Breaking News : लखनऊ कूच से पहले किसानों की हुंकार का असर!, प्राधिकरण झुका, 4 प्रतिशत विकसित भूखंड पर बनी सहमति की राह, लखनऊ पैदल मार्च से पहले पुलिस ने रोका, वार्ता का दिया भरोसा, एसीईओ सुमित यादव बोले—'किसानों के अधिकारों पर होगा गंभीर निर्णय, सीईओ रवि कुमार NG के साथ होगी निर्णायक बैठक

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा में वर्षों से लंबित चार प्रतिशत अतिरिक्त विकसित आबादी भूखंड की मांग एक बार फिर जोरदार तरीके से उठी और इस बार किसानों की एकजुटता ने प्रशासन को तत्काल वार्ता की मेज पर आने के लिए मजबूर कर दिया। सोमवार को बड़ी संख्या में किसान लखनऊ तक पैदल कूच करने की तैयारी में थे, लेकिन पुलिस और प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद हालात बदले और किसानों तथा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में किसानों की मांगों को गंभीरता से सुना गया और उन्हें आश्वासन दिया गया कि चार प्रतिशत अतिरिक्त विकसित आबादी भूखंड के मुद्दे पर जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।
यह वार्ता किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आई है। लंबे समय से अपने अधिकारों की मांग कर रहे किसान अब इस आश्वासन के बाद अगले चरण की बैठक का इंतजार कर रहे हैं। यदि प्राधिकरण अपने वादे पर अमल करता है तो यह हजारों किसान परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
लखनऊ पैदल मार्च से पहले पुलिस ने रोका, वार्ता का दिया भरोसा
सोमवार सुबह विभिन्न गांवों के किसान बड़ी संख्या में एकत्र होकर अपनी मांगों को लेकर लखनऊ तक पैदल मार्च करने की तैयारी में थे। किसानों का कहना था कि कई वर्षों से चार प्रतिशत अतिरिक्त विकसित आबादी भूखंड की मांग लंबित है और बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद समाधान नहीं हुआ। स्थिति को देखते हुए कासना कोतवाली प्रभारी और बीटा-2 कोतवाली प्रभारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसान नेताओं से बातचीत कर भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तत्काल बैठक कराई जाएगी। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद किसानों ने फिलहाल अपना लखनऊ पैदल कूच स्थगित करने का निर्णय लिया।
एसीईओ सुमित यादव की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक
इसके बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में एसीईओ सुमित यादव की अध्यक्षता में किसानों और अधिकारियों के बीच विस्तृत वार्ता हुई। बैठक में ओएसडी गिरीश झा, एसडीएम अजय शर्मा तथा प्राधिकरण के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान किसान प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि चार प्रतिशत अतिरिक्त विकसित आबादी भूखंड कोई नई मांग नहीं, बल्कि उनका वैधानिक और मूल अधिकार है। उन्होंने कहा कि वर्षों पहले अधिग्रहित की गई भूमि के बदले किसानों को यह सुविधा मिलनी चाहिए, ताकि वे भी विकास प्रक्रिया का हिस्सा बन सकें।
प्राधिकरण ने माना—किसानों का अधिकार है चार प्रतिशत भूखंड
वार्ता के दौरान प्राधिकरण के अधिकारियों ने किसानों की मांग को गंभीरता से स्वीकार करते हुए कहा कि चार प्रतिशत अतिरिक्त विकसित आबादी भूखंड देने का प्रस्ताव पहले ही बोर्ड से पारित किया जा चुका है।
अधिकारियों ने किसानों को भरोसा दिलाया कि प्राधिकरण इस मांग के पक्ष में है और इसे लागू करने की दिशा में आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इस बयान के बाद बैठक में मौजूद किसानों के बीच सकारात्मक माहौल देखने को मिला।
सीईओ रवि कुमार NG के साथ होगी निर्णायक बैठक
बैठक में यह भी तय किया गया कि 6 जुलाई को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) और किसान प्रतिनिधियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में चार प्रतिशत विकसित आबादी भूखंड के मुद्दे पर अंतिम स्तर पर चर्चा होगी और समाधान की दिशा में ठोस निर्णय लिए जाने की उम्मीद जताई गई।
किसान नेताओं ने कहा कि यदि इस बैठक में सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो वर्षों पुराना विवाद समाप्त हो सकता है और हजारों किसानों को राहत मिलेगी।
कई गांवों के किसान रहे मौजूद
इस महत्वपूर्ण बैठक में सिरसा, खैरपुर गुर्जर, डाढ़ा, लड़पुरा, मथुरापुर, घोड़ी, जुनपत, बिसरख, मायचा, करई सहित कई गांवों के सैकड़ों किसान शामिल हुए। किसान नेताओं चौधरी प्रकाश प्रधान और विनोद कुमार वर्मा ने कहा कि किसानों की लड़ाई पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगी तथा जब तक मांग पूरी नहीं होती, आंदोलन का विकल्प खुला रहेगा।
विकास के साथ किसानों के अधिकार भी जरूरी
ग्रेटर नोएडा तेजी से देश के सबसे बड़े औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों में शामिल हो रहा है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, औद्योगिक परियोजनाएं और नई आवासीय योजनाओं के बीच किसानों का कहना है कि विकास तभी सार्थक होगा जब भूमि देने वाले किसानों को भी उनका वैध अधिकार समय पर मिले। चार प्रतिशत विकसित आबादी भूखंड का मुद्दा लंबे समय से किसानों की प्रमुख मांग रहा है। ऐसे में सोमवार की वार्ता को आंदोलन और प्रशासन के बीच संवाद की नई शुरुआत माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें आगामी सीईओ बैठक पर टिकी हैं, जहां इस मुद्दे पर निर्णायक फैसला सामने आ सकता है।



