Viajy Ramlila News : श्रीराम के राजतिलक की घोषणा से देवताओं में मची हलचल, मंथरा की बुद्धि फेरने पहुंचीं देवी सरस्वती, रामलीला महोत्सव में गूंजा केवट प्रसंग, गंगा पार कराने वाला भावुक दृश्य बना आकर्षण, मुख्य अतिथि आईएएस शैलेन्द्र भाटिया NIAL, प्रायोजक SVG ग्रुप अंकुर मित्तल समेत कई गणमान्य लोगों ने दीप प्रज्वलित कर भगवान श्रीराम के चित्र पर माल्यार्पण किया

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। ग्रेटर नोएडा सांस्कृतिक जीवन में रंग भरने वाले विजय महोत्सव 2025 के मंचन दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ गया। इस दिन का मुख्य आकर्षण रहा केवट प्रसंग, जिसमें प्रभु श्रीराम, माता सीता और भाई लक्ष्मण को नाव में बैठाकर गंगा पार कराई जाती है। यह प्रसंग सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं रखता बल्कि इंसानियत, सेवा और आस्था के गहरे संदेश से भी जुड़ा है। मुख्य अतिथि आईएएस शैलेन्द्र भाटिया (नोडल ऑफिसर NIAL), भाजपा जिला अध्यक्ष अभिषेक शर्मा, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष वीरेंद्र ढाढा, अजीत दोला, योगेन्द्र भाटी, भगवत प्रशाद शर्मा मीडिया प्रभारी भाजपा समेत प्रायोजक SVG ग्रुप अंकुर मित्तल गणमान्य लोगों ने दीप प्रज्वलित कर भगवान श्रीराम के चित्र पर माल्यार्पण किया।
राम के राज्याभिषेक की घोषणा और देवताओं की चिंता
रामलीला के मंचन में जब राजा दशरथ श्रीराम के राजतिलक की घोषणा करते हैं, तो देवताओं के बीच चिंता बढ़ जाती है। मंचन के दौरान दिखाया गया कि देवगण आपसी विचार-विमर्श कर देवी सरस्वती को मंथरा की मति फेरने भेजते हैं। देवी सरस्वती मंथरा के कंठ में प्रवेश करती हैं, जिससे वह रानी कैकयी को भड़काती है।
कैकयी राजा दशरथ से दो वरदान मांगती है—
- श्रीराम को चौदह वर्ष का वनवास
- भरत को राजतिलक
इस प्रसंग में राजा दशरथ को शांतनु ऋषि का श्राप याद आता है, जिसमें कहा गया था कि वह भी पुत्र-वियोग में प्राण त्याग देंगे। इसी भावुक मंचन में दशरथ श्रीराम के वियोग में अपने प्राण त्याग देते हैं।
केवट प्रसंग: भक्ति और सेवा की जीवंत मिसाल
मंच पर जैसे ही केवट और श्रीराम का संवाद शुरू हुआ, पूरा पंडाल तालियों और जयकारों से गूंज उठा। केवट का प्रभु से आग्रह कि “प्रभु! पहले मेरे पैर धोए बिना मैं नाव में नहीं बिठाऊंगा” – इस भावुक क्षण ने हर किसी की आंखें नम कर दीं। रामायण के इस दृश्य को कलाकारों ने इतने जीवंत ढंग से प्रस्तुत किया कि ऐसा लगा मानो सचमुच त्रेतायुग का दृश्य आंखों के सामने उतर आया हो।
गंगा तट पर केवट प्रसंग ने जीता दर्शकों का मन
महासचिव बिजेंद्र सिंह आर्य ने बताया कि श्रीराम जब वनवास के लिए अयोध्या से निकलते हैं, तो गंगा तट पर पहुंचते हैं। वहां केवट उनके चरण धुलकर उन्हें गंगा पार कराता है। इसके बाद श्रीराम भारद्वाज ऋषि का आशीर्वाद लेकर वन की ओर प्रस्थान करते हैं।
दूसरी ओर भरत जब अयोध्या लौटते हैं और राम के वनवास का समाचार सुनते हैं, तो वे माता कैकयी से क्रोधित होकर उन्हें कठोर वचन कहते हैं। इसके बाद भरत श्रीराम को मनाने वन की ओर जाते हैं।
अगले मंचन में दिखेगा सीता हरण और राम-वियोग
संयुक्त महासचिव सौरभ बंसल ने जानकारी दी कि 29 सितंबर को मंचन में नारद–सुपर्णखा संवाद, सीता हरण, राम-वियोग और जटायु मरण जैसे महत्वपूर्ण प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे। दर्शकों को इन दृश्यों का बेसब्री से इंतजार है।
कलाकारों की दमदार प्रस्तुति ने बांधा समां
श्रीराम, सीता, लक्ष्मण और केवट की भूमिकाओं में उतरे कलाकारों ने अपनी अदाकारी से माहौल भक्तिमय बना दिया। विशेष रूप से केवट की भूमिका निभाने वाले कलाकार की सरल वाणी और भावपूर्ण संवाद शैली ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंचन के दौरान ध्वनि-प्रकाश (लाइट एंड साउंड) की सजगता और संगीत की मधुरता ने इस प्रसंग को और भी शानदार बना दिया।

