Noida Company On Ganga Expressway News : मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट गंगा एक्सप्रेसवे का विस्तार, नोएडा की कंपनी ने मेरठ से हरिद्वार तक 110 किमी छह लेन हाईवे, तीर्थाटन व व्यापार को नई गति, डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी नोएडा की कंपनी को, औद्योगिक और आवासीय विकास की राह

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी परियोजना गंगा एक्सप्रेसवे अब नए स्वरूप में नजर आने वाली है। राज्य सरकार ने इसे मेरठ से हरिद्वार तक विस्तार देने का फैसला किया है। यह लगभग 110 किलोमीटर लंबा छह लेन हाईवे होगा, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को और अधिक मजबूती से जोड़ेगा।
इस परियोजना का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और अब नोएडा की एक कंपनी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करेगी।
इस एक्सप्रेसवे के बनने से न सिर्फ तीर्थाटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि क्षेत्रीय विकास, औद्योगिक गतिविधियों और कनेक्टिविटी को भी नई दिशा मिलेगी।
गंगा एक्सप्रेसवे का दूसरा चरण – मेरठ से हरिद्वार तक
गंगा एक्सप्रेसवे का पहला चरण मेरठ से प्रयागराज (594 किमी) तक बनाया जा रहा है। अब इसका दूसरा चरण मेरठ से हरिद्वार तक होगा।
यह मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे लगभग 110 से 150 किलोमीटर लंबा होगा और इसमें छह लेन का निर्माण किया जाएगा। यह मार्ग मेरठ से शुरू होकर मुजफ्फरनगर, रुड़की से गुजरते हुए हरिद्वार तक पहुंचेगा। हरिद्वार पहुंचने के बाद यह एक्सप्रेसवे सीधे चार धाम राजमार्ग और चार धाम रेलवे परियोजना से जुड़ जाएगा।
गढ़मुक्तेश्वर में गंगाधाम योजना को गति
हरिद्वार से प्रयागराज तक का सफर भी बिना परेशानी के सीमित समय में पूरा कर लिया जाएगा। इससे पूरे क्षेत्र का आर्थिक विकास होगा। गंगा एक्सप्रेसवे के दोनों ओर औद्योगिक सिटी भी बसाए जा रहे हैं। इससे उद्योगों को पर्याप्त स्थान मिल सकेगा और कच्चा माल मंगवाने। तैयार माल बाजार भेजने के लिए हाईवे बराबर में होगा। वहीं जगह-जगह पर आवासीय व शापिंग सिटी भी बसाए जाएंगे। एचपीडीए ने गढ़मुक्तेश्वर में गंगाधाम योजना को गति प्रदान करना आरंभ कर दिया है।
तीर्थाटन और पर्यटन को नई रफ्तार
हरिद्वार देश और दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार से जुड़ना सीधे तौर पर तीर्थाटन और पर्यटन को नई ऊंचाई देगा। इससे दिल्ली-एनसीआर से हरिद्वार पहुंचना और भी आसान हो जाएगा।
कांवड़ यात्रा, कुंभ और अन्य धार्मिक आयोजनों के समय यात्रियों को सुगम यातायात मिलेगा। उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों के लिए यह नया हाईवे राहत और गति दोनों प्रदान करेगा।

गढ़मुक्तेश्वर में गंगाधाम योजना को गति
गढ़मुक्तेश्वर, गंगा नदी के तट पर स्थित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यहां पहले से ही गंगाधाम योजना पर काम चल रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार से जुड़ना इस योजना को और गति देगा। श्रद्धालुओं को गढ़मुक्तेश्वर आने-जाने में आसानी होगी। गंगा किनारे धार्मिक पर्यटन और भी संगठित रूप ले सकेगा।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को रोजगार और व्यापार के अवसर मिलेंगे।
औद्योगिक और आवासीय विकास की राह
गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ तीर्थाटन का मार्ग नहीं होगा, बल्कि यह आर्थिक विकास की धुरी भी बनेगा। इस एक्सप्रेसवे के दोनों ओर औद्योगिक सिटी बसाने की योजना है। यहां फैक्ट्रियों और उद्योगों को स्थापित करने के लिए पर्याप्त स्थान मिलेगा। कच्चा माल मंगाने और तैयार माल को बाजार तक पहुँचाने में आसानी होगी।
साथ ही, आवासीय कॉलोनियां और शॉपिंग सिटी भी विकसित होंगी। यानी यह हाईवे केवल सफर को ही नहीं बल्कि जीवन स्तर को भी नई रफ्तार देगा।
गंगा एक्सप्रेसवे के मेरठ से प्रयागराज तक के पहले चरण का निर्माण लगभग अंतिम चरण में है। यह 93 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। वर्षाकाल पूर्ण होने के साथ ही इसके निर्माण में तेजी आएगी। यूपिडा के अनुसार इसका औपचारिक उदघाटन 15 दिसंबर तक कराने की तैयारी है।
दूसरे चरण के लिए सर्वेक्षण का कार्य पूरा हो चुका है। अब इसकी डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार करने का काम किया जाएगा। इसका उायित्व नोएडा की एसए इंफ्राटक्चर कंसल्टेंट कंपनी को दिया गया है। यह कंपनी चार महीने में इसकी डीपीआर तैयार करके यूपीडा को सौंप देगी। इस मार्ग के लिए शासन की ओर से 50 करोड़ रुपये का बजट आवंटित हो गया है।
मौजूदा स्थिति – पहला चरण लगभग पूरा
गंगा एक्सप्रेसवे का पहला चरण यानी मेरठ से प्रयागराज तक का 594 किमी मार्ग लगभग 93 प्रतिशत पूरा हो चुका है। बरसात खत्म होते ही निर्माण कार्य में तेजी आएगी।
यूपीडा (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण) का कहना है कि 15 दिसंबर तक इसका उद्घाटन करने की तैयारी है। इस चरण के पूरा होने के बाद मेरठ से प्रयागराज तक का सफर और भी सुगम होगा।
दूसरे चरण की डीपीआर तैयार
दूसरे चरण के लिए सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। अब इसकी डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार करने की जिम्मेदारी नोएडा की एसए इंफ्रास्ट्रक्चर कंसल्टेंट कंपनी को दी गई है। यह कंपनी चार महीने में डीपीआर तैयार करके यूपीडा को सौंपेगी। शासन ने इसके लिए 50 करोड़ रुपये का बजट भी जारी कर दिया है।
डीपीआर में मार्ग को छोटा करने और आसपास के जिलों को जोड़ने पर भी विचार किया जाएगा।
कनेक्टिविटी का मजबूत नेटवर्क
इस एक्सप्रेसवे के बनने से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक सुधार होगा। दिल्ली-एनसीआर से हरिद्वार तक की यात्रा बेहद आसान और तेज होगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग सीधे चार धाम यात्रा से जुड़ जाएंगे।
प्रयागराज से हरिद्वार तक का पूरा एक्सप्रेसवे नेटवर्क तैयार हो जाएगा। इससे स्थानीय, क्षेत्रीय और अंतरराज्यीय स्तर पर परिवहन और व्यापार को नई रफ्तार मिलेगी।
प्रशासनिक अधिकारियों की राय
संदीप कुमार, एडीएम का कहना है: “गंगा एक्सप्रेसवे का पहला चरण लगभग पूरा होने को है। उसका लोकार्पण निर्धारित समय पर किया जा सकेगा। वहीं अब दूसरे चरण के निर्माण में भी तेजी आएगी। डीपीआर के लिए कंपनी निर्धारित कर दी गई है। यह कंपनी एक सितंबर से कार्य आरंभ कर देगी।”
विकास और विश्वास की डबल रफ्तार
गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार तक विस्तार न सिर्फ यात्रा को आसान बनाएगा बल्कि आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों को गति देगा।
यह परियोजना उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के साझा विकास का आधार बनेगी। तीर्थाटन, पर्यटन, उद्योग और आवास – हर क्षेत्र को इस हाईवे से नई ऊर्जा और रफ्तार मिलेगी।



