Breaking News : गौतमबुद्ध नगर को मिली पहली महिला जिलाधिकारी, मेधा रूपम ने संभाला कार्यभार, बोलीं “जनता से खुला संवाद होगा, समस्याओं का होगा जमीनी समाधान”, किसानों और कब्जा प्रकरणों पर बोले डीएम, संवाद से सुलझेगा हर मुद्दा, प्राधिकरण का अनुभव प्रशासनिक निर्णयों में आएगा काम

ग्रेटर नोएडा, रफ्तार टुडे।
गौतमबुद्ध नगर के प्रशासनिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। पहली बार जिले को महिला जिलाधिकारी मिली हैं। तेजतर्रार और जमीन से जुड़ी कार्यशैली के लिए पहचानी जाने वाली IAS अधिकारी मेधा रूपम ने बुधवार को सूरजपुर स्थित कलेक्ट्रेट कार्यालय में गौतमबुद्ध नगर की डीएम के रूप में अपना कार्यभार संभाल लिया।
पूर्व जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने उन्हें चार्ज सौंपते हुए शुभकामनाएं दीं। वहीं, जिलेभर से प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक प्रतिनिधि और कर्मचारी उन्हें बधाई देने पहुंचे।
जनता से जुड़ाव ही होगी प्राथमिकता: डीएम मेधा रूपम
चार्ज संभालने के बाद मीडिया से बातचीत में डीएम मेधा रूपम ने साफ कहा कि –
“कलेक्ट्रेट के दरवाजे जनता के लिए हमेशा खुले रहेंगे। किसानों, महिलाओं, युवाओं और छात्रों की समस्याओं को प्राथमिकता से निपटाया जाएगा। कोई भी व्यक्ति अपनी परेशानी लेकर बेहिचक मेरे पास आ सकता है।”
उन्होंने कहा कि उनका फोकस रहेगा कि समस्याओं को कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनका जमीनी समाधान सुनिश्चित किया जाए।

किसानों और कब्जा प्रकरणों पर बोले डीएम: संवाद से सुलझेगा हर मुद्दा
मेधा रूपम ने बताया कि किसानों के जमीनी विवाद, कब्जों और मुआवज़े से जुड़े मुद्दे जिले के महत्वपूर्ण विषय हैं।
“मैं पहले ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में ACEO के रूप में कार्य कर चुकी हूं, इसलिए क्षेत्र की समस्याएं मेरे लिए नई नहीं हैं। किसानों से संवाद ही समाधान का रास्ता है, सभी विवादों को बातचीत से निपटाया जाएगा।”
प्राधिकरण का अनुभव प्रशासनिक निर्णयों में आएगा काम
डीएम ने कहा कि ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में एसीईओ रहते हुए उन्होंने विकास योजनाओं से लेकर भूमि विवाद तक, कई अहम प्रकरण देखे हैं।
“प्राधिकरण की भूमिका एक तरह की थी, जबकि डीएम का कार्य क्षेत्र व्यापक है। अब जिम्मेदारी ज़्यादा बड़ी है और मुझे उम्मीद है कि पहले के अनुभवों से मैं ज़िले के विकास और जनसमस्याओं के समाधान में और बेहतर योगदान दे पाऊंगी।”
महिला नेतृत्व के आगमन से नई उम्मीदें
मेधा रूपम का गौतमबुद्ध नगर की पहली महिला डीएम बनना जिले के लिए गौरव की बात है। उनके नेतृत्व में प्रशासनिक कार्यशैली में पारदर्शिता, संवेदनशीलता और कार्यकुशलता की नई मिसाल कायम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
कौन हैं मेधा रूपम?
- भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) 2013 बैच की अधिकारी हैं।
- इससे पहले कासगंज की जिलाधिकारी रह चुकी हैं।
- ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में ACEO के रूप में कार्य कर चुकी हैं, जहां उन्होंने कई बड़े फैसलों में भूमिका निभाई।
- तेज़ निर्णय लेने, जन संवाद और प्रशासनिक दक्षता के लिए जानी जाती हैं।

