GL Bajaj College News : “बारिश, जाम और बेरुखी, जीएल बजाज कॉलेज के गेट पर अटक गई उम्मीदें, परीक्षा से वंचित 20+ छात्र हुए मायूस”, "पांच मिनट की देरी ने छीन लिया परीक्षा का हक", वायरल वीडियो से उभरी संवेदनाओं की तस्वीर

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
बारिश, जाम और मानवीय संवेदनाओं की अनदेखी – यह त्रासदी झेली उन 20 से अधिक छात्रों ने, जो अपनी डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (AKTU) की सेमेस्टर परीक्षा देने पहुंचे थे लेकिन 5 मिनट की देरी उनकी पूरे सेमेस्टर की मेहनत पर भारी पड़ गई।
मामला ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क स्थित जीएल बजाज कॉलेज का है, जिसे विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा केंद्र बनाया गया था। परीक्षा देने पहुंचे छात्रों का कहना है कि मूसलधार बारिश, एक्सीडेंट और ट्रैफिक जाम के कारण वह समय पर कॉलेज नहीं पहुंच सके, लेकिन जब उन्होंने गार्ड और प्रशासन से विनती की, तब भी उन्हें कक्ष में प्रवेश नहीं दिया गया।
“पांच मिनट की देरी ने छीन लिया परीक्षा का हक”
छात्रों का आरोप है कि उन्हें कॉलेज में घुसने से रोका गया, न गेट खोला गया और न ही कोई सुनवाई हुई।
केसीसी कॉलेज के ये छात्र जीएल बजाज में आयोजित परीक्षा देने आए थे। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में छात्र ने बताया कि:
“मैं एक एक्सीडेंट का शिकार हो गया, हाथ-पैर में चोट है, बारिश में भीगते हुए आया, लेकिन पांच मिनट लेट होने के कारण मुझे अंदर नहीं जाने दिया गया। गार्ड से गुहार लगाई, पर उन्होंने कहा – ‘जो करना है कर लो।’”
“बेरुखी और बदतमीजी”: छात्रों का सीधा आरोप
एक अन्य छात्र ने दावा किया कि जब उन्होंने कॉलेज स्टाफ से विनती की, तो उन्हें झिड़क दिया गया।
कुछ छात्रों का कहना है कि गार्ड्स ने बदतमीजी की और गेट पर ही डांटकर भगा दिया। कोई शिक्षक या सीनियर अधिकारी बात करने तक सामने नहीं आए।
छात्रों की व्यथा देखकर कई अभिभावकों ने भी सवाल उठाए हैं –
“क्या शिक्षा संस्थान के गेट पर इंसानियत भी मर चुकी है?”
वायरल वीडियो से उभरी संवेदनाओं की तस्वीर
छात्रों में से एक ने घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें कई छात्र गेट के बाहर मायूस खड़े नजर आ रहे हैं। वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि कुछ छात्रों के चेहरे पर चोट के निशान हैं और सभी बारिश से भीग चुके थे।
“हम कोई अपराधी नहीं हैं। हम सिर्फ परीक्षा देने आए थे। नियम अपनी जगह हैं, लेकिन क्या इंसानियत की कोई जगह नहीं?” — छात्र की भावुक अपील।
कॉलेज का पक्ष: नियमों की दुहाई
जीएल बजाज कॉलेज की मीडिया प्रभारी आरती का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा:
“सभी छात्र परीक्षा शुरू होने के कम से कम 10 मिनट बाद आए थे। नियम के मुताबिक, परीक्षा प्रारंभ होने के बाद किसी को प्रवेश नहीं दिया जा सकता। छात्रों को समय से पहले आने की हिदायत दी गई थी।”
प्रश्न यह नहीं कि नियम क्या कहते हैं, प्रश्न यह है कि क्या अपवादों की कोई गुंजाइश होनी चाहिए थी?
शिक्षाविदों की राय: नियम जरूरी, पर मानवीय दृष्टिकोण भी ज़रूरी
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि:
- परीक्षा केंद्रों पर समय की पाबंदी अति आवश्यक है।
- लेकिन यदि देरी वास्तविक और अपरिहार्य कारणों से हो, तो उसे मानवीय आधार पर देखा जाना चाहिए।
- छात्रों का भविष्य केवल 5 मिनट की देरी से तबाह नहीं होना चाहिए।
“संस्थानों को तकनीकीता से अधिक संवेदनशीलता दिखाने की ज़रूरत है।” — एक वरिष्ठ प्रोफेसर
छात्रों की मांग: दोबारा परीक्षा या विशेष अनुमति
छात्रों और उनके अभिभावकों ने मांग की है कि:
- जिन छात्रों की परीक्षा छूट गई है, उन्हें विशेष अनुमति देकर दोबारा परीक्षा देने का अवसर दिया जाए।
- इस घटना की स्वतंत्र जांच कराई जाए कि क्या कॉलेज स्टाफ द्वारा अनुचित व्यवहार किया गया।
- छात्रों की परेशानियों को लेकर विश्वविद्यालय स्तर पर भी संवेदनशील दिशा-निर्देश तैयार किए जाएं।
कहां चूकी व्यवस्था?
- परीक्षा केंद्रों पर सुबह के वक्त छात्रों के लिए ट्रैफिक व वेदर अलर्ट की कोई व्यवस्था नहीं।
- स्टाफ की ट्रेनिंग मानवीय व्यवहार पर नहीं दी जाती।
- कोई ग्रेस टाइम विंडो (जैसे 5 मिनट तक की अनुमति) का स्पष्ट नियम नहीं होता।
क्या शिक्षा व्यवस्था में इंसानियत के लिए कोई जगह नहीं बची?
विषय से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| परीक्षा केंद्र | जीएल बजाज कॉलेज, नॉलेज पार्क |
| छात्र संख्या | 20+ छात्र परीक्षा से वंचित |
| कारण | 5–10 मिनट की देरी (बारिश, ट्रैफिक, एक्सीडेंट) |
| परीक्षा आयोजक | डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय |
| वीडियो वायरल | छात्रों द्वारा सोशल मीडिया पर |
| कॉलेज पक्ष | 10 मिनट बाद प्रवेश नहीं नियम के अनुसार |
रफ़्तार टुडे की अपील:
शिक्षा का अधिकार केवल नियमों में नहीं, संवेदना और समर्पण में भी निहित होता है।
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