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Jewar Airport News : ✈️ "जेवर एयरपोर्ट का तीसरा चरण, अब मगरौली के पास बसे गांव होंगे विस्थापित, सात गांवों की तकदीर बदलेगी रनवे के विस्तार के साथ", किसानों की चिंता और जमीन की दरें

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर के तीसरे चरण का विस्तार अब एक और बड़े सामाजिक-प्राकृतिक परिवर्तन का वाहक बनने जा रहा है। इस चरण में एयरपोर्ट के लिए थोरा, नीमका, बनवारीवास, रामनेर, किशोरपुर, खज्जारपुर और मगरौली समेत सात गांवों का विस्थापन तय किया गया है। मगरौली के पास 2,053 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण कर इस चरण का निर्माण किया जाएगा, जिसमें 1,857.77 हेक्टेयर भूमि किसानों की निजी संपत्ति होगी।


विस्तार का वैज्ञानिक गणना पर आधारित खाका

स्विट्जरलैंड की एआर एंड टी कंसल्टेंसी ने वैज्ञानिक गणना पर आधारित रिपोर्ट सौंपी, जिसमें तय किया गया कि एयरपोर्ट के तीसरे चरण के लिए कितनी और कौन-कौन सी जमीनें अधिग्रहित की जाएंगी। यह प्रक्रिया 11 जुलाई तक पूरी होगी, जिसके लिए 4 से 11 जुलाई के बीच प्रभावित गांवों में लोकसुनवाई आयोजित की जाएगी।


विस्थापन के आंकड़े और गांवों का भूगोल

  • प्रस्तावित 14 गांवों में से सात गांव पहले चरण में ही अधिग्रहित हो चुके हैं।
  • तीसरे चरण के लिए 7 नए गांव जोड़े गए हैं, जिनमें कुल 17,945 परिवार प्रभावित होंगे।
  • इनमें से 14,600 परिवारों को स्थायी रूप से विस्थापित होना होगा।
  • प्रशासन के अनुसार करीब 50% क्षेत्र विकासित भूमि होगा जबकि बाकी एयरपोर्ट और एयरपोर्ट से संबंधित सुविधाओं के लिए उपयोग में लाया जाएगा।

किस प्रकार होगा तीसरे चरण का उपयोग?

एयरपोर्ट के इस विस्तार चरण में:

  • रनवे की लंबाई बढ़ाई जाएगी।
  • मालवाहक टर्मिनल, लॉजिस्टिक्स हब, एयर कार्गो जोन और रखरखाव केंद्र (MRO Hub) विकसित किए जाएंगे।
  • आसपास एयरपोर्ट-लिंक्ड इकोनॉमिक ज़ोन और हाउसिंग ज़ोन भी बनाए जाएंगे।

क्या कहते हैं अधिकारी?

जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि, “तीसरे चरण में 24 घंटे के भीतर लोकसुनवाई और आपत्ति दर्ज की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। हम हर प्रभावित परिवार से संवाद करेंगे ताकि विस्थापन प्रक्रिया पारदर्शी और समुचित हो।”

वहीं, यमुना प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी अरुणवीर सिंह ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि विस्थापित परिवारों को केवल मुआवज़ा ही नहीं, बल्कि पुनर्वास और आजीविका के बेहतर विकल्प भी दिए जाएं।”


किसानों की चिंता और जमीन की दरें

किसानों का कहना है कि:

  • उन्हें जमीन का वाजिब मुआवज़ा मिले।
  • पुनर्वास के लिए शहरी सुविधाओं वाली कॉलोनियां तैयार की जाएं।
  • बच्चों की शिक्षा और परिवार के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

प्रशासन की ओर से दावा किया गया है कि मुआवजा दरों की गणना सर्किल रेट से चार गुना और बाजार दरों से यथासंभव मेल करते हुए की जा रही है।


मगरौली गांव का विशेष महत्व

मगरौली गांव को तीसरे चरण का केंद्र माना जा रहा है। यहां से एयरपोर्ट का विस्तार अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं के निर्माण के रूप में किया जाएगा। इसका उद्देश्य भविष्य में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को दिल्ली-एनसीआर का सबसे बड़ा एविएशन और लॉजिस्टिक हब बनाना है।


क्या है जेवर एयरपोर्ट का अब तक का रोडमैप?

  • पहला चरण: 1334 हेक्टेयर भूमि पर काम पूरा, 2024 के अंत तक उड़ान शुरू होने की उम्मीद।
  • दूसरा चरण: भूमि अधिग्रहण पूरा, निर्माण कार्य प्रगति पर।
  • तीसरा चरण: अब इन सात गांवों में विस्थापन व अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू।

कुल आंकड़े तीसरे चरण के

बिंदुविवरण
कुल भूमि2,053 हेक्टेयर
निजी भूमि1,857.77 हेक्टेयर
गांवों की संख्या7
प्रभावित परिवार17,945
विस्थापित परिवार14,600
लोकसुनवाई की तिथि4 से 11 जुलाई 2025

स्थल पर दिखने लगे परिवर्तन

जमीनी सर्वे शुरू हो चुका है। जगह-जगह बाउंड्री मार्किंग, ड्रोन सर्वे, और GIS मैपिंग से प्लॉट चिन्हित किए जा रहे हैं। प्रशासन की टीमें गांवों में जाकर किसानों से संपर्क कर रही हैं और आपत्तियों को नोट किया जा रहा है।


क्या मिलेगा विस्थापित परिवारों को?

  • प्लॉट का विकल्प (500 वर्ग मीटर तक)
  • नगद मुआवजा (सरकारी दरों के अनुसार)
  • पुनर्वास कॉलोनी में घर
  • बेरोजगारी भत्ता व व्यवसायिक प्लॉट
  • बच्चों की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं

2041 तक तैयार होगा पूरा एयरपोर्ट

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को चार चरणों में तैयार किया जा रहा है। 2023-2041 की समयसीमा तय की गई है। वर्ष 2041 तक यह एयरपोर्ट न सिर्फ दिल्ली बल्कि साउथ एशिया का सबसे बड़ा मल्टी-नोडल एविएशन हब बनकर उभरेगा।


निष्कर्ष: एक शहर का सपना, कई गांवों की कुर्बानी

विकास की उड़ान का सपना लिए यह एयरपोर्ट धीरे-धीरे अपने पंख फैला रहा है। मगर इसके पीछे सैकड़ों वर्षों से बसें बस्तियां, संस्कृति, परंपराएं और कृषि आधारित जीवनशैली मिट रही हैं। प्रशासन और सरकार की जिम्मेदारी है कि विकास की इस गाथा में समानता, न्याय और संवेदनशीलता को प्राथमिकता दी जाए।


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