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Illegal Bhumafia News : ग्रेटर नोएडा में भूमाफियाओं पर गिरी बुलडोज़र की गाज!, तुगलपुर के डूब क्षेत्र से 40,000 वर्ग मीटर भूमि मुक्त, अवैध निर्माण जमींदोज़, प्राधिकरण की बड़ी कार्रवाई, अवैध निर्माणों पर चला बुलडोज़र, भूमाफिया पर प्रहार, एनजीटी के निर्देशों का सख्ती से पालन, 15 दिन की मोहलत, फिर सीधा एक्शन

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने शनिवार को एक बड़ी और सख्त कार्रवाई करते हुए ग्राम तुगलपुर के डूब क्षेत्र में फैले करीब 40,000 वर्ग मीटर भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया। यह क्षेत्र लंबे समय से भूमाफियाओं के कब्जे में था, जिन्होंने यहाँ गैरकानूनी तरीके से निर्माण शुरू कर दिए थे।
अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुमित यादव के निर्देश पर, महाप्रबंधक ए.के. सिंह और ओएसडी रामनयन के नेतृत्व में यह कार्रवाई अंजाम दी गई। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल और प्राधिकरण की पूरी टीम मौजूद रही।

भूमाफिया पर प्रहार, एनजीटी के निर्देशों का सख्ती से पालन

प्राधिकरण के अधिकारियों ने साफ कहा कि यह कार्रवाई एनजीटी (National Green Tribunal) के निर्देशों के तहत की गई है। डूब क्षेत्र यानी बाढ़ प्रभावित या जलभराव योग्य क्षेत्रों में किसी भी तरह का निर्माण कार्य पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
अधिकारियों ने बताया कि कुछ भूमाफिया सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर अवैध कॉलोनियों की बिक्री कर रहे थे, जिससे भोले-भाले लोग ठगी का शिकार हो रहे थे।
अब ऐसे लोगों पर न केवल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है, बल्कि आपराधिक मुकदमे दर्ज करने की भी प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।

15 दिन की मोहलत, फिर सीधा एक्शन

महाप्रबंधक (परियोजना) ए.के. सिंह ने बताया कि जिन मकानों में फिलहाल लोग रह रहे हैं, उन्हें 15 दिन का नोटिस दिया गया है ताकि वे स्वयं अपनी संरचनाएं खाली कर सकें।
उन्होंने कहा कि अगर समय सीमा के बाद भी निर्माण खाली नहीं किया गया, तो प्राधिकरण बुलडोज़र से ध्वस्त करेगा और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
साथ ही, जो भी व्यक्ति या एजेंट इन अवैध निर्माणों में सहयोग कर रहे हैं, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और उनकी सम्पत्ति जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू होगी।

डूब क्षेत्र में निर्माण पर सख्त पाबंदी — पर्यावरण की सुरक्षा सर्वोपरि

प्राधिकरण के अधिकारियों ने दोहराया कि डूब क्षेत्र में निर्माण न केवल अवैध है बल्कि पर्यावरण और जल संरक्षण के लिए भी हानिकारक है।
इस क्षेत्र में अवैध निर्माण से जल प्रवाह रुकने और बाढ़ के दौरान खतरा बढ़ने की आशंका रहती है। इसलिए ऐसे निर्माणों को रोकना जरूरी है।
प्राधिकरण ने चेतावनी दी कि आगे भी हर हफ्ते विशेष अभियान चलाकर ऐसे निर्माणों को गिराया जाएगा ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति डूब क्षेत्र की भूमि पर कब्जा करने की हिम्मत न कर सके।

ऑनलाइन प्रचार करने वाले एजेंटों पर निगरानी तेज

जानकारी के अनुसार, कुछ भूमाफिया और बिचौलिए सोशल मीडिया विज्ञापनों के माध्यम से लोगों को यह दिखा रहे थे कि तुगलपुर में “नए प्लॉट” मिल रहे हैं। इन विज्ञापनों को देखकर कई लोग लालच में फंस गए और बिना वैध दस्तावेज़ जांचे पैसे दे बैठे। अब प्राधिकरण की साइबर टीम ऐसे ऑनलाइन विज्ञापनों की निगरानी कर रही है और जो भी लोग फर्जी प्रमोशन या अवैध कॉलोनियों की बिक्री करते पाए गए, उनके खिलाफ आईटी एक्ट और रेरा कानून के तहत कार्रवाई होगी।

