Breaking News : वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी ने भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी को दिया नया आयाम, ग्रेटर नोएडा में खुलेगा विदेशी विश्वविद्यालय का कैंपस, ‘जलसेतु’ के नाम से शुरू होगा कैंपस, छात्रों को विदेश जाए बिना मिलेगी अंतरराष्ट्रीय शिक्षा; जल सुरक्षा, महिला सशक्तीकरण, इनोवेशन और कौशल विकास पर रहेगा फोकस
ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिन्स ने उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय की मौजूदगी में ग्रेटर नोएडा कैंपस की औपचारिक घोषणा की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी, अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव, एसीईओ प्रेरणा सिंह, न्यू साउथ वेल्स के कोषाध्यक्ष डेनियल मुकी तथा वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी के कुलपति एवं अध्यक्ष विशिष्ट प्रोफेसर जॉर्ज विलियम्स एओ सहित कई वरिष्ठ अधिकारी एवं शिक्षाविद मौजूद रहे।ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने भी विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर कैंपस की स्थापना में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया है।

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच शिक्षा, शोध और नवाचार के क्षेत्र में जारी साझेदारी को एक नई दिशा मिलने जा रही है। ऑस्ट्रेलिया की वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी ने ग्रेटर नोएडा में अपने प्रस्तावित कैंपस की औपचारिक घोषणा कर दी है। उत्तर प्रदेश में स्थापित होने वाला यह विदेशी विश्वविद्यालय का कैंपस छात्रों के लिए खास अवसर लेकर आएगा, क्योंकि अब उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा और कौशल विकास के लिए हर बार विदेश जाने की आवश्यकता नहीं होगी। ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित इस कैंपस को ‘जलसेतु’ नाम दिया गया है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप युवाओं को शिक्षित और कुशल बनाना तथा उन्हें रोजगार और उद्यमिता के बेहतर अवसरों से जोड़ना है।
दिल्ली में हुआ कैंपस का औपचारिक ऐलान
सोमवार को दिल्ली स्थित नेशनल एग्रीकल्चर साइंस कॉम्प्लेक्स में आयोजित कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिन्स ने उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय की मौजूदगी में ग्रेटर नोएडा कैंपस की औपचारिक घोषणा की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी, अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव, एसीईओ प्रेरणा सिंह, न्यू साउथ वेल्स के कोषाध्यक्ष डेनियल मुकी तथा वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी के कुलपति एवं अध्यक्ष विशिष्ट प्रोफेसर जॉर्ज विलियम्स एओ सहित कई वरिष्ठ अधिकारी एवं शिक्षाविद मौजूद रहे।
विश्वविद्यालय ने इस अवसर पर भारत में अपनी साझेदारी को और व्यापक बनाने की भी घोषणा की। महिला सशक्तीकरण, बिजनेस, डेटा, इनोवेशन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए स्कॉलरशिप कार्यक्रम शुरू करने की बात भी सामने आई है।
ग्रेटर नोएडा में इसी साल दिसंबर से शुरू हो सकता है कैंपस
वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी का ग्रेटर नोएडा कैंपस ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय परिसर के टावर-2 में स्थापित किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक विश्वविद्यालय ने भवन की तीन मंजिलें ली हैं और कैंपस को इसी वर्ष दिसंबर में शुरू करने की तैयारी है। कैंपस शुरू होने के बाद यहां विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण में अध्ययन करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही शोध, इंडस्ट्री कनेक्ट, इनोवेशन और कौशल विकास पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच शिक्षा का नया सेतु बनेगा कैंपस
वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी के कुलपति एवं अध्यक्ष प्रोफेसर जॉर्ज विलियम्स एओ ने कहा कि भारत के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य युवाओं को ऐसे अवसर उपलब्ध कराना है, जिससे वे भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास में प्रभावी योगदान दे सकें। वहीं, न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिन्स ने ग्रेटर नोएडा कैंपस को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बताया। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय छात्रों को वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी की विश्वस्तरीय शिक्षा तक आसान पहुंच मिलेगी।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने भी विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर कैंपस की स्थापना में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया है।
जल सुरक्षा पर होगा विशेष फोकस
ग्रेटर नोएडा में बनने वाले कैंपस की सबसे खास पहल ‘जलसेतु सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ होगी। इसके माध्यम से उत्तर प्रदेश और अन्य क्षेत्रों में जल सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर शोध और व्यावहारिक समाधान विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। यह केंद्र शोध संस्थानों, सरकार, उद्योग और स्थानीय समुदायों को एक साझा मंच पर लाने का काम करेगा। इसके तहत भूजल की स्थिरता, नदियों का स्वास्थ्य, सतत सिंचाई और शहरी जल प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शोध और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा।
विश्वविद्यालय ने कैंपस के साथ सस्टेनेबल वाटर मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री प्रोग्राम शुरू करने की भी घोषणा की है। इससे छात्रों को जल प्रबंधन से जुड़े शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, सरकारी संस्थानों, बैंकिंग क्षेत्र और उद्योग जगत के विशेषज्ञों के साथ काम करने का अवसर मिल सकेगा।
50 हजार से अधिक छात्र कर रहे अध्ययन
वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी में करीब 50 हजार विद्यार्थी नियमित रूप से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत है और टाइम्स हायर एजुकेशन की यूनिवर्सिटी इम्पैक्ट रैंकिंग में इसे वैश्विक स्तर पर तीसरा स्थान मिलने का उल्लेख किया गया है।
ग्रेटर नोएडा में कैंपस खुलने से क्षेत्र के छात्रों को अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम, शोध और इंडस्ट्री आधारित शिक्षा के नए विकल्प मिलेंगे। साथ ही नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में शिक्षा और उद्योग के बीच सहयोग को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
क्यों खास है ग्रेटर नोएडा कैंपस?
- वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी का प्रस्तावित कैंपस ‘जलसेतु’ नाम से स्थापित होगा।
- छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा के लिए विदेश जाने के विकल्प के साथ भारत में ही अध्ययन का अवसर मिलेगा।
- कैंपस में कौशल विकास और इंडस्ट्री-आधारित शिक्षा पर जोर रहेगा।
- जलसेतु सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के जरिए जल सुरक्षा पर शोध होगा।
- सस्टेनेबल वाटर मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा।
- महिला सशक्तीकरण, डेटा, बिजनेस, इनोवेशन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट में स्कॉलरशिप और सहयोग बढ़ाने की योजना।
- कैंपस के इसी वर्ष दिसंबर में शुरू होने की तैयारी है।
- इससे भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच शिक्षा, शोध और नवाचार की साझेदारी को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।



