Sharda University News : शारदा विश्वविद्यालय में हुआ भव्य दीक्षारंभ 2025, नई ऊर्जा, नए सपनों और सफलता की राह पर बढ़ते कदम, फ्रेशर्स का उत्साह और रंगारंग माहौल, “आप भाग्यशाली हैं कि शारदा को चुना” – पूर्व प्रमुख सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
ज्ञान की नगरी ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क स्थित शारदा विश्वविद्यालय में छात्रों के नए बैच का स्वागत एक बेहद शानदार और प्रेरणादायक समारोह “दीक्षारंभ 2025” के रूप में किया गया। इस कार्यक्रम ने न सिर्फ विद्यार्थियों को नई ऊर्जा और आत्मविश्वास दिया बल्कि उन्हें जीवन और करियर में आगे बढ़ने के लिए सही मार्गदर्शन भी प्रदान किया।
दीक्षारंभ का यह आयोजन विश्वविद्यालय की परंपरा का हिस्सा है, जहां हर साल फ्रेशर्स को नए माहौल से परिचित कराया जाता है और उन्हें उच्च शिक्षा की उस यात्रा के लिए तैयार किया जाता है, जो केवल किताबों तक सीमित नहीं होती बल्कि जीवन के हर पहलू को छूती है।
दीप प्रज्वलन और आशीर्वचन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और गणेश वंदना के साथ हुआ। मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे पूर्व प्रमुख सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा, बीएसएफ के पूर्व डीआईजी नरेंद्र नाथ दुबे, पूर्व सिविल सर्वेंट डॉ. तन्नू जैन, प्रो-चांसलर वाइके गुप्ता और वाइस चांसलर डॉ. सिबाराम खारा। इन महानुभावों के करकमलों से समारोह ने एक पवित्र और प्रेरणादायक शुरुआत की।
“आप भाग्यशाली हैं कि शारदा को चुना” – दुर्गा शंकर मिश्रा
दुर्गा शंकर मिश्रा का प्रेरक संदेश संबोधन में पूर्व प्रमुख सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने छात्रों को बताया –
“आप बेहद भाग्यशाली हैं कि आपने विश्व स्तरीय शिक्षा प्रदान करने वाले शारदा विश्वविद्यालय को चुना है। शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें अनुसंधान, नवाचार और आत्मविकास सबसे अहम है।”
उन्होंने शिक्षकों को भी संदेश देते हुए कहा कि “समय के साथ ज्ञान को अद्यतन करना, नए अनुसंधान करना और विद्यार्थियों को दिशा दिखाना ही असली गुरु का धर्म है।”
मिश्रा ने विद्यार्थियों को अनुशासन, सकारात्मकता और अच्छी आदतों को अपनाने की सलाह दी और भारत की युवा शक्ति को विश्व के लिए सबसे बड़ा अवसर बताया।
नरेंद्र नाथ दुबे ने दिया जीवन का व्यावहारिक ज्ञान
बीएसएफ के पूर्व डीआईजी नरेंद्र नाथ दुबे ने कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है। उन्होंने जीवन के छोटे-छोटे उदाहरण देकर छात्रों को समझाया कि –
“व्यावहारिक ज्ञान के बिना पुस्तकीय ज्ञान अधूरा है। असली शिक्षा वही है, जो आपको जीवन की चुनौतियों का सामना करना सिखाए। हमें अपने संस्कारों, कर्तव्यों और नैतिक मूल्यों को कभी नहीं भूलना चाहिए।”
“असंभव कुछ भी नहीं” – डॉ. तन्नू जैन
कार्यक्रम में छात्रों के बीच लोकप्रिय रही पूर्व सिविल सर्वेंट और मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. तन्नू जैन ने विद्यार्थियों को आत्मविश्वास और कठिन परिश्रम का पाठ पढ़ाया।
उन्होंने कहा –
“विद्यार्थी जीवन तपस्या का जीवन है। संकल्प, आत्मविश्वास और परिश्रम से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। जीवन में असंभव जैसी कोई चीज नहीं होती। हर चुनौती आपके लिए अवसर है।”

प्रो-चांसलर वाइके गुप्ता का मार्गदर्शन कहा “ज्ञान को समाज से जोड़ें
प्रो-चांसलर वाइके गुप्ता ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा –
“ज्ञान का असली महत्व तभी है जब वह समाज के लिए उपयोगी हो। आपको ऐसे विचार लाने होंगे जो समाज के हित में हों। किताबें तो हमेशा रहेंगी, लेकिन आपकी जिज्ञासा ही आपको आगे बढ़ाएगी।”
उन्होंने विद्यार्थियों से असफलताओं को सीखने का साधन मानने की बात कही और बताया कि अनुसंधान और खोज की प्रक्रिया में गिरना और फिर उठना ही सफलता की असली परिभाषा है।
फ्रेशर्स का उत्साह और रंगारंग माहौल
दीक्षारंभ कार्यक्रम में जहां एक ओर प्रेरक वक्तव्यों ने छात्रों के भीतर आत्मविश्वास जगाया, वहीं दूसरी ओर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और विद्यार्थियों की सहभागिता ने पूरे माहौल को जीवंत बना दिया। फ्रेशर्स ने अपने अनुभव साझा किए और कहा कि उन्हें शारदा विश्वविद्यालय का हिस्सा बनकर गर्व महसूस हो रहा है।
शिक्षकों की मौजूदगी ने बढ़ाई शोभा
इस अवसर पर प्रो-वाइस चांसलर डॉ. परमानंद, रजिस्ट्रार डॉ. विवेक कुमार गुप्ता, डॉ. राजीव गुप्ता, डॉ. आर.सी. सिंह, डॉ. भुवनेश कुमार, समेत सभी डीन और विभागाध्यक्ष मौजूद रहे। उनके आशीर्वचन और सुझावों ने छात्रों को सही दिशा प्रदान की।
शारदा विश्वविद्यालय का यह दीक्षारंभ 2025 केवल एक औपचारिक स्वागत नहीं था, बल्कि यह एक नई शुरुआत का प्रतीक था। इस कार्यक्रम ने साबित किया कि शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का साधन नहीं, बल्कि यह जीवन जीने की कला और समाज निर्माण का मार्ग भी है। छात्रों ने प्रेरणा, ऊर्जा और संकल्प के साथ अपनी शैक्षणिक यात्रा शुरू की।



