Breaking News : गौतमबुद्ध नगर में तीसरी फैमिली क्लीनिक की शुरुआत, टूटते रिश्तों को जोड़ने और परिवारों में खुशहाली लाने को नई पहल, पुलिस-पब्लिक पार्टनरशिप _ विश्वास का नया पुल, पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने दिया संदेश – रिश्तों को बचाना ही असली सेवा

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
गौतमबुद्ध नगर में बढ़ते पारिवारिक विवादों और वैवाहिक कलह को देखते हुए पुलिस कमिश्नरेट ने एक और सराहनीय कदम उठाया है। बुधवार को पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने थाना बिसरख क्षेत्र की चैरी काउंटी चौकी में फैमिली डिस्प्यूट रेज़ॉल्यूशन क्लिनिक (FDRC) की तीसरी इकाई का शुभारंभ किया। इस केंद्र की स्थापना गलगोटिया विश्वविद्यालय के सहयोग से की गई है।
यह पहल केवल पुलिसिंग का हिस्सा नहीं है, बल्कि सामाजिक स्थिरता और मानवीय रिश्तों को बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने दिया संदेश – रिश्तों को बचाना ही असली सेवा
उद्घाटन अवसर पर पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने कहा,
“परिवार समाज की सबसे बुनियादी इकाई है। अगर परिवार टूटते हैं तो उसका असर पूरे समाज पर पड़ता है। यह केंद्र रिश्तों को बचाने का एक प्रभावी माध्यम साबित होगा।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस केंद्र में न केवल कानूनी सलाहकार होंगे, बल्कि मनोवैज्ञानिक और व्यवहार विज्ञान विशेषज्ञों की टीम भी परिवारों की मदद करेगी।
इसका मकसद है कि पति-पत्नी या अन्य पारिवारिक सदस्यों के बीच चल रहे विवाद को बातचीत, समझाइश और मध्यस्थता के ज़रिए हल किया जाए।
MOU पर हुआ हस्ताक्षर – पुलिस और शिक्षा संस्थान का साझेदारी मॉडल
इस अवसर पर महिला सुरक्षा एसीपी और गलगोटिया विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार के बीच एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर हुए।
इसके तहत विश्वविद्यालय विशेषज्ञों और रिसोर्सेज़ के रूप में सहयोग देगा, वहीं पुलिस प्रशासन इस सुविधा को आमजन तक पहुँचाने का काम करेगा।
इस साझेदारी को पुलिस-पब्लिक सहयोग का एक आदर्श उदाहरण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों की टीम – कानूनी ही नहीं, भावनात्मक समाधान भी
FDRC केंद्रों की सबसे बड़ी ताकत उनकी विशेषज्ञ टीम है।
यहाँ मौजूद लीगल एक्सपर्ट्स, मनोवैज्ञानिक और व्यवहार विशेषज्ञ विवादित मामलों की गहराई से पड़ताल करेंगे।
दोनों पक्षों को बराबर का समय और सम्मान मिलेगा।
केवल कानूनी समाधान ही नहीं, बल्कि मानसिक, भावनात्मक और व्यवहारिक स्तर पर भी परिवारों को संतुलित करने की कोशिश होगी।

विशेषज्ञ समय-समय पर वर्कशॉप्स और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करेंगे, ताकि समाज में घरेलू हिंसा, दहेज, नशाखोरी और अन्य सामाजिक कुरीतियों को कम किया जा सके।
पहले दो केंद्रों की सफलता – हजारों परिवारों को मिला नया जीवन
गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट में पहले से ही दो फैमिली क्लीनिक सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं:
1. थाना नॉलेज पार्क – शारदा विश्वविद्यालय के सहयोग से।
2. सेक्टर-108 थाना क्षेत्र – एमिटी विश्वविद्यालय के सहयोग से।
इन दोनों केंद्रों के जरिये अब तक हजारों टूटते परिवारों को दोबारा जोड़ने में सफलता मिली है।
बहुत से ऐसे मामले सामने आए, जिनमें तलाक की नौबत तक पहुँच चुके रिश्ते केवल संवाद और काउंसलिंग के जरिए संभल गए।
पुलिस-पब्लिक पार्टनरशिप – विश्वास का नया पुल
FDRC न केवल एक क्लीनिक है, बल्कि यह पुलिस और जनता के बीच विश्वास का पुल भी बन रहा है।
आमतौर पर लोग पुलिस से डरते हैं या औपचारिकता मानते हैं, लेकिन इस पहल से एक सकारात्मक छवि सामने आ रही है। यहाँ आने वाले लोग पुलिस को सख्त नहीं, बल्कि मित्र और सहयोगी के रूप में देख पा रहे हैं।
यह पहल समाज को केवल कानूनी मजबूती ही नहीं देती, बल्कि भावनात्मक सहारा और सामाजिक मजबूती भी प्रदान करती है।
समाज में स्थिरता की दिशा में नया अध्याय
पुलिस कमिश्नरेट का मानना है कि अगर छोटे-छोटे विवाद समय रहते सुलझा दिए जाएं तो:
घर टूटने से बच सकते हैं।
बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सकता है। महिलाओं पर मानसिक और शारीरिक बोझ कम होगा।
समाज में शांति और स्थिरता बनी रहेगी। यही वजह है कि FDRC को एक सार्थक सामाजिक सुधार अभियान के रूप में देखा जा रहा है।
भविष्य की योजना – हर थाने तक फैलेगा नेटवर्क
सूत्रों के अनुसार पुलिस कमिश्नरेट की योजना है कि आने वाले समय में हर थाने में इस तरह के फैमिली क्लीनिक स्थापित किए जाएं।
ताकि पारिवारिक विवादों के लिए कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने की बजाय, लोग स्थानीय स्तर पर समाधान पा सकें।
विशेषज्ञों की राय – काउंसलिंग ही है असली समाधान
मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर पारिवारिक विवाद गलतफहमियों, संवादहीनता और अहंकार के कारण होते हैं।
जब दोनों पक्ष शांत माहौल में बैठकर अपनी बातें साझा करते हैं तो 70% मामलों में विवाद आसानी से हल हो जाता है। FDRC का उद्देश्य यही है – संवाद, समझदारी और सहयोग के जरिए रिश्तों में मिठास वापस लाना।



