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UP Panchayat Elections News : कोटे में कोटा नहीं तो सामाजिक न्याय अधूरा!", यूपी पंचायत चुनाव में नई बहस की शुरुआत, मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने मुख्यमंत्री से की आरक्षण उपवर्गीकरण की मांग, मुख्यमंत्री को सौंपा गया प्रस्ताव, अब बात पहुंचेगी प्रधानमंत्री तक

मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने मुख्यमंत्री से की आरक्षण उपवर्गीकरण की मांग


लखनऊ/UP, रफ़्तार टुडे।
उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर आरक्षण व्यवस्था को लेकर गरमाने लगी है, इस बार मुद्दा है पंचायत चुनावों में “कोटे में कोटा” की मांग। प्रदेश के पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर इस मांग को ज़ोर-शोर से उठाया है और सामाजिक न्याय की बहस को एक नई दिशा दी है। उनका कहना है कि जब तक अनुसूचित जातियों और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के भीतर सबसे पिछड़ी जातियों को उचित भागीदारी नहीं मिलेगी, तब तक आरक्षण का असली उद्देश्य अधूरा रहेगा।


आरक्षण में आरक्षण” क्यों जरूरी है?

ओमप्रकाश राजभर ने स्पष्ट रूप से कहा कि

“आरक्षण का फायदा सिर्फ कुछ खास जातियों तक ही सीमित रह गया है। OBC और SC के भीतर की सबसे पिछड़ी जातियों को लगातार हाशिए पर रखा जा रहा है। अब वक्त है कि कोटे के अंदर कोटा देकर हर वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया जाए।”

उनके मुताबिक, पंचायत चुनाव में यदि यह प्रणाली लागू की जाती है, तो पिछड़े, अति पिछड़े और सर्वाधिक पिछड़े वर्गों को नेतृत्व करने का वास्तविक अवसर मिलेगा।


मुख्यमंत्री को सौंपा गया प्रस्ताव, अब बात पहुंचेगी प्रधानमंत्री तक

मंत्री राजभर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष यह मांग उठाई, जिसे लेकर मुख्यमंत्री ने गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है। इसके बाद राजभर ने घोषणा की कि वे इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी जल्द मुलाकात करेंगे।

“यह केवल राजनीतिक मांग नहीं है, यह सामाजिक न्याय की लड़ाई है जिसे हम हर मंच पर उठाएंगे” — ओमप्रकाश राजभर


सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट: कोटे में वर्गीकरण की पृष्ठभूमि

ओमप्रकाश राजभर ने 2001 में राजनाथ सिंह सरकार द्वारा गठित सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि समिति ने OBC आरक्षण को तीन हिस्सों में बांटने की सिफारिश की थी:

  • 7% आरक्षण: पिछड़ी 16 जातियों को
  • 9% आरक्षण: अति पिछड़ी 32 जातियों को
  • 11% आरक्षण: सर्वाधिक पिछड़ी 57 जातियों को

यह रिपोर्ट वर्षों से धूल फांक रही है। मंत्री की मांग है कि इस रिपोर्ट के आधार पर पंचायत चुनावों में तत्काल प्रभाव से उपवर्गीकरण लागू किया जाए।


सुप्रीम कोर्ट का भी मिल चुका है समर्थन

ओमप्रकाश राजभर ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जातियों में भी उपवर्गीकरण को अनुमति दी है। इसके चलते SC आरक्षण के भीतर भी वर्गीकरण की संभावना बनती है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा अब संवैधानिक और नैतिक दोनों ही दृष्टि से महत्वपूर्ण बन चुका है।


“चुनिंदा जातियों का वर्चस्व टूटे, तभी सबका साथ-सबका विकास” – ओपी राजभर

राजभर ने कहा कि आज OBC और SC को मिला आरक्षण कुछ ही जातियों के कब्जे में है। इसके चलते समाज के सबसे कमजोर तबके को राजनीति और प्रशासन में उचित भागीदारी नहीं मिल रही।

“हमारी कोशिश है कि पंचायत स्तर से लेकर विधान सभा और लोकसभा तक हर जाति को उसका हक मिले।”


कानून बनाने की जरूरत: विधानसभा में प्रस्ताव लाने की मांग

ओमप्रकाश राजभर का कहना है कि पंचायत चुनावों में “कोटे में कोटा” लागू करने के लिए विधानमंडल में प्रस्ताव लाकर कानून बनाना आवश्यक होगा। उन्होंने इस पर समर्थन जुटाने के लिए सभी दलों से अपील की है।


सुभासपा का समर्थन: समाजवादी विचारधारा को बढ़ावा

मुलाकात के दौरान सुभासपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अरुण राजभर भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि यह मांग केवल सुभासपा की नहीं बल्कि पूरे पिछड़े, दलित और हाशिये के समाज की है।


क्या कहता है राजनीतिक विश्लेषण?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुद्दा उत्तर प्रदेश के 2025 पंचायत चुनावों से लेकर 2027 विधानसभा चुनावों तक में एक “बड़ा सामाजिक मुद्दा” बन सकता है। अगर यह मांग राजनीतिक समर्थन पाती है, तो BJP, SP, BSP समेत हर दल को अपने जातीय समीकरणों पर फिर से विचार करना पड़ेगा।


निष्कर्ष: क्या हाशिये के वर्गों को मिलेगा हक़?

मंत्री ओपी राजभर की यह पहल पंचायत चुनाव में सच्चे सामाजिक न्याय और समावेशी प्रतिनिधित्व की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम मानी जा रही है। अब देखना है कि योगी सरकार और केंद्र सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।


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