गौतमबुद्धनगर की पहली महिला डीएम बनी मेधा रूपम: एक प्रेरणादायक प्रशासनिक सफर
उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में 23 आईएएस अधिकारियों के तबादले किए, जिनमें 2014 बैच की तेजतर्रार आईएएस अधिकारी मेधा रूपम को गौतमबुद्धनगर (नोएडा) का नया जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है। गौतमबुद्धनगर के वर्ष 1997 में स्थापना के बाद से पिछले 28 वर्षों में मेधा रूपम पहली महिला डीएम बनी है। इससे पहले वह कासगंज जिले की डीएम थीं। मेधा रूपम का प्रशासनिक सफर न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि उनकी उपलब्धियां और बहुमुखी प्रतिभा उन्हें एक असाधारण अधिकारी बनाती हैं। आइए, उनके अब तक के सफर पर एक नजर डालते हैं।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
DM मेधा रूपम का जन्म 21 अक्टूबर 1990 को आगरा, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनके पिता, ज्ञानेश कुमार, जो वर्तमान में देश के चुनाव आयुक्त हैं, केरल कैडर के आईएएस अधिकारी रह चुके हैं। मेधा की प्रारंभिक शिक्षा केरल में हुई, जहां उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद, उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। उनकी शैक्षिक पृष्ठभूमि और अनुशासित पारिवारिक माहौल ने उन्हें सिविल सेवा की ओर प्रेरित किया। उनके पति मनीष बंसल सहारनपुर के डीएम हैं। दोनों ही अपने बैच के टॉपरों में रहे हैं।
शूटिंग में राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियां
मेधा रूपम केवल एक कुशल प्रशासक ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की राइफल शूटर भी हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक शूटिंग खिलाड़ी के रूप में की थी। केरल स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में उन्होंने तीन स्वर्ण पदक जीते और राज्य का रिकॉर्ड भी तोड़ा। इसके अलावा, मेरठ में एक शूटिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपने पुराने हुनर को फिर से साबित किया। उनकी यह उपलब्धियां उनके समर्पण और अनुशासन को दर्शाती हैं।

यूपीएससी में शानदार प्रदर्शन
DM मेधा ने 2013 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 10वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और समाज का नाम रोशन किया। 2014 बैच की आईएएस अधिकारी के रूप में उनकी पहली नियुक्ति बरेली में सहायक मजिस्ट्रेट के रूप में हुई। शुरू से ही उन्होंने अपनी कार्यकुशलता और जन-केंद्रित दृष्टिकोण से अपनी पहचान बनाई।प्रशासनिक सफर
मेधा रूपम का प्रशासनिक करियर विविध और प्रभावशाली रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं, जिनमें शामिल हैं:
बरेली (सहायक मजिस्ट्रेट): मेधा की पहली पोस्टिंग बरेली में थी, जहां उन्होंने प्रशासनिक कार्यों की बारीकियां सीखीं और अपने करियर की मजबूत नींव रखी।
बाराबंकी (मुख्य विकास अधिकारी): यहां उन्होंने विकास योजनाओं को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हापुड़ (जिलाधिकारी): हापुड़ में डीएम के रूप में मेधा ने शानदार कार्य किया, जिसकी सराहना स्थानीय स्तर पर खूब हुई।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण (अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी, फरवरी 2023): इस दौरान उन्होंने जेवर एयरपोर्ट और इंटरनेशनल फिल्म सिटी जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम किया, जिससे क्षेत्र में विकास को गति मिली।
कासगंज (जिलाधिकारी, जून 2024 – जुलाई 2025): कासगंज में डीएम के रूप में उन्होंने प्रशासनिक कार्यों को कुशलता से संभाला और जनता के बीच अपनी सकारात्मक छवि बनाई।
ग्रेटर नोएडा में प्रशासनिक सशक्तिकरण का नया अध्याय शुरू
डीएम मेधा रूपम के आने से जनता और प्रशासन के बीच संवाद और विश्वास की एक नई परंपरा शुरू होने की उम्मीद है। किसानों, महिलाओं, छात्रों और युवाओं को अब उम्मीद है कि उनकी आवाज़ सीधे डीएम तक पहुंचेगी – और मिलेगा तेज़, प्रभावी और मानवीय समाधान।
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