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Corruption Free India News : “आरटीओ दफ्तर बने भ्रष्टाचार का अड्डा या जनता की सेवा का केंद्र?”, करप्शन फ्री इंडिया संगठन का ज़बरदस्त हल्ला बोल, अगस्त क्रांति दिवस पर अधिकारियों की लापरवाही और रिश्वतखोरी के खिलाफ गरजीं आवाज़ें, “जन आंदोलन का हिस्सा बना हल्ला बोल प्रदर्शन”

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
अगस्त क्रांति की ऐतिहासिक तारीख पर जब पूरा देश आज़ादी की यादों को ताज़ा कर रहा था, उसी दिन करप्शन फ्री इंडिया संगठन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ ज़बरदस्त प्रदर्शन कर यह संदेश दिया कि आज भी समाज में कई ऐसी बुराइयाँ मौजूद हैं, जिनके खिलाफ लड़ना जरूरी है। नोएडा के आरटीओ (क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय) में चल रहे भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और आम जनता के शोषण के खिलाफ संगठन के कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर तुरंत भ्रष्टाचार समाप्त करने की मांग की।

“जन आंदोलन का हिस्सा बना हल्ला बोल प्रदर्शन”

इस प्रदर्शन की अगुवाई जिला प्रवक्ता दुलीचंद नागर ने की। उनके नेतृत्व में कार्यकर्ता आरटीओ दफ्तर पहुंचे और लाइसेंस, फिटनेस, आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) एवं अन्य कार्यों के नाम पर अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा की जा रही रिश्वतखोरी के खिलाफ आवाज़ बुलंद की।

संगठन ने आरोप लगाया कि बिना रिश्वत दिए आरटीओ दफ्तर में कोई भी काम समय पर पूरा नहीं होता। लाइसेंस हो, गाड़ी की फिटनेस या फिर आरसी से संबंधित कार्य – हर जगह जनता से पैसा वसूला जाता है और एजेंटों के बिना कोई भी प्रक्रिया संभव नहीं है।

संस्थापक प्रवीण भारती और मास्टर दिनेश नागर का बयान

संगठन के संस्थापक चौधरी प्रवीण भारतीय और मास्टर दिनेश नागर ने बताया कि अगस्त क्रांति दिवस को ही चुना गया ताकि यह संदेश दिया जा सके कि देश को आज़ाद हुए 78 साल हो चुके हैं, लेकिन दफ्तरों में भ्रष्टाचार की जंजीरें अब भी टूटी नहीं हैं।

उन्होंने कहा – “आज़ादी के लिए लाखों क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया था, लेकिन आज भी आम आदमी को आरटीओ जैसे दफ्तरों में छोटे-छोटे कामों के लिए घंटों परेशान होना पड़ता है और ऊपर से रिश्वत देनी पड़ती है। यह हमारे लोकतंत्र पर धब्बा है।”

प्रमुख मांगें और समस्याएँ

संगठन ने ज्ञापन सौंपते हुए कई अहम मुद्दे उठाए। इनमें प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं –

1. बैंक NOC से संबंधित समस्या:


बैंक से प्राप्त NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) को ही वैध माना जाए। इसके अतिरिक्त मेल द्वारा दोबारा सत्यापन की अनिवार्यता खत्म की जाए, क्योंकि इससे आम लोगों को बेवजह परेशान किया जाता है।

2. ओवरलोड वाहनों की समस्या:


ओवरलोड वाहनों के चालान जमा करने के बाद भी वाहन स्वामियों को पूरे दिन कार्यालय में बैठाए रखा जाता है। निर्धारित समय पर वाहन रिहा नहीं किए जाते। रिहाई के नाम पर अनुचित शुल्क (रिश्वत) मांगी जाती है।

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करप्शन फ्री इंडिया संगठन का ज़बरदस्त हल्ला बोल, अगस्त क्रांति दिवस पर अधिकारियों की लापरवाही और रिश्वतखोरी के खिलाफ गरजीं आवाज़ें

3. एजेंटों का दबदबा खत्म हो:


आरटीओ कार्यालय में एजेंटों का दबदबा इतना ज्यादा है कि बिना उनके किसी का भी कार्य नहीं होता। आम आदमी सीधा काम करवाने जाता है तो या तो उसे टाल दिया जाता है या फिर रिश्वत की मांग कर परेशान किया जाता है।

4. अधिकारियों के व्यवहार में सुधार:


आम जनता के साथ अधिकारियों और कर्मचारियों का व्यवहार बेहद अशोभनीय है। भ्रष्टाचार खत्म करने के साथ-साथ उनके व्यवहार में भी बदलाव लाने की आवश्यकता है।

प्रदर्शन में गूंजे नारे

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जोरदार नारे लगाए।

“भ्रष्टाचार मिटाओ – देश को बचाओ”

“आरटीओ दफ्तर हो साफ – जनता को मिले इंसाफ”

“एजेंट राज खत्म करो”

“जनता का हक – हमें चाहिए सबक” ये नारे लोगों के गुस्से और निराशा को साफ झलकाते थे।

कौन-कौन रहा मौजूद

इस मौके पर संगठन के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल रहे। इनमें प्रमुख थे –
बलराज हूंण, मास्टर दिनेश नागर, प्रेम प्रधान, राकेश नागर, सुशील प्रधान, आकाश नागर, सतेंद्र चौधरी, दुलीचंद नागर, बालेश्वर सूबेदार, पवन यादव, अमित नागर, वरुण नागर, विजय प्रधान, मलखान सिंह यादव, दीपेंद्र भाटी, मनीष कसाना, ओमप्रकाश कसाना, मोहित अधाना, झम्मन सिंह, जयचंद चौहान, राकेश भाटी, शीशपाल सिंह, सुनील नागर, तुषार कसाना, नवीन भाटी, आकाश भाटी इत्यादि।

अगस्त क्रांति दिवस पर किया गया यह प्रदर्शन एक प्रतीक है कि आज भी देश में सच्ची आज़ादी तभी मानी जाएगी जब आम जनता भ्रष्टाचार की बेड़ियों से मुक्त होगी। करप्शन फ्री इंडिया संगठन ने जो आवाज़ उठाई है, वह सिर्फ आरटीओ दफ्तर तक सीमित नहीं, बल्कि हर सरकारी कार्यालय और विभाग तक गूंजनी चाहिए। यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो संगठन ने चेतावनी दी है कि यह आंदोलन आगे और भी तेज़ होगा।

रफ़्तार टुडे की न्यूज़
Raftar Today
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