Breaking News : “चंदे से चिंगारी तक!”, MLC ग़ाज़ियाबाद विजय सिंह पथिक लॉ कॉलेज को मिली 15 लाख की कथित मदद पर मचा घमासान, BJP MLC की चुप्पी पर उठे सवाल, सपा कनेक्शन बना चर्चा का विषय, “बीजेपी के अंदर की नीति पर उठ रहे प्रश्न”, गाजियाबाद-दादरी में सियासी गलियारे गर्म
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और बयानबाज़ी से बढ़ी सरगर्मी; अब जांच और जवाब की उठी मांग!

गाजियाबाद/दादरी, रफ़्तार टुडे।
गौतमबुद्ध नगर की सियासत इन दिनों एक अनोखे “शिक्षा–सियासी संगम” में उलझ गई है। बील अकबरपुर स्थित विजय सिंह पथिक इंस्टिट्यूट ऑफ लॉ नामक निजी शिक्षण संस्थान को कथित तौर पर 15 लाख रुपये की आर्थिक मदद मिलने की चर्चा ने राजनीति में बवाल मचा दिया है। यह मदद कथित रूप से एक भाजपा के विधान परिषद सदस्य (MLC) द्वारा की गई बताई जा रही है, जबकि कॉलेज प्रबंधन से जुड़े व्यक्ति के सपा कनेक्शन और वायरल वीडियो ने इस प्रकरण को और ज्यादा पेचीदा बना दिया है।
“BJP का फंड, सपा का फायदा?” — सवालों के घेरे में मदद की मंशा
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस सहायता को लेकर अब भाजपा और सपा, दोनों खेमों में फुसफुसाहट और तकरार का माहौल है। सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स ने दावा किया है कि MLC दिनेश गोयल ने अपने निजी विवेक से यह राशि कॉलेज को दी है, जबकि कॉलेज प्रबंधन से जुड़े राजकुमार भाटी, समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए हैं।
यही विरोधाभास अब चर्चा का कारण बन गया है क्योंकि जिस व्यक्ति पर भाजपा विरोधी बयानों और धार्मिक टिप्पणियों के आरोप लग चुके हैं, उसके संस्थान को भाजपा से जुड़ी हस्ती द्वारा सहयोग देना अब सवालों के घेरे में है।
हालांकि, रफ़्तार टुडे द्वारा कई बार संपर्क किए जाने के बावजूद MLC दिनेश गोयल ने न तो फ़ोन कॉल्स का जवाब दिया और न ही संदेशों पर कोई प्रतिक्रिया दी।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि यह राशि कथित रूप से किसी भाजपा से जुड़े सदस्य द्वारा दी गई बताई जा रही है। इस संदर्भ में कुछ समूहों ने भाजपा के एमएलसी दिनेश गोयल से स्पष्टीकरण की मांग की है।
हालांकि, रफ़्तार टुडे द्वारा संपर्क करने पर न तो श्री गोयल से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त हो सकी और न ही उनका आधिकारिक पक्ष सामने आया है।
वहीं दूसरी ओर, राजकुमार भाटी, जो लंबे समय से समाजवादी पार्टी से जुड़े माने जाते हैं, पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने इस सहायता का लाभ अपने निजी शिक्षण संस्थान को दिलवाया।
वायरल वीडियो से बढ़ी सियासी गर्मी
विवाद का दूसरा पहलू कुछ पुराने वायरल वीडियो से जुड़ा है, जिनमें राजकुमार भाटी कथित रूप से भाजपा और ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ अपशब्द कहते हुए दिखाई दे रहे हैं।
इन वीडियोज़ की प्रामाणिकता की पुष्टि अभी तक किसी सरकारी एजेंसी द्वारा नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पर ये क्लिप्स लगातार शेयर किए जा रहे हैं।
वहीं कुछ यूज़र्स का दावा है कि एक अन्य वीडियो में उन्होंने “सनातन धर्म का अपमान” करते हुए टिप्पणी की थी — हालांकि, रफ़्तार टुडे इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता।
इन वायरल वीडियोज़ ने आग में घी डालने का काम किया है, जिससे न केवल स्थानीय राजनीतिक माहौल गर्म हुआ है, बल्कि भाजपा संगठन के अंदर भी असहजता महसूस की जा रही है।
MLC की चुप्पी और मीडिया की प्रतीक्षा
रफ़्तार टुडे ने पूरे मामले में MLC दिनेश गोयल से कई बार प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की।
फ़ोन कॉल, मैसेज और व्हाट्सएप सभी माध्यमों से संपर्क किया गया, परंतु अभी तक कोई बयान प्राप्त नहीं हुआ है। इस चुप्पी ने रहस्य और बढ़ा दिया है — क्या सहायता वास्तव में दी गई थी? अगर हां, तो किस उद्देश्य से? क्या यह किसी शैक्षणिक योजना के तहत थी या व्यक्तिगत पहल?
