Breaking DFIC News : डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट पर किसानों का गुस्सा फूटा — “नए अवार्ड तक नहीं देंगे जमीन पर कब्जा”, दादरी के कठेहरा गांव में हुई हंगामेदार बैठक, किसानों के आरोप – “छोटे प्लॉट वालों के साथ अन्याय”, “हमारी जमीन की कीमत शहरों के बराबर मिलनी चाहिए”, SDM दादरी के आश्वासन पर किसानों की मांग को यूपी शासन स्तर पर रखा जायेगा

दादरी/ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। उत्तर भारत के सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में से एक डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Freight Corridor) एक बार फिर किसानों के विरोध के कारण सुर्खियों में आ गया है। दादरी क्षेत्र के किसानों ने आरोप लगाया है कि उनकी भूमि का मुआवजा बेहद कम दरों पर तय किया गया है, जो न्यायसंगत नहीं है। किसानों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक नया अवार्ड घोषित नहीं होता, वे किसी भी कीमत पर भूमि पर कब्जा नहीं करने देंगे।
किसानों ने कहा — “कम रेट पर नहीं देंगे ज़मीन, चाहिए नया अवार्ड”
बुधवार को दादरी तहसील के कठेहरा गांव में किसानों की एक अहम बैठक हुई, जिसमें रेलवे प्रोजेक्ट टीम और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में रेलवे के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर मदन लाल गौतम और एसडीएम अनुज नेहरा से किसानों ने दो टूक कहा कि “पुराना अवार्ड रद्द किया जाए और जमीन का मूल्य मौजूदा बाजार दर के अनुसार तय किया जाए। जब तक नया अवार्ड घोषित नहीं होगा, तब तक किसी को भी जमीन पर कब्जा नहीं करने देंगे।” किसानों ने अपनी मांगों का ज्ञापन भी अधिकारियों को सौंपा और विरोध प्रदर्शन के संकेत दिए।
यह है डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट
भारत सरकार का डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) देश के माल परिवहन को आधुनिक और तेज़ बनाने का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। इसमें देशभर में 3,300 किलोमीटर लंबा रेल नेटवर्क बनाया जा रहा है, जो मालगाड़ियों के लिए समर्पित होगा।
दादरी इसका एक प्रमुख टर्मिनल पॉइंट है, जहां से मालगाड़ियों का संचालन दिल्ली, मुंबई और कोलकाता की ओर होगा। लेकिन, इस महत्वाकांक्षी योजना को अब भूमि विवादों की वजह से स्थानीय अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों के आरोप – “छोटे प्लॉट वालों के साथ अन्याय”
कठेहरा और दादरी नगर पालिका क्षेत्र के कई ग्रामीणों ने कहा कि अधिग्रहण में छोटे प्लॉट वाले किसानों के साथ अन्याय हुआ है। ग्रामीण मनीष भाटी ने कहा “हमारे छोटे-छोटे प्लॉट हैं, लेकिन सरकार ने जो रेट तय किया है, वह बाजार मूल्य से बहुत कम है। अवार्ड में कई गड़बड़ियां हैं। हम चाहते हैं कि अवार्ड को कैंसिल कर नया बनाया जाए, वरना हम जमीन पर कब्जा नहीं देंगे।”
किसानों का कहना है कि सरकार ने न तो उनकी राय ली और न ही किसी सर्वे के अनुसार उचित मूल्य निर्धारित किया।
“हमारी जमीन की कीमत शहरों के बराबर मिलनी चाहिए”
ग्रामीणों ने बताया कि जिस क्षेत्र में भूमि अधिग्रहित की जा रही है, वह अब पूरी तरह शहरीकृत इलाका है — जहां प्लॉट, कॉलोनियां और औद्योगिक यूनिटें बन चुकी हैं।
ऐसे में किसानों का कहना है कि “हमारी जमीन अगर सरकार ले रही है तो हमें भी वही रेट मिलना चाहिए जो आस-पास के सेक्टरों में चल रहा है। जमीन हमारी आजीविका का आधार है, इसे सस्ते में नहीं देंगे।”
