Uttarakhand Mahakauthig 2025 : नोएडा बना ‘मिनी उत्तराखंड’ महाकौथिग 2025 के तीसरे दिन उमड़ा जनसैलाब, लोकगीतों पर झूमे दर्शक, चौथे दिन उत्तराखंडी नृत्य-नाटिकाओं ने बांधा समां, पहाड़ी स्वाद और खरीदारी का आकर्षण, पर्वतीय कला संगम दिल्ली बना विजेता

नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा स्टेडियम में आयोजित 15वें उत्तराखंड महाकौथिग 2025 ने अपने तीसरे और चौथे दिन संस्कृति, संगीत और परंपरा का ऐसा रंग बिखेरा कि पूरा परिसर सचमुच ‘मिनी उत्तराखंड’ में तब्दील हो गया। पहाड़ की माटी की खुशबू, लोकगीतों की गूंज, नृत्य-नाटिकाओं की जीवंत प्रस्तुति और पहाड़ी व्यंजनों की महक के बीच हजारों की संख्या में पहुंचे प्रवासी उत्तराखंडियों और दिल्ली-एनसीआर के दर्शकों ने महाकौथिग को यादगार बना दिया।
तीसरे दिन शाम को उमड़ा जनसैलाब, स्टेडियम हुआ
खचाखचरविवार की छुट्टी का लाभ उठाते हुए तीसरे दिन सुबह से ही दर्शकों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। शाम होते-होते नोएडा स्टेडियम दर्शकों से खचाखच भर गया। हर ओर उत्तराखंड की पारंपरिक वेशभूषा, लोकसंस्कृति और उत्साह का नज़ारा देखने को मिला।तीसरे दिन की शाम पूरी तरह लोक गायक किशन महिपाल, लोक गायिका रेशमा शाह और लोक गायक कैलाश कुमार के नाम रही। तीनों कलाकारों ने एक से बढ़कर एक लोकप्रिय पहाड़ी गीत प्रस्तुत कर दर्शकों को जमकर झुमाया। जैसे ही ढोल-दमाऊ और लोकसंगीत की धुनें गूंजीं, दर्शक अपनी सीटों पर टिक नहीं पाए और नाचते-गाते नजर आए।
लोकनृत्य और हास्य ने बढ़ाया रंग
किशन महिपाल के गीतों पर भगवत भागवत मनराल के नृत्य निर्देशन में पर्वतीय कला संगम की टीम ने शानदार नृत्य प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहा। वहीं उत्तराखंड के प्रसिद्ध हास्य कलाकार संदीप छिलबट ने अपने चुटीले व्यंग्य और पहाड़ी अंदाज़ की कॉमेडी से दर्शकों को खूब हंसाया।

शाम के सत्र का शुभारंभ वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने दीप प्रज्वलन कर किया। उन्होंने महाकौथिग के आयोजन की जमकर सराहना करते हुए कहा कि “आज नोएडा स्टेडियम में प्रवासी उत्तराखंडियों की इतनी बड़ी भीड़ देखकर ऐसा लग रहा है मानो पूरा नोएडा मिनी उत्तराखंड बन गया हो।” उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति, सरल स्वभाव और संघर्षशील जीवनशैली पर गर्व व्यक्त करते हुए गढ़वाली भाषा में एक कविता भी सुनाई, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया।
पहाड़ी स्वाद और खरीदारी का आकर्षण
महाकौथिग में लगाए गए करीब 180 स्टॉल्स भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। पहाड़ी उत्पाद, आभूषण, पारंपरिक पोशाकों के साथ-साथ पहाड़ी खानपान ने मेले की रौनक बढ़ा दी। लोगों ने झंगोरे की खीर, मंडवे की रोटी, घर्या चावल का भात, तोर की दाल और अन्य ठेठ पहाड़ी व्यंजनों का जमकर स्वाद लिया और जमकर खरीदारी की।
चौथे दिन की सुबह उत्तराखंडी नृत्य-नाटिकाओं के नाम
महाकौथिग के चौथे दिन का सुबह का सत्र पूरी तरह उत्तराखंडी नृत्य-नाटिका प्रतियोगिता को समर्पित रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि वंदना त्रिपाठी, एसीईओ, नोएडा अथॉरिटी द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि महाकौथिग जैसे आयोजन हमारी लोकसंस्कृति और धार्मिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखते हैं और उन्हें हर वर्ष इस मेले का बेसब्री से इंतजार रहता है।
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई, जिसके बाद ‘हम उत्तराखंडी छौं’, ‘माधो सिंह भंडारी’ और ‘तीलू रौतेली’ जैसी ऐतिहासिक और प्रेरणादायक नृत्य-नाटिकाओं की प्रस्तुतियां दी गईं। कलाकारों की भाव-भंगिमाओं, पारंपरिक परिधानों और मंच सज्जा ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

पर्वतीय कला संगम दिल्ली बना विजेता
उत्तराखंडी नृत्य-नाटिका प्रतियोगिता में कई टीमों ने भाग लिया, जिसमें पर्वतीय कला संगम, दिल्ली ने उत्कृष्ट प्रस्तुति देकर प्रथम स्थान प्राप्त किया। निर्णायकों और दर्शकों ने टीम की प्रस्तुति की जमकर सराहना की।
संस्कृति, एकता और पहचान का उत्सव
महाकौथिग केवल एक मेला नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति, पहचान और सामूहिक एकता का उत्सव बनकर सामने आया है। प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए यह आयोजन अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर है, वहीं नई पीढ़ी को अपनी लोकसंस्कृति से परिचित कराने का सशक्त माध्यम भी।
महाकौथिग के आगामी दिनों में भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रतियोगिताओं और लोककलाओं की धूम जारी रहने की उम्मीद है, जिससे नोएडा में उत्तराखंड की खुशबू यूं ही बिखरती रहेगी।



