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GD Goenka School News : “डिजिटल दुनिया में सतर्कता ही सुरक्षा है”, जी. डी. गोयनका पब्लिक स्कूल ग्रेटर नोएडा में हुआ साइबर सुरक्षा जागरूकता सत्र, विद्यार्थियों ने सीखे डिजिटल बचाव के गुर!, “Hack-Proof Your World” – डिजिटल सुरक्षा की तरफ एक सार्थक कदम, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए भी सबक


ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के इस युग में डिजिटल सुरक्षा अब केवल बड़ों की जिम्मेदारी नहीं रह गई है, बल्कि छोटे बच्चों के लिए भी यह एक अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है। इसी सोच के साथ जी. डी. गोयनका पब्लिक स्कूल, स्वर्ण नगरी, ग्रेटर नोएडा ने 10 जुलाई 2025 को कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए एक विशेष साइबर सुरक्षा जागरूकता सत्र का आयोजन किया। इस ज्ञानवर्धक सत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों को साइबर अपराधों से बचाव के व्यावहारिक उपाय सिखाना था, ताकि वे इंटरनेट की दुनिया में सुरक्षित और जागरूक रह सकें।


“Hack-Proof Your World” – डिजिटल सुरक्षा की तरफ एक सार्थक कदम

इस सत्र को बेहद दिलचस्प नाम दिया गया – “Hack-Proof Your World”, जिसका उद्देश्य था बच्चों को साइबर खतरों से अवगत कराना और डिजिटल सतर्कता की दिशा में पहला मजबूत कदम उठाना।
कार्यक्रम की शुरुआत एक प्रेरणादायक उद्घाटन भाषण से हुई, जिसमें विद्यार्थियों को बताया गया कि इंटरनेट एक शानदार माध्यम है सीखने, जुड़ने और आगे बढ़ने का, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी और सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है।


प्रोजेक्टर पर हुए प्रेजेंटेशन ने बच्चों को दिखाया साइबर संसार का सच

सत्र में प्रस्तुतकर्ता ने प्रोजेक्टर के माध्यम से विद्यार्थियों को रोचक उदाहरणों और केस स्टडीज के जरिये यह समझाया कि साइबर अपराध क्या होते हैं, और किस तरह बिना जाने अनजाने में भी लोग इसका शिकार हो सकते हैं।
पासवर्ड सुरक्षा, सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने के खतरों, फिशिंग अटैक, मैलवेयर, और ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े जोखिमों पर व्यावहारिक समझ और सरल भाषा में संवाद किया गया।


विद्यार्थियों ने सीखा – “सोशल मीडिया पर सोच समझकर करें पोस्ट”

सत्र में एक अहम बिंदु यह भी था कि सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को पोस्ट करने से पहले हमें यह विचार करना चाहिए कि कहीं वह किसी गलत व्यक्ति के हाथ में न चली जाए।
सत्र में बताया गया कि कैसे छोटे से फोटो, वीडियो या पर्सनल अपडेट को हैकर्स शिकार बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
“सोचें, समझें और फिर शेयर करें” – यही मंत्र दिया गया।


पासवर्ड बनाएं अपना डिजिटल कवच

बच्चों को यह भी सिखाया गया कि पासवर्ड केवल एक शब्द नहीं बल्कि एक सुरक्षा कवच है।
वक्ताओं ने बताया कि कैसे मजबूत पासवर्ड बनाना चाहिए – जिसमें अक्षर, अंक और विशेष चिन्हों का मिश्रण हो, जो अनुमान लगाना मुश्किल हो।
साथ ही यह भी समझाया गया कि पासवर्ड को कभी किसी के साथ साझा न करें, चाहे वह दोस्त ही क्यों न हो।


फिशिंग से रहें सावधान: “फ्री गिफ्ट” नहीं, फंसाने का ट्रैप हो सकता है!

कार्यक्रम में फिशिंग के बारे में विस्तार से बताया गया। बच्चों को दिखाया गया कि कैसे फर्जी ईमेल और लिंक के जरिये हैकर्स उनकी जानकारी चुरा सकते हैं।
“कभी भी किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, कोई भी संदिग्ध ईमेल तुरंत टीचर या पैरेंट्स को दिखाएं” – यह बच्चों को सिखाया गया डिजिटल सजगता का मूल मंत्र।


छात्रों ने भी पूछे सवाल, बताया डिजिटल दुनिया में उनके अनुभव

कार्यक्रम के अंत में ओपन इंटरेक्टिव सेशन का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों ने खुले दिल से सवाल पूछे – जैसे कि:

“क्या पब्लिक वाईफाई सुरक्षित होता है?”

“अगर मुझे कोई ऑनलाइन धमकी दे तो मैं क्या करूं?”

“क्या गेमिंग ऐप्स भी वायरस फैला सकते हैं?”

वक्ताओं ने हर प्रश्न का उत्तर सरल और व्यावहारिक भाषा में दिया, जिससे बच्चों की जिज्ञासा और समझ दोनों को बल मिला।


जी. डी. गोयनका स्कूल का उद्देश्य – जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनाना

विद्यालय प्रशासन का कहना था कि आज जब बच्चे कम उम्र से ही स्मार्टफोन, लैपटॉप और इंटरनेट से जुड़ जाते हैं, तो उन्हें डिजिटल एथिक्स और साइबर सेफ्टी की शिक्षा देना उतना ही जरूरी हो गया है जितना गणित या विज्ञान सिखाना।
इसलिए स्कूल का उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं, बल्कि छात्रों को जिम्मेदार, सतर्क और जागरूक नागरिक बनाना है – डिजिटल और सामाजिक दोनों रूपों में।


शिक्षकों और अभिभावकों के लिए भी सबक

कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों और स्टाफ ने भी माना कि इस तरह के सत्र न केवल बच्चों के लिए, बल्कि बड़ों के लिए भी बेहद आवश्यक हैं।
बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर नजर रखना, समय-समय पर उनसे संवाद करना और उन्हें साइबर अपराध के संभावित खतरों से आगाह करना हर अभिभावक की जिम्मेदारी है।


डिजिटल सुरक्षा को बनाया जाए जीवनशैली का हिस्सा

इस पूरे सत्र का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह था कि साइबर सुरक्षा कोई एक दिन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह हमारी दैनिक आदतों का हिस्सा बननी चाहिए।
हर क्लिक से पहले सोचना, हर लॉगिन को दो बार जांचना और हर शेयर को सावधानी से करना ही आज के युग का डिजिटल धर्म है।


निष्कर्ष: सतर्कता ही बचाव है, जागरूकता ही सुरक्षा है

जी. डी. गोयनका पब्लिक स्कूल, स्वर्ण नगरी, ग्रेटर नोएडा का यह प्रयास एक उदाहरण है, कि कैसे आज के स्कूल पढ़ाई के साथ-साथ जीवन कौशल पर भी उतना ही जोर दे रहे हैं।
“Hack-Proof Your World” अभियान ने बच्चों को न केवल ज्ञान दिया, बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने की प्रेरणा भी दी।
ऐसे प्रयास यदि हर स्कूल में हों, तो हमारा देश साइबर अपराधों से मुक्त एक स्मार्ट, सतर्क और सुरक्षित डिजिटल समाज की ओर बढ़ सकता है।


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