SDM दादरी अनुज नेहरा और रेलवे अधिकारियों के साथ किसानों की गर्मागर्म बहस
बैठक के दौरान किसानों और अधिकारियों के बीच कई बार गर्मागरम बहस हुई। एसडीएम अनुज नेहरा ने किसानों को शांत रहने की अपील करते हुए कहा कि उनकी मांगें ऊपरी स्तर तक भेजी जाएंगी। उन्होंने भी आश्वासन दिया कि प्रोजेक्ट की प्रगति में किसानों की राय को प्राथमिकता दी जाएगी।
हालांकि, किसानों ने कहा कि अब वे केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे, बल्कि नया अवार्ड घोषित होने के बाद ही आगे बढ़ने देंगे। रेलवे अधिकारी मदन लाल गौतम ने भी आश्वासन दिया कि प्रोजेक्ट की प्रगति में किसानों की राय को प्राथमिकता दी जाएगी।
किसानों की एकजुटता ने दिखाया असर
बैठक में बड़ी संख्या में किसान पहुंचे और एक स्वर में प्रशासन को चेताया कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट की जमीन पर कब्जा नहीं करने दिया जाएगा। किसानों ने कहा कि वे कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे, लेकिन अपना हक लेकर रहेंगे।
बैठक में शामिल प्रमुख किसान
इस मौके पर जीतराम, सतेंद्र प्रधान, रूप भाटी, मनीष भाटी बीडीसी, प्रदीप भाटी, धीर सिंह भाटी, विश्वजीत भाटी, महिपाल सिंह, राजकुमार सिंह, संतपाल सिंह, शिवकुमार सिंह, राजू भाटी, संदीप भाटी, कर्मवीर सिंह, दीपक भाटी, महिपाल सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
सभी ने एक स्वर में कहा कि “हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमारी मेहनत की जमीन का सही मूल्य हमें मिलना चाहिए। सरकार को किसानों के हितों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।”
जिला प्रशासन पर बढ़ा दबाव
इस विरोध के बाद जिला प्रशासन भी हरकत में आ गया है। सूत्रों के अनुसार, अधिकारी अब पुराने अवार्ड की समीक्षा रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं, ताकि आगामी बैठक में स्थिति स्पष्ट की जा सके। हालांकि, प्रशासन की कोशिश है कि प्रोजेक्ट का काम रुके नहीं, जबकि किसान चाहते हैं कि पहले मुआवजे का समाधान हो।
विकास बनाम अधिकार: दो धाराओं में फंसा प्रोजेक्ट
डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का उद्देश्य जहां देश में औद्योगिक विकास को गति देना है, वहीं यह विवाद एक बार फिर यह दिखाता है कि विकास और किसानों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाना कितना चुनौतीपूर्ण है।
दादरी का यह विरोध आने वाले दिनों में प्रोजेक्ट की टाइमलाइन पर असर डाल सकता है।
किसानों की चेतावनी – “अगर हमारी मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन होगा तेज”
किसानों ने कहा कि वे अब अपने अधिकार की लड़ाई को जिला स्तर से लेकर लखनऊ तक ले जाएंगे। उनका कहना है कि “हम सरकार के विकास कार्यों के साथ हैं, लेकिन हमारा हक छीना गया तो हम शांत नहीं बैठेंगे।”
डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जैसा राष्ट्रीय महत्व का प्रोजेक्ट एक ओर देश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने का सपना है,
तो दूसरी ओर किसानों के न्यायपूर्ण मुआवजे का सवाल इस सपने के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है। अब देखना यह है कि सरकार किसानों की नाराजगी कैसे दूर करती है और विकास की गाड़ी को फिर से पटरी पर लाती है।