इन सवालों के जवाब का इंतजार अब जनता और मीडिया दोनों को है।

कॉलेज प्रशासन की ओर से भी नहीं आया बयान
बील अकबरपुर स्थित विजय सिंह पथिक लॉ इंस्टिट्यूट के प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन वहां से भी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई। कॉलेज के कुछ स्टाफ सदस्यों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि “यह मुद्दा अचानक से बड़ा बना दिया गया है, जबकि कॉलेज में नियमित शिक्षण कार्य सामान्य रूप से चल रहा है।”
हालांकि, यह भी सच है कि अब इस विवाद ने कॉलेज की प्रतिष्ठा पर असर डालना शुरू कर दिया है।
पत्रकारीय जांच जारी
रफ़्तार टुडे ने इस मामले में भाजपा संगठन और संबंधित शैक्षणिक संस्थान दोनों से आधिकारिक बयान मांगे हैं, ताकि खबर के दोनों पक्ष स्पष्ट रूप से सामने आ सकें।
रिपोर्ट प्रकाशित होने तक किसी भी पक्ष से लिखित या मौखिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी थी।
सोशल मीडिया पर ट्रेंड बन गया “#राजकुमारभाटीकाकॉलेज”
जैसे ही यह खबर वायरल हुई, सोशल मीडिया पर #राजकुमारभाटी_काकॉलेज, #MLCदिनेशगोयल और #BJPvsSP जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। लोगों ने मीम्स, वीडियो और स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए दोनों पक्षों से जवाब मांगा।
कुछ ने इसे “राजनीतिक दोहरी नीति” कहा, तो कुछ ने “सामाजिक सहिष्णुता का उदाहरण” बताया।
लेकिन आम जनता का सवाल साफ है अगर कोई भाजपा नेता किसी ऐसे व्यक्ति को आर्थिक मदद देता है, जो खुले तौर पर भाजपा की आलोचना करता है, तो इसके पीछे क्या मंशा है?
शिक्षा के नाम पर राजनीति या राजनीति के नाम पर शिक्षा?
यह सवाल अब शिक्षा और राजनीति दोनों के क्षेत्र में गूंज रहा है। कुछ शिक्षाविदों का कहना है कि शिक्षा संस्थान किसी भी राजनीतिक विचारधारा से ऊपर होने चाहिए, जबकि कुछ का मानना है कि जब सहायता सार्वजनिक धन से जुड़ी हो, तो पारदर्शिता अनिवार्य है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला आने वाले स्थानीय चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। क्योंकि भाजपा के भीतर भी इस “मदद” को लेकर असंतोष की आवाजें उठ रही हैं।
जवाब न देने पर उठे और सवाल
MLC दिनेश गोयल की लगातार चुप्पी अब लोगों को और जिज्ञासु बना रही है।
स्थानीय पत्रकारों ने भी उनकी प्रतिक्रिया के लिए प्रयास किया, परंतु उन्होंने न फोन उठाया, न संदेश का उत्तर दिया।
कई भाजपा कार्यकर्ताओं ने ऑफ रिकॉर्ड कहा कि उन्हें भी इस विषय की जानकारी नहीं है और संगठन स्तर पर इस पर “इनक्वायरी” की जा सकती है।
जनता की राय: “नेता नहीं, नीति बोले”
ग्रेटर नोएडा और दादरी के नागरिकों ने कहा कि आज जब राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठ रही है, तब नेताओं को खुलकर जनता के सवालों का उत्तर देना चाहिए।
स्थानीय निवासी रवि सिंह का कहना था “अगर चंदा शिक्षा के लिए दिया गया है, तो स्वागत योग्य है। लेकिन अगर यह किसी राजनीतिक लाभ के लिए दिया गया है, तो जनता सब देख रही है।”
रफ़्तार टुडे की जांच जारी
रफ़्तार टुडे इस पूरे प्रकरण की तथ्यात्मक जांच कर रहा है।
पत्रकार टीम ने संबंधित दस्तावेजों की पुष्टि के लिए संस्थान और भाजपा कार्यालय दोनों से संपर्क साधा है।
फिलहाल आधिकारिक दस्तावेज़ों की पुष्टि होना बाकी है। जैसे ही कोई प्रमाणिक प्रतिक्रिया या दस्तावेज़ प्राप्त होंगे, खबर का अगला अपडेट प्रकाशित किया जाएगा।
सियासत में मदद और मंशा दोनों सवालों के घेरे में
फिलहाल यह मामला राजनीति, शिक्षा और धर्म तीनों का संगम बन चुका है। जहां एक ओर जनता पारदर्शिता की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर संबंधित पक्षों की चुप्पी ने रहस्य और गहरा दिया है।
क्या यह “शिक्षा के लिए सहयोग” है या “सियासत के लिए सौदा”?
इस सवाल का जवाब आने वाले कुछ दिनों में स्पष्ट होगा।