पुलिस की सख्त मौजूदगी में हुआ ध्वस्तीकरण, तनावपूर्ण माहौल भी बना

कार्रवाई के दौरान मौके पर पुलिस बल की भारी तैनाती की गई थी ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
कई स्थानों पर भूमाफियाओं और स्थानीय लोगों के बीच कहासुनी भी हुई, लेकिन पुलिस और प्रशासन की सख्ती के आगे किसी की एक नहीं चली।
करीब तीन घंटे चले इस अभियान में 40,000 वर्ग मीटर क्षेत्र पूरी तरह से खाली कराया गया, जिससे प्राधिकरण की जमीन पुनः सरकारी नियंत्रण में आ गई।

प्राधिकरण के अधिकारी बोले – “डूब क्षेत्र रहेगा हरियाली का प्रतीक, अवैधता नहीं”

अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुमित यादव ने कहा “ग्रेटर नोएडा को हम एक सस्टेनेबल और सुरक्षित शहर बनाना चाहते हैं। डूब क्षेत्र हरियाली और पर्यावरण के संरक्षण का प्रतीक रहेगा, न कि अवैध निर्माणों का अड्डा।”

उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी और यदि कोई भी व्यक्ति डूब क्षेत्र या हरित क्षेत्र में निर्माण करेगा, तो उसकी संपत्ति को तुरंत ध्वस्त कर दिया जाएगा।

जनता के लिए बड़ा संदेश – प्लॉट खरीदने से पहले जांच लें वैधता

प्राधिकरण ने नागरिकों को भी सावधान किया है कि किसी भी व्यक्ति से प्लॉट या कॉलोनी खरीदने से पहले उसकी वैधता की जांच करें। प्राधिकरण की वेबसाइट पर सभी स्वीकृत प्रोजेक्ट्स की सूची उपलब्ध है, जिसे देखकर ही कोई सौदा करें।
इस तरह की कार्रवाइयों का उद्देश्य न केवल अवैध निर्माण रोकना है, बल्कि लोगों को धोखाधड़ी से बचाना भी है।

समापन: स्वच्छ, सुरक्षित और संगठित ग्रेटर नोएडा की दिशा में कदम

तुगलपुर में हुई यह कार्रवाई केवल एक अभियान नहीं बल्कि एक संदेश है कि ग्रेटर नोएडा अब कानून के शासन से चलेगा, न कि भूमाफियाओं की मनमानी से। 40,000 वर्ग मीटर भूमि को मुक्त कराकर प्राधिकरण ने यह साबित कर दिया कि डूब क्षेत्र को बचाने की प्रतिबद्धता केवल कागज़ पर नहीं बल्कि ज़मीन पर भी है।

खसरा नंबर 703 और आसपास के अवैध ढांचे हुए जमींदोज़

सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई मुख्य रूप से खसरा नंबर 703 और इसके आसपास के भूभाग पर केंद्रित रही, जहां भूमाफियाओं ने बेतहाशा अवैध निर्माण कर रखा था। इन निर्माणों में कुछ अधूरे भवन, बाउंड्री वॉल, और छोटे-छोटे प्लॉट्स में विभाजित अवैध कॉलोनियों के ढांचे शामिल थे।

प्राधिकरण की टीम ने जेसीबी मशीनों से सभी निर्माणों को ध्वस्त कर दिया और पूरे इलाके को फिर से चिन्हित कर अपने नियंत्रण में ले लिया। कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पुलिस बल की तैनाती भी की गई थी।

डूब क्षेत्र में निर्माण पर सख्त प्रतिबंध, एनजीटी के निर्देशों का पालन

प्राधिकरण के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह क्षेत्र एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेशों के अंतर्गत आने वाले डूब क्षेत्र (Flood Zone) में शामिल है, जहां किसी भी प्रकार का निर्माण करना कानूनी अपराध है।

महाप्रबंधक (परियोजना) ए.के. सिंह ने कहा “डूब क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। जो भी व्यक्ति इसमें संलिप्त पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। यह भूमि पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील है और इसका अतिक्रमण जलभराव एवं प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म देता है।”

रफ़्तार टुडे की न्यूज़
Raftar Today
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