Surajpur Ramleela News : सूरजपुर में श्री आदर्श रामलीला कमेटी का भूमि पूजन, विजय महोत्सव 2025 का आगाज़, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उल्लास का संगम, महासचिव सत्यपाल शर्मा का खुलासा "22 सितंबर से 2 अक्टूबर तक होगा आयोजन"

सूरजपुर, रफ़्तार टुडे।
सूरजपुर में इस वर्ष का विजय महोत्सव 2025 एक भव्य और ऐतिहासिक आयोजन बनने जा रहा है। इसकी शुरुआत आज दिनांक 31 अगस्त 2025 को हुई जब बाराही मंदिर रामलीला मैदान में श्री आदर्श रामलीला कमेटी सूरजपुर ने भूमि पूजन और हवन यज्ञ का आयोजन किया। इस अवसर पर पूरे क्षेत्र का वातावरण वेद मंत्रों की गूंज और आस्था की ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा। भूमि पूजन के साथ ही अब सूरजपुर में विजय महोत्सव की तैयारियों का बिगुल बज चुका है।
धर्म और संस्कृति का जीवंत संगम
सूरजपुर का विजय महोत्सव 2025 न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। भूमि पूजन के साथ इसकी शुरुआत ने यह संदेश दिया है कि जब समाज एकजुट होकर धर्म और संस्कृति को आगे बढ़ाता है, तो उत्सव और भक्ति की गंगा बह निकलती है।
भूमि पूजन में उमड़ी श्रद्धा और भक्ति की भीड़
भूमि पूजन कार्यक्रम में आचार्यों और पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ सम्पन्न कराया। मंच पर बैठकर श्रद्धालु हाथ जोड़कर मंत्रों की ध्वनि में लीन हो रहे थे। भूमि पूजन के समय हर किसी के चेहरे पर आस्था और उत्साह साफ झलक रहा था। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण रहा।
अध्यक्ष सत्यवीर सिंह भाटी का बड़ा ऐलान – “कलाकारों का चयन और तैयारियां पूरी”
कार्यक्रम में मौजूद श्री आदर्श रामलीला कमेटी के अध्यक्ष सत्यवीर सिंह भाटी ने बताया कि इस वर्ष की रामलीला मंचन की सभी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। कलाकारों का चयन कर लिया गया है और अब वे निरंतर अभ्यास में जुट चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस बार का मंचन पहले से अधिक भव्य, आकर्षक और शिक्षाप्रद होगा।
उन्होंने कहा कि रामलीला सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह आदर्श जीवन और धर्म की विजय का प्रतीक है। युवा पीढ़ी के लिए यह आयोजन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों को समझने का उत्तम अवसर प्रदान करेगा।
महासचिव सत्यपाल शर्मा का खुलासा – “22 सितंबर से 2 अक्टूबर तक होगा आयोजन”
रामलीला कमेटी के महासचिव सत्यपाल शर्मा ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष का रामलीला मंचन एवं विजय महोत्सव मेला 22 सितंबर 2025 से 2 अक्टूबर 2025 तक आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हर शाम हजारों श्रद्धालु और दर्शक रामलीला का आनंद लेंगे। कथा और मंचन का समय इस प्रकार तय किया गया है कि सभी वर्ग के लोग इसमें शामिल होकर अपनी आस्था को प्रकट कर सकें।
झूले, खेल और स्वादिष्ट व्यंजन – मेले में हर किसी के लिए कुछ खास
मेला केवल धार्मिक और सांस्कृतिक ही नहीं बल्कि मनोरंजन और खानपान का भी केंद्र होगा। मेले में बच्चों के लिए झूले, खेल और खिलौनों की दुकानें लगाई जाएंगी। वहीं हर उम्र के लोग यहां पर स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद ले सकेंगे।
रामलीला के साथ-साथ इस तरह का मेला परिवारों के लिए पिकनिक और उत्सव जैसा अनुभव प्रदान करता है। स्वादिष्ट समोसे, गोलगप्पे, चाट, मिठाई और दक्षिण भारतीय व्यंजन हर किसी के लिए आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
भूमि पूजन में मौजूद रही सामाजिक और धार्मिक हस्तियां
भूमि पूजन के मौके पर क्षेत्र की कई जानी-मानी हस्तियां मौजूद रहीं। इनमें प्रमुख रूप से –
ब्रह्मम गिरी महाराज, सोविन्द्र भाटी, जयदेव शर्मा, मूलचंद प्रधान, सत्यपाल शर्मा, छत्रपाल शर्मा, कर्मवीर आर्य, विनोद पंडित, लक्ष्मण सिंघल, भगत सिंह आर्य, केपी कसाना, जगवीर भाटी, हिर्देश भाटी, विशाल गोयल, प्रेमवीर शर्मा, मानकचंद शर्मा, रघुवीर JCB, बिजेन्द्र मुद्गल, रामअवतार गर्ग, चंदन शर्मा आदि शामिल रहे।
इन हस्तियों ने भूमि पूजन के दौरान अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज को जोड़ने और भारतीय संस्कृति की जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं।
विजय महोत्सव 2025 की विशेषताएं – क्यों खास है यह आयोजन?
स्थान : बाराही मंदिर रामलीला मैदान, सूरजपुर 22 सितंबर 2025 से 2 अक्टूबर 2025
आकर्षण : मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की लीलाओं का मंचन
धार्मिक वातावरण और भक्तिमय संगीत
बच्चों के लिए झूले और खिलौने
स्वादिष्ट व्यंजनों से सजे स्टॉल
सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का संगम
सूरजपुर में बढ़ी उत्सुकता और उत्साह
भूमि पूजन के बाद सूरजपुर में विजय महोत्सव 2025 के लिए लोगों की उत्सुकता और भी बढ़ गई है। हर गली-मोहल्ले में अब रामलीला और मेले की चर्चा होने लगी है। बच्चे उत्साहित हैं झूलों और खिलौनों को लेकर, वहीं महिलाएं धार्मिक वातावरण और मेले की रौनक के लिए उत्साहित हैं।
सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह आयोजन संपूर्ण क्षेत्र की पहचान है और इसे और भव्य रूप में देखा जाना चाहिए।



