Breaking News : “शिक्षा या व्यवसाय?, स्पर्श ग्लोबल स्कूल पर उठे गंभीर सवाल—किताबों और ड्रेस के नाम पर ‘कमीशन मॉडल’ का आरोप, प्रशासन खामोश!, ”ग्रेटर नोएडा के ओमेगा सेक्टर में नियमों की अनदेखी का आरोप, अभिभावकों में गुस्सा, कार्रवाई की मांग तेज, Video viral

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर ओमेगा स्थित स्पर्श ग्लोबल स्कूल एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। इस बार मामला सीधे तौर पर शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और नियमों के पालन से जुड़ा हुआ है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन सरकार के स्पष्ट निर्देशों की अनदेखी करते हुए परिसर के भीतर ही किताबें और यूनिफॉर्म बेच रहा है, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।
स्कूल परिसर में किताब और ड्रेस की बिक्री—नियमों का खुला उल्लंघन?
अभिभावकों का कहना है कि सरकार द्वारा बार-बार निर्देश जारी किए गए हैं कि कोई भी निजी स्कूल छात्रों को किसी विशेष दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। इसके बावजूद स्पर्श ग्लोबल स्कूल पर आरोप है कि वह अपने परिसर में ही किताबें और ड्रेस बेचकर मोटा कमीशन कमा रहा है।
कुछ अभिभावकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि वे बाहर से किताबें या ड्रेस खरीदने की कोशिश करते हैं, तो स्कूल प्रशासन अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाता है। इससे अभिभावकों को मजबूरन स्कूल से ही महंगे दामों पर सामग्री खरीदनी पड़ती है।
फीस और ट्रांसपोर्ट चार्ज में लगातार बढ़ोतरी से बढ़ी परेशानी
मामला यहीं तक सीमित नहीं है। आरोप यह भी है कि स्कूल हर साल ट्यूशन फीस और ट्रांसपोर्ट फीस में लगातार बढ़ोतरी कर रहा है, जबकि इसके अनुरूप सुविधाओं में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिल रहा। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है।
अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा के नाम पर इस तरह की आर्थिक नीतियां बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ के समान हैं। उनका आरोप है कि शिक्षा को सेवा के बजाय एक मुनाफे के व्यवसाय में बदला जा रहा है।
प्रशासन पर सवाल—शिकायतों के बावजूद क्यों नहीं हो रही कार्रवाई?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद प्रशासन अब तक मौन क्यों है? जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
लोगों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन इतना प्रभावशाली है कि वह जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग (BSA), यहां तक कि जनप्रतिनिधियों की भी अनदेखी कर रहा है। इस मामले में @dmgbnagar और संबंधित अधिकारियों से भी जवाबदेही की मांग की जा रही है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव का भी जिक्र
स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि स्कूल के उद्घाटन समारोह में राज्यपाल और विधानसभा स्पीकर जैसे बड़े पदों पर बैठे लोगों की उपस्थिति के कारण स्कूल प्रबंधन खुद को बेहद प्रभावशाली मानता है। यही वजह है कि वह नियमों को दरकिनार कर अपने तरीके से काम कर रहा है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार उठते सवालों ने प्रशासन की निष्क्रियता पर गंभीर चिंताएं जरूर खड़ी कर दी हैं।
कानूनी नजरिया: क्या कहते हैं नियम?
शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार, स्कूल किसी भी छात्र को एक ही स्थान से किताब या ड्रेस खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता
फीस बढ़ोतरी के लिए निर्धारित प्रक्रिया और पारदर्शिता जरूरी है
अभिभावकों की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई अनिवार्य है
यदि इन नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित स्कूल पर जुर्माना, मान्यता पर खतरा या अन्य प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।
अब कार्रवाई या फिर भरोसे का संकट?
स्पर्श ग्लोबल स्कूल पर लगे ये आरोप केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे निजी शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़े करते हैं। यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं होती, तो अभिभावकों का भरोसा शिक्षा व्यवस्था से पूरी तरह उठ सकता है।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या वास्तव में कोई जांच या कार्रवाई होती है, या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।



