Panchsheel Green 1 News : पंचशील ग्रीन-1 में बड़ा प्रशासनिक एक्शन!, SDM दादरी कोर्ट ने AOA को किया निरस्त, दो साल से चल रही “अवैध व्यवस्था” पर लगा ब्रेक, पहले भी लग चुकी थी रोक, फिर भी कराए गए चुनाव

ग्रेटर नोएडा वेस्ट / दादरी | रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की चर्चित हाउसिंग सोसाइटी पंचशील ग्रीन-1 एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। इस बार मामला सीधे प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया, जहां SDM कोर्ट दादरी ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सोसाइटी की AOA (Apartment Owners Association) को निरस्त कर दिया है। इस फैसले के बाद सोसाइटी की मौजूदा कार्यकारिणी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और पिछले दो वर्षों से चल रही व्यवस्थाओं की वैधता पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।
क्या है पूरा मामला? कोर्ट ने क्यों लिया सख्त फैसला?
उप जिलाधिकारी दादरी सुश्री अनुज नेहरा की अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण किया गया। इसके बाद कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि:
दिनांक 28 अप्रैल 2024 को कराया गया AOA चुनाव कालातीत (time-barred) था
इसके अलावा 13 अप्रैल 2025 को कराया गया चुनाव भी नियमों के विरुद्ध था
सबसे अहम बात यह कि यह चुनाव इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद बिना अनुमति कराए गए
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए SDM कोर्ट ने दोनों चुनावों को अवैध और निरस्त घोषित कर दिया।
डिप्टी रजिस्ट्रार को दिए गए निर्देश
SDM कोर्ट ने अपने आदेश की प्रति डिप्टी रजिस्ट्रार, फर्म्स एवं सोसायटी, मेरठ मंडल को भेजते हुए निर्देश दिए हैं कि:
सोसाइटी की नई कार्यकारिणी का गठन नियमों के अनुसार और पारदर्शी तरीके से चुनाव कराकर सुनिश्चित किया जाए
इसका सीधा मतलब है कि अब पंचशील ग्रीन-1 में पूरी AOA व्यवस्था को नए सिरे से खड़ा किया जाएगा।
पहले भी लग चुकी थी रोक, फिर भी कराए गए चुनाव
इस पूरे मामले में एक अहम पहलू यह भी सामने आया कि:
25 मार्च 2026 को डिप्टी रजिस्ट्रार द्वारा नोटिस जारी कर चुनाव पर रोक लगा दी गई थी
इसके बावजूद AOA द्वारा चुनाव कराए गए
प्रशासन ने पहले ही चेतावनी दी थी कि रोक के बाद कराए गए चुनाव स्वतः निरस्त और अवैध माने जाएंगे
इसके बावजूद नियमों की अनदेखी कर चुनाव कराने को कोर्ट ने गंभीर उल्लंघन माना।
दो साल से “अवैध संचालन” के आरोप
SDM के इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि:
पिछले करीब 2 वर्षों से AOA अवैध रूप से कार्य कर रही थी
डिप्टी रजिस्ट्रार के आदेशों की अनदेखी की जा रही थी
न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद बिना अनुमति फैसले लिए जा रहे थे
यह स्थिति न केवल प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन थी, बल्कि सोसाइटी के निवासियों के अधिकारों पर भी असर डाल रही थी।
निवासी पक्ष का बयान: “अब रुकेगी मनमानी”
सोसाइटी निवासी विकास कुमार ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा: “हम लगातार वैध और पारदर्शी चुनाव की मांग कर रहे थे, लेकिन कुछ लोग अपने निजी फायदे के लिए नियम-कानून को नजरअंदाज कर रहे थे। अब कोर्ट के आदेश के बाद उनकी मनमानी पर रोक लगेगी।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि: जल्द ही नियमों के अनुरूप चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी
पिछले दो वर्षों में हुए गैर-कानूनी कार्यों की जांच कराई जाएगी
संबंधित लोगों के खिलाफ न्यायालय में वाद दायर कर कार्रवाई की मांग की जाएगी
सोसाइटी में क्या पड़ेगा असर?
इस फैसले के बाद पंचशील ग्रीन-1 में कई स्तरों पर असर देखने को मिलेगा:
- प्रशासनिक शून्य (Administrative Vacuum)
AOA निरस्त होने के बाद फिलहाल सोसाइटी में वैध प्रशासनिक इकाई नहीं रहेगी, जब तक नया चुनाव नहीं हो जाता। - निर्णयों की वैधता पर सवाल
पिछले दो वर्षों में लिए गए फैसलों—जैसे मेंटेनेंस, कॉन्ट्रैक्ट, फंड उपयोग—की वैधता पर भी सवाल उठ सकते हैं। - निवासियों के अधिकारों की बहाली
अब नए चुनाव के जरिए सभी निवासियों को समान प्रतिनिधित्व और मतदान अधिकार मिलने की उम्मीद है।
क्यों अहम है यह फैसला?
पंचशील ग्रीन-1 का यह मामला सिर्फ एक सोसाइटी तक सीमित नहीं है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की कई सोसाइटियों में AOA विवाद, चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी और प्रशासनिक अनियमितताएं सामने आती रही हैं।
ऐसे में SDM कोर्ट का यह फैसला एक मिसाल (precedent) बन सकता है
यह अन्य सोसाइटियों में भी नियमों के पालन को लेकर सख्ती का संकेत देता है
साथ ही यह स्पष्ट करता है कि कोर्ट के आदेशों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी
आगे क्या?
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि:
डिप्टी रजिस्ट्रार कब तक चुनाव प्रक्रिया शुरू कराते हैं
नई AOA कितनी पारदर्शिता के साथ गठित होती है
और क्या पिछले मामलों में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होती है या नहीं
पंचशील ग्रीन-1 में AOA को निरस्त करने का SDM कोर्ट का फैसला न केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई है, बल्कि यह कानून के राज और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम भी है। इससे यह संदेश साफ है कि सोसाइटी प्रबंधन में मनमानी और नियमों की अनदेखी अब ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकती।



