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Noida Aashram News : “नोएडा की धरती पर अरबों का ‘मौन महाघोटाला’!, महर्षि आश्रम की जमीन पर बस गया पूरा ‘अवैध शहर’, ED की जांच के बीच भी धड़ल्ले से बिक रहे करोड़ों के प्लॉट और फ्लैट”, सेक्टर-110 का महर्षि आश्रम बना नोएडा के सबसे बड़े भूमि विवाद का केंद्र, भू-माफिया, बिल्डर, अफसर और राजनीतिक रसूखदारों की कथित सांठगांठ पर उठे बड़े सवाल

नोएडा, रफ़्तार टूडे। देश की सबसे महंगी और चर्चित रियल एस्टेट बेल्ट में शामिल नोएडा एक बार फिर कथित अरबों रुपये के भूमि घोटाले को लेकर सुर्खियों में है। इस बार चर्चा का केंद्र बना है सेक्टर-110 स्थित महर्षि आश्रम की विशाल और बेशकीमती जमीन, जहां कथित रूप से वर्षों से अवैध कब्जे, फर्जी दस्तावेजों, अवैध प्लॉटिंग और बहुमंजिला निर्माण का खेल चलता रहा है। अब यह मामला केवल स्थानीय विवाद नहीं रहा, बल्कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच तक पहुंच चुका है। इसके बावजूद आरोप है कि जमीनों की खरीद-फरोख्त और निर्माण कार्य अब भी धड़ल्ले से जारी हैं।

“मोती गोयल कांड से भी बड़ा घोटाला!”—जानकारों का बड़ा दावा
नोएडा और ग्रेटर नोएडा के इतिहास में कई बड़े जमीन घोटाले सामने आए हैं। शहर के पुराने रियल एस्टेट जानकारों का कहना है कि सेक्टर-110 स्थित महर्षि आश्रम की जमीन का विवाद अब तक के सबसे बड़े भूमि घोटालों में शामिल हो सकता है। विशेषज्ञों का दावा है कि जिस स्तर पर यहां अवैध प्लॉटिंग और निर्माण हुआ है, वह नोएडा के चर्चित भू-माफिया मोती गोयल प्रकरण से भी बड़ा मामला बन सकता है।
बताया जा रहा है कि अरबों रुपये मूल्य की इस जमीन पर धीरे-धीरे पूरा “अनधिकृत शहर” खड़ा कर दिया गया। कई जगहों पर बहुमंजिला इमारतें, फ्लैट, विला, कॉमर्शियल स्पेस और अवैध कॉलोनियां विकसित कर दी गईं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब शहर के बीचोंबीच और प्रशासन की आंखों के सामने होता रहा।

महर्षि आश्रम की जमीन पर कैसे शुरू हुआ खेल?
सूत्रों और जांच एजेंसियों से जुड़ी जानकारी के अनुसार, महर्षि आश्रम की अधिकांश जमीन “स्पिरिचुअल रिजनेरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया ट्रस्ट” के नाम पर दर्ज बताई जाती है। आरोप है कि इसी ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जीवाड़े की शुरुआत हुई। ED की जांच में सामने आया कि रामचन्द्र मोहन नामक व्यक्ति ने खुद को ट्रस्ट का कोषाध्यक्ष बताकर कई संदिग्ध सौदे किए। बाद में जांच एजेंसी ने रामचन्द्र मोहन और उसके सहयोगी आकाश मालवीय को गिरफ्तार भी किया। माना जा रहा है कि यही गिरफ्तारी पूरे घोटाले की परतें खोलने की शुरुआत बनी।

ED की एंट्री के बाद मचा हड़कंप, अब प्राधिकरण पर भी नजर
इस मामले में ED की सक्रियता के बाद नोएडा के रियल एस्टेट जगत में हलचल तेज हो गई है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में जमीन पर कब्जे, निर्माण और बिक्री कैसे होती रही।
सूत्रों के मुताबिक जांच की दिशा अब नोएडा प्राधिकरण की ओर भी बढ़ रही है। जांच एजेंसियों को शक है कि बिना प्रशासनिक संरक्षण या मिलीभगत के इतने बड़े पैमाने पर निर्माण संभव नहीं हो सकता। ऐसे में कई पूर्व और वर्तमान अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

ED जांच के बावजूद जारी है अवैध निर्माण का खेल
स्थानीय नागरिकों और आसपास रहने वाले लोगों का दावा है कि जांच एजेंसियों की सक्रियता के बावजूद सेक्टर-110 और आसपास के इलाकों में अवैध प्लॉटिंग और निर्माण बंद नहीं हुआ है। लोगों का कहना है कि रात-दिन जमीनों पर कब्जे कर प्लॉट काटे जा रहे हैं और करोड़ों रुपये में बेचे जा रहे हैं। कई स्थानों पर 8 से 10 मंजिला इमारतें खड़ी कर दी गई हैं। आरोप है कि कुछ भूखंडों पर बिना वैध स्वीकृति के फ्लैट और विला बनाए गए, जबकि कुछ जगहों पर व्यावसायिक गतिविधियां भी शुरू हो चुकी हैं।

स्कूल की जमीन पर बना मॉल? स्थानीय लोग उठा रहे गंभीर सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि महर्षि आश्रम के निकट एक स्कूल से जुड़ी जमीन पर भी अवैध कब्जा कर निर्माण कर दिया गया। वहां अब बड़े व्यावसायिक ढांचे और मॉल जैसी गतिविधियां संचालित होने की चर्चा है।
इन आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था और जमीनों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।

“पहले निर्माण होने दो, फिर कह दो लोग बस गए” — यही रहा खेल?
रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े जानकारों का आरोप है कि कई मामलों में पहले अवैध निर्माण को नजरअंदाज किया जाता है। जब पूरी बिल्डिंग या कॉलोनी तैयार हो जाती है और लोग वहां रहने लगते हैं, तब कार्रवाई करने में प्रशासन पीछे हट जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यही पैटर्न महर्षि आश्रम की जमीन पर भी देखने को मिला। आरोप है कि भू-माफियाओं और बिल्डरों ने कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर पहले निर्माण कराया और बाद में स्थिति को “मानवीय समस्या” बताकर कार्रवाई टाल दी गई।

नोएडा की जमीन बनी ‘सोने की खान’
सेक्टर-110 और आसपास का इलाका आज नोएडा की सबसे महंगी लोकेशनों में गिना जाता है। यहां जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं। ऐसे में आरोप है कि अवैध कब्जों और फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों नहीं बल्कि अरबों रुपये का खेल खेला गया। रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच हो, तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल—क्या होगा बड़ा एक्शन?
शहर में अब चर्चा इस बात की है कि क्या ED की जांच केवल कुछ गिरफ्तारियों तक सीमित रहेगी या फिर इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होगा?
क्या नोएडा प्राधिकरण के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी?
क्या अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई तय करेगी।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

Raftar Today
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