दर्शकों की भावनाएं और जयकारों की गूंज
रामलीला मैदान में हजारों की भीड़ ने इस प्रसंग को देख “जय श्रीराम” और “सीताराम की जय” के नारों से वातावरण को गुंजायमान कर दिया। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक हर कोई इस दृश्य को देखकर भावविभोर हो गया। कई दर्शकों ने बताया कि केवट प्रसंग हमेशा से ही रामायण का सबसे मार्मिक और प्रेरणादायक हिस्सा रहा है।
मेले का आकर्षण और 20 वर्षों की परंपरा
मीडिया प्रभारी विनोद कसाना ने बताया कि श्रीरामलीला कमेटी पिछले 20 वर्षों से विजय महोत्सव रामलीला मंचन का आयोजन कर रही है। हर साल इसमें कुछ नया जोड़ने की कोशिश होती है। इस बार का मंच NCR का सबसे बड़ा स्टेज है। पहले 50 फीट का धनुष और 55 फीट की हाइट पर उसका खंडन दर्शकों को दिखाया गया था।
साथ ही, इस बार एक भव्य मेला भी लगाया गया है, जिसमें खाने-पीने के स्टॉल, घरेलू सामान की दुकानें, बच्चों के लिए झूले, सर्कस और जादू के शो शामिल हैं। सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं।
सामाजिक और धार्मिक संदेश भी मिला
इस मंचन ने केवल मनोरंजन नहीं किया बल्कि यह संदेश भी दिया कि भक्ति और सेवा सबसे बड़ा धर्म है। केवट का बिना किसी स्वार्थ के प्रभु की सेवा करना यह दिखाता है कि सच्ची आस्था में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होता। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में यह प्रसंग लोगों को सच्ची निष्ठा और सेवा भाव का महत्व भी समझाता है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में बनेगी सांस्कृतिक पहचान
पिछले कई वर्षों से यहां आयोजित हो रही श्रीरामलीला अब ग्रेटर नोएडा वेस्ट की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है। यहां के आयोजन को न सिर्फ स्थानीय लोग बल्कि आस-पास के जिलों से भी लोग देखने आते हैं। आयोजकों का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी रोमांचक प्रसंग मंचित किए जाएंगे, जिनमें भगवान श्रीराम के वनवास, रावण वध और राम राज्याभिषेक जैसे दृश्य शामिल होंगे।
आयोजकों और कलाकारों का सम्मान
महोत्सव समिति ने मंचन के बाद कलाकारों और तकनीकी सहयोगियों का सम्मान किया। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन सामाजिक एकता और सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

लोगों की बढ़ती आस्था और भीड़ का उत्साह
श्रीरामलीला महोत्सव में लगातार बढ़ रही भीड़ यह दर्शाती है कि आज भी लोग धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के प्रति गहरी आस्था रखते हैं। बच्चों ने मंचन से प्रेरणा ली, वहीं युवाओं ने इसे एक धार्मिक शिक्षा और सांस्कृतिक जुड़ाव का माध्यम बताया।
आने वाले दिनों का इंतजार
दर्शकों को अब अगले दिनों में होने वाले राम-भरत मिलाप, सीता-हरण और रावण वध जैसे महत्त्वपूर्ण प्रसंगों का बेसब्री से इंतजार है। आयोजक समिति ने वादा किया है कि हर दिन का मंचन पिछले दिन से अधिक आकर्षक और प्रभावशाली होगा।
आयोजन में मौजूद रहे गणमान्य
कार्यक्रम में अध्यक्ष मनजीत सिंह, बिजेंद्र सिंह आर्य, धर्मपाल भाटी, मनोज गर्ग, सौरभ बंसल, विनोद कसाना, ओमप्रकाश अग्रवाल, कुलदीप शर्मा, मुकेश शर्मा, के.के. शर्मा, हरेन्द्र भाटी, मुकुल गोयल, अमित गोयल, अतुल जिंदल, गिरीश जिंदल, श्यामवीर भाटी, श्रीचंद भाटी, मनोज यादव, सुभाष चंदेल, सुनील प्रधान, अनुज उपाध्याय, अतुल जैन, अरुण गुप्ता, अंकुर गर्ग, गजेंद्र चौधरी, विशाल जैन, दीपक भाटी, राहुल नम्बरदार, प्रभाकर देशमुख, विकास आर्य, रिंकू आर्य, प्रमोश मास्टर समेत अनेक सदस्य उपस्थित रहे।



