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Breaking News : “40% फीस बढ़ाकर शिक्षा नहीं, अभिभावकों की जेब पर डाला बोझ!”, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में द विजडम ट्री स्कूल के बाहर फूटा गुस्सा, पोस्टर-बैनर लेकर सड़क पर उतरे पैरेंट्स, डीएम के आदेश के बावजूद फीस वृद्धि से बढ़ा विवाद, स्कूल के बाहर लगे पोस्टर, गूंजे नारे

ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में शिक्षा के नाम पर फीस वृद्धि को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नामी निजी स्कूल द विजडम ट्री स्कूल द्वारा कथित तौर पर करीब 40 प्रतिशत तक फीस बढ़ाए जाने के बाद अभिभावकों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया। सोमवार सुबह स्कूल के बाहर बड़ी संख्या में पैरेंट्स हाथों में पोस्टर, बैनर और मांग पत्र लेकर जमा हो गए और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने जिला प्रशासन और फीस नियामक समिति के निर्देशों को नजरअंदाज करते हुए मनमाने तरीके से फीस बढ़ा दी, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ गया है।

बच्चों की पढ़ाई या घर का बजट?” — परेशान अभिभावकों ने उठाए सवाल
प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों का कहना था कि पहले ही महंगाई चरम पर है, ऐसे में एक साथ 40 प्रतिशत फीस बढ़ोतरी किसी झटके से कम नहीं है। कई अभिभावकों ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि बच्चों की पढ़ाई जारी रखें या परिवार का मासिक बजट संभालें।
एक अभिभावक ने नाराजगी जताते हुए कहा—
“स्कूल शिक्षा दे रहा है या व्यापार चला रहा है? हर साल मनमानी फीस बढ़ा दी जाती है। इस बार तो सारी सीमाएं ही पार कर दी गईं।” दूसरे अभिभावक ने कहा कि स्कूल प्रबंधन ने फीस बढ़ाने से पहले न तो अभिभावकों से चर्चा की और न ही कोई स्पष्ट कारण बताया।


डीएम के आदेश के बावजूद फीस वृद्धि से बढ़ा विवाद
हाल ही में हुई फीस नियामक समिति की बैठक में डीएम मेधा रूपम ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि निजी स्कूल इस वर्ष अधिकतम 7 प्रतिशत तक ही फीस वृद्धि कर सकते हैं। जिला प्रशासन का उद्देश्य अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत देना था। अधिकांश स्कूलों ने इन निर्देशों का पालन भी किया, लेकिन आरोप है कि कुछ निजी स्कूलों ने नियमों को दरकिनार कर अत्यधिक फीस वृद्धि कर दी। द विजडम ट्री स्कूल पर आरोप है कि उसने प्रशासनिक दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए करीब 40 प्रतिशत तक फीस बढ़ा दी, जिससे पैरेंट्स में भारी आक्रोश फैल गया।

स्कूल के बाहर लगे पोस्टर, गूंजे नारे
सोमवार को स्कूल के बाहर प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने कई पोस्टर और तख्तियां हाथों में ले रखी थीं। इन पर लिखा था— “शिक्षा सेवा है, व्यापार नहीं”
“फीस वृद्धि वापस लो”
“बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करो”
“मनमानी नहीं चलेगी”
प्रदर्शन के दौरान “स्कूल प्रबंधन होश में आओ” और “फीस वृद्धि वापस लो” जैसे नारे भी लगाए गए। कुछ अभिभावकों ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और बड़ा किया जाएगा।

शिक्षा विभाग में भी पहुंची शिकायत
नाराज अभिभावकों ने मामले की शिकायत शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से भी की है। पैरेंट्स का कहना है कि यदि डीएम के आदेश के बावजूद स्कूल मनमानी कर रहे हैं, तो ऐसे स्कूलों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। अभिभावकों ने मांग की कि—
बढ़ाई गई फीस तुरंत वापस ली जाए
फीस निर्धारण की प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए
निजी स्कूलों की वित्तीय ऑडिट कराई जाए
प्रशासन नियमित निगरानी करे

“हर साल फीस बढ़ती है, सुविधाएं वही रहती हैं”
प्रदर्शन कर रहे कई अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल हर साल फीस बढ़ा देता है, लेकिन सुविधाओं में उसी अनुपात में सुधार नहीं होता।
कुछ अभिभावकों ने कहा कि—
ट्रांसपोर्ट फीस अलग से बढ़ाई जाती है
किताबें और यूनिफॉर्म तय दुकानों से खरीदने का दबाव रहता है
एक्टिविटी चार्ज और अन्य शुल्क भी लगातार बढ़ रहे हैं
उनका कहना था कि शिक्षा अब धीरे-धीरे मध्यम वर्ग की पहुंच से बाहर होती जा रही है।

निजी स्कूलों की फीस पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
गौरतलब है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में निजी स्कूलों की फीस वृद्धि का मुद्दा नया नहीं है। हर वर्ष अप्रैल सत्र शुरू होने से पहले फीस बढ़ोतरी को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। अभिभावक संगठनों का कहना है कि कई स्कूल शिक्षा के नाम पर भारी मुनाफाखोरी कर रहे हैं और प्रशासनिक आदेशों का भी पालन नहीं कर रहे।

“जरूरत पड़ी तो होगा बड़ा आंदोलन”
प्रदर्शनकारी अभिभावकों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। अभिभावकों का कहना है कि यह लड़ाई केवल एक स्कूल की नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की है जो बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

अब सबकी नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर
फिलहाल इस पूरे मामले में जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अभिभावकों को उम्मीद है कि प्रशासन स्कूल प्रबंधन से जवाब मांगेगा और फीस वृद्धि के मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में शिक्षा सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है, लेकिन यदि स्कूलों की फीस इसी तरह अनियंत्रित तरीके से बढ़ती रही तो इसका सबसे बड़ा असर आम परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

Raftar Today
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