Breaking News : अब जाम नहीं, फर्राटे भरेंगी रफ्तारें!, दादरी से लालकुआं तक बनेगा 12 किलोमीटर लंबा छह लेन एलिवेटेड रोड, ₹2300 करोड़ की मेगा परियोजना से गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और बुलंदशहर के लाखों लोगों को मिलेगी बड़ी राहत, अक्टूबर में जारी हो सकता है टेंडर, न्यू नोएडा और जेवर एयरपोर्ट को मिलेगा बड़ा फायदा

गाजियाबाद/दादरी, रफ़्तार टूडे। एनसीआर के लाखों यात्रियों के लिए वर्षों से सिरदर्द बना दादरी–लालकुआं मार्ग अब जल्द ही नई पहचान पाने जा रहा है। रोजाना घंटों तक ट्रैफिक जाम, धीमी रफ्तार और बढ़ते वाहनों के दबाव से जूझ रहे इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर को अब आधुनिक एलिवेटेड सड़क की सौगात मिलने वाली है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दादरी से गाजियाबाद के लालकुआं तक लगभग 12 किलोमीटर लंबे छह लेन एलिवेटेड रोड के निर्माण को मंजूरी देने की घोषणा की है। करीब 2300 करोड़ रुपये की लागत वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना एनसीआर की सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल मानी जा रही है।
इस एलिवेटेड रोड के बनने से केवल दादरी और गाजियाबाद ही नहीं, बल्कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा, बुलंदशहर, खुर्जा, अलीगढ़ और आगरा की ओर आने-जाने वाले लाखों लोगों को प्रतिदिन लगने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से इस मार्ग के चौड़ीकरण और जाम से निजात की मांग उठ रही थी, जिसे अब केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद नया आयाम मिल गया है।
रोजाना जाम से जूझने वालों के लिए राहत की बड़ी खबर
दादरी से लालकुआं तक का मार्ग एनएच-9 का अत्यंत व्यस्त हिस्सा माना जाता है। यहां सुबह और शाम के समय वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। भारी ट्रकों, औद्योगिक वाहनों, स्कूल बसों, निजी वाहनों और सार्वजनिक परिवहन के कारण यह सड़क अक्सर जाम से प्रभावित रहती है। ऐसे में एलिवेटेड रोड बनने के बाद लंबी दूरी का ट्रैफिक ऊपरी मार्ग से गुजरेगा, जबकि स्थानीय यातायात नीचे की सड़क का उपयोग करेगा। इससे ट्रैफिक का दबाव कम होगा, यात्रा का समय घटेगा और सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आने की संभावना है।

गाजियाबाद, नोएडा और दादरी की कनेक्टिविटी होगी और मजबूत
यह परियोजना केवल एक सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे एनसीआर की कनेक्टिविटी को नया आयाम देने वाली है। दादरी क्षेत्र तेजी से औद्योगिक और आवासीय केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। वहीं न्यू नोएडा, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजनाओं के कारण इस मार्ग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। एलिवेटेड रोड बनने से नोएडा और ग्रेटर नोएडा से गाजियाबाद की यात्रा अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक होगी। साथ ही बुलंदशहर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से दिल्ली-एनसीआर आने वाले यात्रियों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
अक्टूबर में जारी हो सकता है टेंडर
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि इस परियोजना का टेंडर अक्टूबर में जारी किया जाएगा। इसके बाद निर्माण प्रक्रिया शुरू होगी। यदि कार्य तय समय पर पूरा होता है तो आने वाले वर्षों में यह मार्ग एनसीआर के सबसे आधुनिक एलिवेटेड कॉरिडोर में शामिल होगा।विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से न केवल यात्रा आसान होगी बल्कि आसपास के क्षेत्रों में निवेश, व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे।
उत्तर प्रदेश में सड़क क्रांति को मिलेगी नई रफ्तार
यह घोषणा 13 जुलाई को लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान की गई। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उत्तर प्रदेश में 50 से 60 हजार करोड़ रुपये की नई सड़क परियोजनाओं को मंजूरी देने की भी घोषणा की। इसी क्रम में दादरी–लालकुआं एलिवेटेड रोड को भी स्वीकृति मिली, जिसे एनसीआर की महत्वपूर्ण यातायात परियोजनाओं में गिना जा रहा है।
न्यू नोएडा और जेवर एयरपोर्ट को मिलेगा बड़ा फायदा
दादरी के निकट विकसित हो रहे न्यू नोएडा और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद इस क्षेत्र में यातायात कई गुना बढ़ने का अनुमान है। उद्योग, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउस और आवासीय परियोजनाओं के विस्तार के कारण भविष्य में इस मार्ग पर वाहनों का दबाव और बढ़ेगा। ऐसे में एलिवेटेड रोड भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार की जा रही एक महत्वपूर्ण परियोजना मानी जा रही है। इससे एयरपोर्ट तक पहुंचने वाले यात्रियों, औद्योगिक इकाइयों, व्यापारियों और दैनिक यात्रियों को तेज और निर्बाध कनेक्टिविटी मिलेगी।
स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल
परियोजना की मंजूरी की खबर सामने आने के बाद दादरी, गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लोगों में खुशी का माहौल है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वर्षों से इस मार्ग पर जाम सबसे बड़ी समस्या बना हुआ था। यदि एलिवेटेड रोड समय पर बन जाती है तो लाखों लोगों का समय बचेगा, ईंधन की खपत कम होगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल ट्रैफिक सुधार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे क्षेत्र के आर्थिक विकास, औद्योगिक निवेश और शहरी विस्तार को नई गति देगी।



