Breaking News : “परी चौक बना ‘कूड़ा चौक’!, 9 दिन बाद भी नहीं जागा प्राधिकरण, VIP रूट की बदहाली देख भड़के नागरिक, ‘ग्रीन बेल्ट नहीं, अब दिख रही गंदगी की बेल्ट’”, “जहां हरियाली होनी चाहिए थी, वहां कूड़े के ढेर दिखाई दे रहे”
ग्रेटर नोएडा की खूबसूरती पर लापरवाही का दाग, एक्टिव सिटीज़न टीम ने फिर उठाए सवाल — ‘अधिकारियों के दफ्तर चमक रहे, लेकिन शहर की पहचान सड़ रही’

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। देश के सबसे आधुनिक और योजनाबद्ध शहरों में गिने जाने वाले ग्रेटर नोएडा की पहचान उसकी चौड़ी सड़कें, खूबसूरत ग्रीन बेल्ट, सेंट्रल वर्ज, पार्क और सुव्यवस्थित इंफ्रास्ट्रक्चर रहे हैं। लेकिन अब वही शहर धीरे-धीरे बदहाल तस्वीर पेश करता नजर आ रहा है। शहर का दिल कहे जाने वाला परी चौक, जहां से हर दिन हजारों लोगों का आना-जाना होता है, अब गंदगी, उपेक्षा और प्रशासनिक लापरवाही की मिसाल बनता जा रहा है।
करीब 9 दिन पहले यानी 29 अप्रैल 2026 को शहर के सक्रिय नागरिक और एक्टिव सिटीज़न टीम के सदस्य हरेन्द्र भाटी ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के उद्यान विभाग और सीईओ को परी चौक व आसपास के पार्कों, ग्रीन बेल्ट और सेंट्रल वर्ज की बदहाल स्थिति की तस्वीरें और शिकायत भेजकर ध्यान आकर्षित कराया था। उम्मीद थी कि प्राधिकरण तुरंत कार्रवाई करेगा और शहर की पहचान को बचाने के लिए सफाई और रखरखाव का अभियान शुरू होगा। लेकिन 7 मई तक हालात सुधरने की बजाय और बिगड़ते नजर आए।
“जहां हरियाली होनी चाहिए थी, वहां कूड़े के ढेर दिखाई दे रहे”
हरेन्द्र भाटी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और बताया कि जिन स्थानों की तस्वीरें 29 अप्रैल को प्रशासन को भेजी गई थीं, आज वहां गंदगी और अधिक बढ़ चुकी है। कई जगहों पर सूखी घास, प्लास्टिक कचरा, टूटे पौधे और बेतरतीब झाड़ियां शहर की खूबसूरती को निगल रही हैं।
उन्होंने कहा कि— “ग्रीन बेल्ट और पार्क शहर के फेफड़े होते हैं, लेकिन ग्रेटर नोएडा में इन्हें कूड़ाघर में बदलने दिया जा रहा है। जिन अधिकारियों को जिम्मेदारी निभानी चाहिए, वे शिकायतों के बाद भी पूरी तरह निष्क्रिय दिखाई दे रहे हैं।”
VIP मूवमेंट वाला इलाका, फिर भी प्रशासन बेपरवाह
परी चौक केवल एक ट्रैफिक जंक्शन नहीं, बल्कि ग्रेटर नोएडा की पहचान है। इसी मार्ग से लखनऊ, आगरा, कानपुर, दिल्ली और नोएडा की ओर जाने वाले हजारों वाहन रोज गुजरते हैं। कई बार VIP मूवमेंट भी इसी रास्ते से होता है। इसके बावजूद यहां की ग्रीन बेल्ट और पार्कों की स्थिति प्रशासन की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाहर से आने वाले लोगों पर शहर की पहली छाप परी चौक से ही पड़ती है। लेकिन वर्तमान हालात देखकर ऐसा लगता है जैसे शहर की सुंदरता को बचाने की जिम्मेदारी किसी ने छोड़ दी हो।
9 दिन बाद भी ‘जमीन पर शून्य काम’
एक्टिव सिटीज़न टीम का आरोप है कि शिकायत के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों ने केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहकर मामले को नजरअंदाज किया।
न तो नियमित सफाई हुई,
न पौधों की देखरेख हुई,
न सूखी घास हटाई गई,
और न ही कूड़ा उठाने की व्यवस्था दिखाई दी।
हरेन्द्र भाटी ने कहा—“यदि अधिकारी समय रहते कार्रवाई करते, तो आज यह स्थिति नहीं होती। लेकिन ऐसा लगता है कि प्राधिकरण केवल फाइलों में शहर को सुंदर दिखाने में व्यस्त है, जबकि जमीनी हकीकत पूरी तरह अलग है।”
शहरवासियों में बढ़ रहा आक्रोश
लगातार बिगड़ती स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि ग्रेटर नोएडा जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित हो रहे शहर में यदि मुख्य चौराहों और ग्रीन क्षेत्रों की यह हालत है, तो बाकी सेक्टरों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
कई लोगों ने सवाल उठाए कि— क्या उद्यान विभाग नियमित निरीक्षण नहीं करता?
क्या सफाई एजेंसियों की मॉनिटरिंग नहीं हो रही?
क्या शिकायतें केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं?
और आखिर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय क्यों नहीं होती?
ग्रीन सिटी की छवि पर संकट
ग्रेटर नोएडा को लंबे समय से “ग्रीन सिटी” के रूप में प्रमोट किया जाता रहा है। शहर में चौड़ी हरित पट्टियां, खूबसूरत पार्क और व्यवस्थित वृक्षारोपण इसकी खास पहचान रहे हैं। लेकिन यदि यही स्थिति जारी रही, तो आने वाले समय में शहर अपनी सबसे बड़ी पहचान खो सकता है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीन बेल्ट केवल सजावट नहीं होती, बल्कि यह प्रदूषण नियंत्रण, तापमान संतुलन और शहरी सौंदर्य के लिए बेहद जरूरी होती है। ऐसे में इन क्षेत्रों की उपेक्षा सीधे पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित कर सकती है।



