Bodaki Railway Terminal News “दिल्ली का दबाव कम, बोड़ाकी का जलवा शुरू!”, ग्रेटर नोएडा में बनेगा सुपर टर्मिनल, आनंद विहार को देगा सीधी टक्कर, किसानों पर असर 1000 से ज्यादा परिवार होंगे प्रभावित, मल्टीमॉडल हब: एक ही छत के नीचे हर सुविधा

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। दिल्ली-एनसीआर की भीड़भाड़ और ट्रेनों के भारी दबाव को कम करने के लिए अब ग्रेटर नोएडा का बोड़ाकी एक नए युग की शुरुआत करने जा रहा है। आने वाले समय में बोड़ाकी रेलवे स्टेशन को देश के सबसे आधुनिक और बड़े रेलवे टर्मिनलों में शामिल किया जाएगा, जो सीधे तौर पर आनंद विहार टर्मिनल का विकल्प बनकर उभरेगा। यह परियोजना न केवल यात्रियों के लिए राहत लेकर आएगी, बल्कि पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और विकास की तस्वीर भी बदल देगी।
रेलवे मंत्रालय के संशोधित प्रस्ताव के बाद इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को नया आयाम मिला है। पहले जहां इस परियोजना के लिए 39 एकड़ जमीन निर्धारित थी, अब इसे बढ़ाकर कुल 138 एकड़ कर दिया गया है। इसके लिए 99 एकड़ अतिरिक्त भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना को तेजी से धरातल पर उतारने की तैयारी चल रही है।
एयरपोर्ट कनेक्टिविटी से बढ़ेगी बोड़ाकी की अहमियत
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) के संचालन के बाद इस क्षेत्र में यात्रियों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए बोड़ाकी को एक बड़े ट्रांजिट हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह टर्मिनल नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के लाखों यात्रियों के लिए बड़ी राहत साबित होगा, जिन्हें अभी तक ट्रेन पकड़ने के लिए दिल्ली के स्टेशनों का रुख करना पड़ता है।
नई योजना के तहत बोड़ाकी को सीधे जेवर एयरपोर्ट और यमुना सिटी से जोड़ा जाएगा, जिससे यह क्षेत्र एक इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क का हिस्सा बन जाएगा। इससे यात्रियों को एक ही स्थान पर ट्रेन, फ्लाइट और सड़क परिवहन की सुविधा मिलेगी।
किसानों पर असर: 1000 से ज्यादा परिवार होंगे प्रभावित
इस परियोजना के लिए सात गांवों—चमरावली, बोड़ाकी, दादरी, तिलपता करनवास, पाल, पल्ला और चमरावली रामगढ़—की जमीन अधिग्रहित की जाएगी। इससे करीब 1000 से अधिक किसान प्रभावित होंगे। हालांकि प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा और विकसित भूखंड दिए जाएंगे।
योजना के तहत किसानों को 6 प्रतिशत विकसित भूखंड देने के साथ-साथ करीब 250 एकड़ अतिरिक्त जमीन भी खरीदी जाएगी, ताकि पुनर्वास प्रक्रिया को संतुलित और न्यायसंगत बनाया जा सके। मुआवजे की नई दरें जल्द घोषित होने की संभावना है, जिससे किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिल सके।
मल्टीमॉडल हब: एक ही छत के नीचे हर सुविधा
बोड़ाकी स्टेशन को केवल एक रेलवे स्टेशन के रूप में नहीं, बल्कि एक इंटीग्रेटेड मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां 12 से 13 प्लेटफॉर्म और करीब 63 यार्ड लाइनें बनाई जाएंगी, जिससे 100 से अधिक ट्रेनें—जिनमें वंदे भारत और सुपरफास्ट ट्रेनें शामिल हैं—यहां रुक सकेंगी।
इसके अलावा, परिसर में ही एक बड़ा इंटरस्टेट बस टर्मिनल (ISBT) भी बनाया जाएगा, जिससे रोड ट्रांसपोर्ट की सुविधा भी सहज उपलब्ध होगी। मेट्रो कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए एक्वा लाइन का विस्तार डिपो स्टेशन से बोड़ाकी तक किया जाएगा। यानी यात्रियों को रेल, बस और मेट्रो—तीनों का अनुभव एक ही जगह मिलेगा।
योजना में बड़ा बदलाव: लॉजिस्टिक्स हब से पैसेंजर टर्मिनल तक
पहले इस क्षेत्र को केवल एक लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करने की योजना थी, जहां माल ढुलाई पर फोकस किया जाता। लेकिन रेलवे और यूपी सरकार की उच्च स्तरीय बैठक में बड़ा निर्णय लिया गया। रेलवे चेयरमैन ने सुझाव दिया कि दिल्ली के स्टेशनों पर ट्रेनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है और भविष्य में नई ट्रेनों के लिए जगह नहीं बचेगी।
इसी के बाद इस परियोजना को नया स्वरूप देते हुए बोड़ाकी को एक पैसेंजर टर्मिनल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया। अब यह परियोजना मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब के फेज-2 का हिस्सा बन गई है, जो भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।
बदल जाएगी ग्रेटर नोएडा की तस्वीर
इस परियोजना के पूरा होने के बाद ग्रेटर नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों में जबरदस्त उछाल देखने को मिलेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, रियल एस्टेट की मांग बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
साथ ही, दिल्ली के भीड़भाड़ वाले स्टेशनों से राहत मिलेगी और यात्रियों को अधिक आरामदायक और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिलेगा। बोड़ाकी का यह मेगा टर्मिनल भविष्य में एनसीआर का एक प्रमुख ट्रांसपोर्ट हब बनकर उभरेगा।



