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Noida Aryuvedic News : आयुर्वेद को मिली नई उड़ान नोएडा में “आयुर्नवदिशा” संगोष्ठी बनी नवाचार और वैज्ञानिक चिंतन का संगम, संस्कृत और आयुर्वेद का गहरा संबंध, डॉ. पल्लवी शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद और एलोपैथी को बताया पूरक

नोएडा, रफ़्तार टुडे। 10वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर गौतम बुद्ध नगर की धरती ने आयुर्वेद के क्षेत्र में इतिहास रचते हुए एक अनोखा आयोजन देखा। विश्व आयुर्वेद परिषद, उत्तर प्रदेश इकाई द्वारा आयोजित “आयुर्नवदिशा” एक दिवसीय वैज्ञानिक संगोष्ठी ने न केवल आयुर्वेद को नई दिशा दी बल्कि देशभर से आए विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों को भी एक साझा मंच पर जोड़ दिया।

दीप प्रज्वलन और धन्वंतरि वंदना से हुआ शुभारंभ

नोएडा सेक्टर 71 स्थित कैलाश अस्पताल में आयोजित इस संगोष्ठी का शुभारंभ दिव्य वातावरण में धन्वंतरि वंदना और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। शुरुआत से ही कार्यक्रम ने यह संकेत दे दिया कि यह केवल एक औपचारिक संगोष्ठी नहीं बल्कि आयुर्वेदिक ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा की साझेदारी का संगम बनने जा रहा है।

विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी मौजूदगी

इस अवसर पर देशभर से आए वरिष्ठ चिकित्सक और विशेषज्ञ मौजूद रहे। मुख्य अतिथियों में शामिल थे –

डॉ. महेश व्यास (डीन, पीएचडी, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, नई दिल्ली)

डॉ. प्रेमचंद शास्त्री (अध्यक्ष, संस्कृत भारती न्यास)

डॉ. पल्लवी शर्मा (डायरेक्टर, कैलाश ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स)

डॉ. सुरेन्द्र चौधरी (राष्ट्रीय सचिव, विश्व आयुर्वेद परिषद)

डॉ. प्रीति छाबड़ा (वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक, गंगाराम अस्पताल)

आयुर्वेद के मूल ग्रंथों पर जोर

अपने उद्घाटन भाषण में डॉ. महेश व्यास ने कहा कि आयुर्वेद को समझने और अपनाने के लिए हमें इसके मूल शास्त्रों – चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और अष्टांग हृदय – का गहन अध्ययन करना होगा। यही वे आधार हैं जो आयुर्वेद को विज्ञान और जीवन-दर्शन दोनों रूपों में स्थापित करते हैं।

आयुर्वेद और एलोपैथी को बताया पूरक – डॉ. पल्लवी शर्मा

डॉ. पल्लवी शर्मा ने कहा कि “आयुर्वेद और एलोपैथी विरोधी नहीं बल्कि पूरक चिकित्सा प्रणाली हैं। भविष्य का स्वास्थ्य तंत्र तभी मजबूत होगा जब दोनों का संतुलित उपयोग किया जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि कैलाश अस्पताल हमेशा ऐसे आयोजनों को सहयोग देता रहेगा ताकि मरीजों को समग्र स्वास्थ्य सेवा मिल सके।

संस्कृत और आयुर्वेद का गहरा संबंध

डॉ. प्रेमचंद शास्त्री ने आयुर्वेद की शिक्षा में संस्कृत भाषा की अनिवार्यता पर जोर दिया। उनका कहना था कि मूल ग्रंथों की गहराई तक पहुंचने के लिए संस्कृत का ज्ञान आवश्यक है।

आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों पर चर्चा

डॉ. प्रीति छाबड़ा ने आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न बीमारियों, विशेषकर महिलाओं में बढ़ते पीसीओडी और मानसिक रोगों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद इन रोगों का समग्र और दीर्घकालिक समाधान प्रदान करता है।

नई कार्यकारिणी का गठन

कार्यक्रम के दौरान विश्व आयुर्वेद परिषद, गौतम बुद्ध नगर इकाई की नई कार्यकारिणी की घोषणा की गई। इसमें –

डॉ. रूचि गुलाटी और डॉ. सत्यदेव आर्य – संरक्षक

डॉ. प्रीति सारस्वत – अध्यक्ष

डॉ. अमित अधाना – उपाध्यक्ष

डॉ. शुभम गर्ग – महासचिव

डॉ. अनुपमा शर्मा – सचिव

डॉ. अंशु शर्मा – कोषाध्यक्ष

डॉ. दीपिका अनिल – महिला प्रकोष्ठ प्रभारी

इस मौके पर डॉ. सुरेन्द्र चौधरी ने टीम को उनके सामाजिक दायित्वों और प्रचार-प्रसार की रणनीति पर मार्गदर्शन भी दिया।

आयुर्वेद को नई दिशा

“आयुर्नवदिशा” संगोष्ठी ने यह साबित कर दिया कि आयुर्वेद केवल परंपरा नहीं, बल्कि भविष्य की वैज्ञानिक स्वास्थ्य प्रणाली है। यह आयोजन आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा जगत में और अधिक प्रासंगिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

प्रमुख व्याख्यान और शोधपत्र प्रस्तुति

संगोष्ठी में तीन प्रमुख व्याख्यान हुए –

1. डॉ. रानी गुप्ता – “पीसीओडी के निदान व चिकित्सा”

2. डॉ. शादाब खान – “मानस रोग व आयुर्वेद चिकित्सा”

3. डॉ. सुरेन्द्र चौधरी – “आयुर्वेदाचार्य डिग्री के बाद संभावनाएं”

साथ ही शोधार्थियों द्वारा प्रस्तुत श्रेष्ठ शोधपत्रों को सम्मानित किया गया, जिससे युवाओं में शोध और नवाचार की प्रेरणा जागृत हुई।

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Raftar Today
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