Breaking News : 40% फीस बढ़ोतरी से मचा बवाल!, ग्रेटर नोएडा वेस्ट के स्कूल के बाहर आज गूंजेगा अभिभावकों का गुस्सा, 1700 बच्चों के भविष्य पर उठे बड़े सवाल, “स्कूल फीस नहीं, मानो आर्थिक भूकंप आ गया”, 5 अप्रैल की बैठक का वादा अभी तक अधूरा

ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हाईराइज सोसाइटियों के बीच स्थित प्रतिष्ठित The Wisdom Tree School इन दिनों अभिभावकों के भारी विरोध और विवादों के केंद्र में आ गया है। स्कूल प्रबंधन द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कथित रूप से लगभग 40 प्रतिशत फीस वृद्धि किए जाने के बाद अब सैकड़ों अभिभावकों का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। फीस बढ़ोतरी को “अनुचित”, “अचानक” और “परिवारों पर आर्थिक बोझ” बताते हुए अभिभावकों ने शनिवार 16 मई को स्कूल के मुख्य गेट पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। यह प्रदर्शन सुबह 8:30 बजे से 9:30 बजे तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में अभिभावकों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि यह लड़ाई केवल फीस की नहीं, बल्कि लगभग 1700 बच्चों के भविष्य, शिक्षा की स्थिरता और पारदर्शिता की भी है।
“स्कूल फीस नहीं, मानो आर्थिक भूकंप आ गया”
अभिभावकों का आरोप है कि पिछले कुछ समय से स्कूल प्रबंधन लगातार अभिभावकों की चिंताओं को नजरअंदाज कर रहा है। उनका कहना है कि अचानक 40 प्रतिशत तक फीस बढ़ाना मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए किसी आर्थिक झटके से कम नहीं है। कई अभिभावकों ने कहा कि पहले ही बढ़ती महंगाई, घर की ईएमआई, ट्रांसपोर्ट, किताबों और अन्य खर्चों से परिवार परेशान हैं, ऐसे में इतनी भारी फीस वृद्धि ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है।
अभिभावकों के अनुसार, यदि समय रहते इस मुद्दे का समाधान नहीं निकाला गया, तो कई परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं। उनका कहना है कि शिक्षा अब सेवा कम और व्यवसाय अधिक होती जा रही है, जो चिंता का विषय है।
5 अप्रैल की बैठक का वादा अभी तक अधूरा
अभिभावकों ने आरोप लगाया कि 5 अप्रैल 2026 को स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के बीच हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण आश्वासन दिए गए थे। उस समय मीडिया में स्कूल से जुड़ी कथित अवैध निर्माण और बेनामी संपत्ति जैसी खबरें सामने आई थीं, जिन्हें स्कूल प्रबंधन ने निराधार बताया था।
अभिभावकों का कहना है कि बैठक के दौरान स्कूल निदेशक वीरेंद्र कौशिक ने यह भरोसा दिलाया था कि छात्रों की शिक्षा, शैक्षणिक गतिविधियों और फीस संरचना पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही एक लिखित शपथपत्र (Affidavit) जारी करने की बात भी कही गई थी, ताकि अभिभावकों को भविष्य को लेकर आश्वस्त किया जा सके।
लेकिन प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों का आरोप है कि कई बार आग्रह और ड्राफ्ट साझा किए जाने के बावजूद अब तक कोई आधिकारिक शपथपत्र जारी नहीं किया गया। इससे अभिभावकों के बीच अविश्वास की स्थिति और गहरी हो गई है।
“मिलने का समय नहीं, सुनवाई नहीं”
प्रदर्शन की तैयारी कर रहे कई अभिभावकों ने दावा किया कि उन्होंने फीस वृद्धि और अन्य मुद्दों पर बातचीत के लिए कई बार स्कूल प्रबंधन और प्रधानाचार्य से मिलने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें उचित जवाब नहीं मिला। कुछ अभिभावकों का आरोप है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया और संवाद की प्रक्रिया लगभग बंद हो गई। अभिभावकों का कहना है कि यदि स्कूल प्रशासन समय रहते पारदर्शी बातचीत करता और फीस वृद्धि का स्पष्ट आधार बताता, तो शायद स्थिति इतनी तनावपूर्ण नहीं बनती।
बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता
इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ी चिंता बच्चों के मानसिक और शैक्षणिक माहौल को लेकर सामने आ रही है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल और परिवारों के बीच तनाव का असर सीधे बच्चों पर पड़ता है। कई बच्चों के मन में यह डर बैठने लगा है कि कहीं फीस विवाद के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो जाए।
अभिभावकों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि बच्चों के हितों की रक्षा करना है। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा।
प्रशासन तक पहुंचेगा मामला
अभिभावक समिति के प्रतिनिधि वीरेंद्र कुमार ने बताया कि फीस वृद्धि और स्कूल प्रशासन के रवैये को लेकर जिलाधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA), जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) और प्रदेश के शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा कि अभिभावक चाहते हैं कि शिक्षा विभाग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करे और यह सुनिश्चित करे कि किसी भी निजी स्कूल द्वारा मनमाने तरीके से फीस वृद्धि न की जाए। साथ ही स्कूल प्रबंधन को अभिभावकों के साथ पारदर्शी संवाद बनाए रखने के निर्देश भी दिए जाएं।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में निजी स्कूल फीस पर फिर बहस तेज
यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं माना जा रहा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में तेजी से बढ़ती आबादी और निजी स्कूलों की संख्या के बीच फीस वृद्धि का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। कई अभिभावक संगठनों का कहना है कि हर वर्ष अचानक फीस बढ़ोतरी से परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अभिभावकों की आर्थिक क्षमता के बीच संतुलन कायम रह सके।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील
अभिभावकों ने सभी परिवारों से प्रदर्शन में शांतिपूर्ण तरीके से शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि यह आंदोलन बच्चों के भविष्य, अभिभावकों के अधिकार और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर किया जा रहा है। अभिभावकों ने मीडिया से भी अपील की है कि वे मौके पर पहुंचकर उनकी समस्याओं को प्रमुखता से उठाएं, ताकि संबंधित अधिकारी और शिक्षा विभाग इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान दें।



