शिव-पार्वती विवाह प्रसंग से गृहस्थ जीवन की सीख”
- ग्रेटर नोएडा
‘भक्ति की बयार में डूबा ग्रेटर नोएडा, श्री राम कथा में अमृत वाणी ने बांधा समां’, जीवन के हर रिश्ते और हरसमस्या का मिला समाधान”, शिव-पार्वती विवाह प्रसंग से गृहस्थ जीवन की सीख”
ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। आध्यात्मिक ऊर्जा, भक्ति और ज्ञान का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब Shri Dharmik Ramlila Committee के तत्वावधान में रामलीला मैदान, ऐछर बिरोड़ा सेक्टर पाई-1 में आयोजितश्री राम कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक Atul Krishna Bhardwaj की अमृतमयी वाणी ने कथा को ऐसा भावपूर्ण रूप दिया कि श्रोता पूरी तरह भक्ति में सराबोर नजर आए। “राम कथा का महात्म्य—पाप से पुण्य और मोक्ष तक का मार्ग” कथा के दूसरे दिन महाराज जी ने श्री राम कथा के अद्भुत महात्म्य का वर्णन करते हुए बताया कि यह केवल एकधार्मिक कथा नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शन है। उन्होंने समझाया कि किस प्रकार मनुष्यपाप कर्मों में उलझ जाता है और राम कथा के माध्यम से वह कैसे इन बंधनों से मुक्त होकर भवसागर से पार पासकता है। महाराज जी के अनुसार, राम कथा व्यक्ति के भीतर आत्मचिंतन और सुधार की प्रेरणा जगाती है। “शिव–पार्वती विवाह प्रसंग से गृहस्थ जीवन की सीख” कथा के दौरान माता पार्वती और भगवान शिव के विवाह प्रसंग को विस्तार से प्रस्तुत किया गया। इस प्रसंग के माध्यम से Shiva और Parvati के जीवन से प्रेरणा लेते हुए महाराज जी ने बताया कि एक आदर्शगृहस्थ जीवन कैसा होना चाहिए। उन्होंने यह भी समझाया कि किन बातों को परिवार में साझा करना चाहिए और किन बातों को गोपनीय रखनाबेहतर होता है, ताकि रिश्तों में संतुलन बना रहे। “रिश्तों का महत्व और जीवन के व्यवहारिक नियम” महाराज जी ने अपने प्रवचन में जीवन के कई व्यवहारिक नियमों को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा कि पिता, मित्र, स्वामी और गुरु के घर बिना बुलाए भी जाया जा सकता है, लेकिन किसी भी समारोहमें बिना निमंत्रण के जाना उचित नहीं होता। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि हर रिश्ते का अपना महत्वहोता है और उन्हें निभाने के लिए धैर्य, समझ और संवेदनशीलता आवश्यक है। “गृहस्थ जीवन में तनाव का समाधान—सरल और सटीक मार्गदर्शन” आज के भागदौड़ भरे जीवन में परिवारों के बीच बढ़ते तनाव पर भी महाराज जी ने विशेष रूप से प्रकाश डाला।उन्होंने बताया कि कैसे छोटे–छोटे मतभेद बड़े विवाद का रूप ले लेते हैं और इन्हें समय रहते संवाद और समझदारीसे सुलझाया जा सकता है।…
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