग्रीन सिग्नल’ पर रुकी है।
डीजीसीए (DGCA) की मंजूरी के बिना दुनिया का कोई भी विमान यहां पहियों को टचडाउन तक नहीं कर सकता। यही वजह है कि लाख कोशिशों, निरीक्षणों और दौरों के बाद भी उद्घाटन की तारीख अभी ‘खुलासा मोड’ में नहीं आई है।
लाइसेंस नहीं, उड़ान नहीं — सारा खेल DGCA की मुहर पर टिका
भारत के किसी भी हवाई अड्डे की शुरुआत सिर्फ ‘शानदार इमारत’ या ‘चमकते रनवे’ से नहीं होती।
इसके लिए जरूरी है —
एयरोड्रम लाइसेंस, जिसे DGCA सभी सुरक्षा मानकों और अंतरराष्ट्रीय क्वालिटी चेक के बाद जारी करता है।
हालाँकि
रनवे तैयार
टर्मिनल लगभग फाइनल
सुरक्षा परीक्षण जारी
इंटीरियर फिनिशिंग अंतिम चरण में
कनेक्टिविटी का काम तेजी से
फिर भी उड़ानें शुरू नहीं हो सकतीं। क्यों? क्योंकि DGCA की फाइनल मंजूरी अभी भी फाइलों में “क्लीयरेंस” के इंतजार में रुकी हुई है।
अधिकारियों का साफ बयान— ‘उद्घाटन की तारीख? अभी कोई नहीं!’
NIAL (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड) के चेयरमैन राकेश कुमार सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा “जब तक एयरोड्रम लाइसेंस नहीं मिल जाता, तब तक किसी भी उद्घाटन प्रक्रिया पर आगे नहीं बढ़ा जा सकता। बनाई जा रही तारीखें अभी सिर्फ कयास हैं।”
इस बयान ने सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप्स और यूट्यूब अपडेट्स में चल रही हर अनुमानित तारीख पर फुलस्टॉप लगा दिया।
एयरपोर्ट तैयार, लेकिन लाइसेंस क्यों अटका?
एयरोड्रम लाइसेंस पाने के लिए जरूरी होते हैं: रनवे का अंतिम सुरक्षा मूल्यांकन
फायर एंड रेस्क्यू सिस्टम टेस्टिंग
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों की अनुपालन रिपोर्ट
विभिन्न विभागों की संयुक्त मंजूरी
मॉक एयरपोर्ट ऑपरेशन और आपातकालीन अभ्यास
इनमें से ज्यादातर प्रक्रियाएँ पूरी हो चुकी हैं, लेकिन अंतिम दस्तावेज़ की तकनीकी व प्रशासनिक जांच अभी DGCA के पास लंबित है।
उद्घाटन पर चल रही अटकलें— ‘सब हवा-हवाई’, सरकार ने नहीं दी तारीख
सोशल मीडिया पर हर हफ्ते नई तारीख उड़ती है—
कभी “10 दिसम्बर उद्घाटन”,
कभी “15 तारीख से उड़ानें”,
कभी “प्रधानमंत्री नई तारीख देखेंगे”।
लेकिन जमीन की हकीकत यही है—”उद्घाटन की कोई तय तारीख अभी सरकार या NIAL ने घोषित नहीं की है।”
इसलिए एयरपोर्ट से जुड़ी हर वायरल तारीख फिलहाल सिर्फ “हवाई कयास” है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दौरा— 5 दिसंबर की समयसीमा क्यों बनी चर्चा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हाल ही में एयरपोर्ट का निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने टर्मिनल का भौतिक निरीक्षण किया,
सुरक्षा व्यवस्था देखी,
कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की,
और अधिकारियों को टाइमलाइन सख्त करने का निर्देश जारी किया।
बैठक के बाद सुझाव आया कि
“5 दिसंबर तक एयरोड्रम लाइसेंस जारी होने की उम्मीद है।”
यही बयान लोगों में नई उम्मीद लेकर आया, और अब अनुमान है कि उद्घाटन संभवतः दिसंबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह में हो सकता है।
लेकिन याद रहे यह भी लाइसेंस मिलने के बाद ही तय होगा।
लाइसेंस मिलते ही उड़ानों से पहले क्या-क्या होगा?
एयरोड्रम लाइसेंस जारी होने के बाद एयरपोर्ट पर तुरंत यह प्रक्रियाएँ शुरू होंगी—
1. ट्रायल फ्लाइट ऑपरेशन
खाली या हल्की उड़ानें चलाई जाएँगी, जिनमें रनवे, टैक्सीवे, ATC, लाइटिंग, मार्किंग, सुरक्षा प्रतिक्रिया आदि की जाँच की जाएगी।
2. मॉक पैसेंजर प्रोसेसिंग
इसमें कर्मचारी यात्रियों की तरह भूमिका निभाते हैं—
चेक-इन से लेकर बोर्डिंग तक पूरा सिस्टम टेस्ट किया जाता है।
3. सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त मंजूरी
CISF, BCAS, एयरलाइन ऑपरेटर और DGCA मिलकर सुरक्षा आकलन करेंगे।
4. एयरलाइंस को स्लॉट आवंटन
इंडिगो, स्पाइसजेट, एयर इंडिया एक्सप्रेस आदि कंपनियों को प्रारंभिक उड़ान शेड्यूल दिया जाएगा।
5. उद्घाटन कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा
अंतिम तारीख प्रधानमंत्री कार्यालय से तय होगी।
एयरपोर्ट लगभग तैयार— पर DGCA के ‘ग्रीन सिग्नल’ के बिना सब अधूरा
फिलहाल स्थिति कुछ ऐसी है जैसे—“दुल्हन तैयार है, मंडप सजा है…
पर पंडितजी ही नहीं आए!”
एयरपोर्ट का शानदार टर्मिनल पूरी तरह चमकने लगा है।
विस्तृत लैंडस्केपिंग, फिनिशिंग, इंटीरियर डेकोरेशन और डिजिटल सिस्टम लगभग पूरे हो चुके हैं। लेकिन एयरोड्रम लाइसेंस बिना एयरपोर्ट ‘ऑपरेशनल’ मान्य नहीं होगा।
जनता की उम्मीदें— ‘दिल्ली की दूरी कम होगी, पर इंतजार बढ़ गया!’
ग्रेटर नोएडा, बुलंदशहर, अलीगढ़, आगरा, मथुरा, हाथरस, फरीदाबाद के लोग बड़ी उम्मीद से इस एयरपोर्ट को देख रहे हैं।
इससे दिल्ली IGI एयरपोर्ट का दबाव कम होगा
पश्चिमी यूपी को तेज़ कनेक्टिविटी मिलेगी
स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा
क्षेत्र में उद्योग और पर्यटन बढ़ेगा
लेकिन हर बार नई तारीख उड़कर आते-आते वापस लौट जाती है। लोगों की प्रतिक्रिया यही— “एयरपोर्ट का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा!”
जेवर एयरपोर्ट उड़ान भरने को तैयार… पर अभी ‘लाइसेंस की बाधा’ का इंतजार
साफ है, एयरपोर्ट लगभग तैयार है,पर उड़ानें पूरी तरह मंजूरी पर निर्भर हैं। एयरोड्रम लाइसेंस आते ही सब कुछ तेजी से आगे बढ़ेगा। तब तक यात्रियों, स्थानीय लोगों और उद्योग जगत को थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। उम्मीद यही है कि दिसंबर का महीना जेवर एयरपोर्ट की पहली ‘असली उड़ान’ का गवाह बने।



