Breaking News : "पेड़ों की कटाई बना पर्यावरणीय अपराध, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सुपरवाइजर और ठेकेदार पर गिरा कानून का हंटर!", पेड़ काटने की साज़िश बेनकाब, अब होगी सख्त कार्रवाई!

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
ग्रेटर नोएडा में पेड़ों की अवैध कटाई का एक बड़ा मामला सामने आया है जिसने न केवल पर्यावरण प्रेमियों को झकझोर दिया, बल्कि सरकारी एजेंसियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। चाई-3 सेक्टर की ग्रीन बेल्ट में चोरी-छिपे 10 पेड़ों को काटने की घटना अब कानूनी कार्रवाई की दहलीज़ पर पहुंच चुकी है। वन विभाग की जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एक सुपरवाइजर और संबंधित ठेकेदार ने बिना अनुमति के पेड़ काटे थे। इस अवैध गतिविधि के लिए अब दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
राज्य मंत्री की मौजूदगी में हुआ था यह ‘पर्यावरणीय अपराध’!
सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि यह घटना उस समय घटी जब प्रदेश के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री केपी मलिक खुद जिले में मौजूद थे। उनकी उपस्थिति में इस तरह की हरकत न केवल शासन-प्रशासन की छवि पर दाग लगाती है बल्कि वन संरक्षण के कानूनों की धज्जियां उड़ाने जैसा है।
ग्रेटर नोएडा की ग्रीन बेल्ट में चोरी-छिपे जो पेड़ काटे गए, वे कोई सूखे पेड़ नहीं थे — बल्कि हरे-भरे और पर्यावरण के लिए उपयोगी बिलायती बबूल थे। यह साफ तौर पर वन अधिनियम 1927 और उत्तर प्रदेश ट्री प्रोटेक्शन कानून का उल्लंघन है।
जांच में हुआ खुलासा: सिर्फ 10 नहीं, बड़ी संख्या में पेड़ काटने की थी तैयारी!
ग्रेटर नोएडा वन विभाग के प्रभागीय वनाधिकारी प्रमोद कुमार ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए एक विशेष जांच टीम का गठन किया। इस टीम का नेतृत्व वन दरोगा लव कौशिक और अभिज्ञान सूर्यवंशी ने किया। प्रारंभिक सूचना के मुताबिक करीब 100 पेड़ों की कटाई की बात कही जा रही थी, लेकिन जांच में 10 पेड़ों के अवैध कटान की पुष्टि हुई।
हालांकि सूत्रों की मानें तो बाकी पेड़ों को काटने की भी योजना थी, जिसे समय रहते पकड़ लिया गया। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने काटे गए पेड़ों को जब्त कर लिया है।
पेड़ सूखे नहीं थे, फिर क्यों किया गया कटान?
ठेकेदार की ओर से सफाई दी गई थी कि जिन पेड़ों को काटा गया, वे पूरी तरह सूखे हुए थे और खतरा बन चुके थे। लेकिन वन अधिकारियों ने जब उनकी स्थिति का भौतिक परीक्षण किया, तो यह साफ हुआ कि पेड़ सूखे नहीं थे। वे हरे-भरे और जैव विविधता के लिए अनुकूल स्थिति में थे।
इसके अलावा, पेड़ काटने के लिए आवश्यक अनुमति भी प्राधिकरण या वन विभाग द्वारा जारी नहीं की गई थी, जो कि सीधा कानून का उल्लंघन है।
अब कानूनी शिकंजा, FIR दर्ज – दोषियों की खैर नहीं!
वन विभाग ने अब इस अवैध कटाई के मामले में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सुपरवाइजर और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए FIR दर्ज कर दी है। संबंधित धाराओं के तहत यदि दोष सिद्ध होता है तो उन्हें 6 महीने से लेकर 2 साल तक की सज़ा और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।
यह कार्रवाई भविष्य में होने वाली ऐसी गैरकानूनी हरकतों के खिलाफ एक कड़ा संदेश मानी जा रही है।
हर पेड़ की है कीमत, पर्यावरण संरक्षण अब जन आंदोलन बनाना होगा!
यह घटना सिर्फ एक सरकारी लापरवाही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संकट की ओर बढ़ते कदम की चेतावनी है। ऐसे समय में जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए नए-नए उपाय अपना रही है, भारत में अवैध पेड़ कटाई जैसी घटनाएं बेहद शर्मनाक हैं।
वन विभाग की तत्परता ने इस बार मामले को गंभीर मोड़ पर पहुंचाया, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या प्राधिकरण जैसी जिम्मेदार संस्थाएं भी पर्यावरण सुरक्षा को लेकर उतनी ही गंभीर हैं?
क्या कहते हैं पर्यावरण प्रेमी और स्थानीय निवासी?
स्थानीय निवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। रफ़्तार टुडे से बात करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता रेखा भाटिया ने कहा,
“प्राधिकरण को हर प्रोजेक्ट में ग्रीन बेल्ट को सुरक्षित रखने की नीति पर काम करना चाहिए। यदि ऐसे ही पेड़ काटे जाते रहे, तो आने वाली पीढ़ी को ऑक्सीजन के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।”
वन विभाग को मिला स्थानीय समर्थन, सोशल मीडिया पर मचा हड़कंप
घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने #SaveGreenBelt, #TreeCuttingBan और #EnvironmentJustice जैसे हैशटैग के साथ अपनी नाराजगी व्यक्त की। ट्विटर (एक्स) पर लोगों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से तत्काल जवाबदेही तय करने की मांग की।
अब क्या होगी अगली कार्रवाई?
वन विभाग ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है और अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस मामले में और कितनी सख्ती दिखाता है।
प्रशासन को चाहिए कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए:
- ग्रीन बेल्ट्स की निगरानी बढ़ाई जाए
- पेड़ों की GPS आधारित टैगिंग हो
- पेड़ काटने के लिए सख्त अनुमति प्रणाली लागू हो
- दोषियों को सार्वजनिक रूप से जवाबदेह ठहराया जाए
निष्कर्ष: हरा है तो कल है — नियमों की अवहेलना नहीं बर्दाश्त की जाएगी!
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर दिखा दिया कि पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर कोताही का कोई स्थान नहीं है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के जिम्मेदार अफसरों को अब नजीर बनाना जरूरी है ताकि ग्रीन बेल्ट और हमारे पर्यावरण की रक्षा की जा सके।
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