Breaking News : 25 साल का इंतजार, चार सरकारें, दर्जनों फाइलें और अनगिनत अड़चनें… आखिर उड़ान भरने जा रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, डॉ. महेश शर्मा की भूमिका रही निर्णायक, 150 किलोमीटर नियम हटाने में निभाई अहम भूमिका, राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक प्रयासों का परिणाम
डॉ. महेश शर्मा के केंद्रीय मंत्री बनने के बाद बढ़ी रफ्तार, 2017 के बाद योगी सरकार में तेजी से आगे बढ़ा काम, एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आयाम,

नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की पहली उड़ान के साथ ही एक ऐसा सपना साकार होने जा रहा है, जिसकी नींव करीब 25 वर्ष पहले रखी गई थी। यह सिर्फ एक एयरपोर्ट परियोजना नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक संघर्ष और वर्षों की जद्दोजहद की कहानी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हकीकत तक पहुंचाने में गौतमबुद्ध नगर के पूर्व सांसद एवं पूर्व केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री डॉ. महेश शर्मा की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फाइलों से बाहर निकलने में लग गए 25 साल
नोएडा एयरपोर्ट की अवधारणा वर्ष 2001 में सामने आई थी। इसके बाद परियोजना ने कई सरकारें देखीं, लेकिन लंबे समय तक यह योजना फाइलों में ही उलझी रही। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल की कमी, विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं और नियमों के कारण यह महत्वाकांक्षी परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई।
राजनीतिक बदलावों के बावजूद एयरपोर्ट का सपना अधूरा ही रहा और करीब 12 वर्षों तक यह परियोजना विभिन्न स्तरों पर अटकी रही। इस दौरान कई बार घोषणाएं हुईं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी।
डॉ. महेश शर्मा के केंद्रीय मंत्री बनने के बाद बढ़ी रफ्तार
वर्ष 2014 में केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद गौतमबुद्ध नगर से सांसद डॉ. महेश शर्मा को नागरिक उड्डयन मंत्रालय में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद नोएडा एयरपोर्ट परियोजना को गति देने के लिए गंभीर प्रयास शुरू हुए।
बताया जाता है कि डॉ. महेश शर्मा ने इस परियोजना से जुड़ी तमाम बाधाओं को दूर करने के लिए मंत्रालय स्तर पर लगातार प्रयास किए। उन्होंने स्वयं इस मामले को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लिया और परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को तेज कराया।
150 किलोमीटर नियम हटाने में निभाई अहम भूमिका
नोएडा एयरपोर्ट के सामने सबसे बड़ी बाधाओं में से एक वह नियम था, जिसके अनुसार इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 150 किलोमीटर के दायरे में दूसरा एयरपोर्ट विकसित करने की अनुमति नहीं थी।
सूत्रों के अनुसार, इस नियम में आवश्यक बदलाव कराने और परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए डॉ. महेश शर्मा ने केंद्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 2017 में साइट क्लीयरेंस दिलाने की दिशा में भी उनके प्रयासों को अहम माना जाता है। जिस कार्य को वर्षों तक पूरा नहीं किया जा सका था, वह कुछ वर्षों में आगे बढ़ने लगा।
2017 के बाद योगी सरकार में तेजी से आगे बढ़ा काम
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के गठन के बाद इस परियोजना को नई गति मिली। वर्ष 2017 से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया युद्धस्तर पर शुरू की गई। हालांकि शुरुआत में किसानों के मुआवजे और विस्थापन को लेकर कई तरह की चुनौतियां सामने आईं। उस समय जेवर के तत्कालीन विधायक धीरेंद्र सिंह, तत्कालीन जिलाधिकारी बीएन सिंह, यमुना प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह तथा एसीईओ शैलेंद्र भाटिया सहित कई अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने किसानों से संवाद स्थापित कर उन्हें परियोजना के लिए भूमि देने के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
बसपा सरकार में हुई थी शुरुआती घोषणा
नोएडा एयरपोर्ट परियोजना की शुरुआती घोषणा वर्ष 2002 में बहुजन समाज पार्टी की सरकार के दौरान की गई थी। हालांकि उस समय केंद्र और राज्य सरकारों के बीच अपेक्षित समन्वय नहीं होने के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।
इसके बाद सपा सरकार के कार्यकाल में भी यह योजना ठोस परिणाम तक नहीं पहुंच पाई और फाइलें मंत्रालयों के बीच घूमती रहीं। साइट क्लीयरेंस और अन्य स्वीकृतियों में लगातार देरी होती रही।
राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक प्रयासों का परिणाम
विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का निर्माण केवल एक आधारभूत ढांचा परियोजना नहीं, बल्कि यह विभिन्न सरकारों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
आज जब पहली उड़ान की तैयारियां अंतिम चरण में हैं, तब यह साफ दिखाई देता है कि वर्षों की बाधाओं, राजनीतिक मतभेदों और प्रशासनिक जटिलताओं को पार करते हुए यह परियोजना आखिरकार साकार होने जा रही है।
एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आयाम
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से न केवल गौतमबुद्ध नगर, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश, एनसीआर और आसपास के राज्यों को भी बड़ा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। रोजगार, निवेश, औद्योगिक विकास, पर्यटन और कनेक्टिविटी के नए अवसर खुलेंगे।
करीब ढाई दशक पहले देखा गया सपना अब वास्तविकता में बदलने जा रहा है और इसके साथ ही भारत के सबसे बड़े और आधुनिक एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स में शामिल जेवर एयरपोर्ट देश की नई विकास गाथा का प्रतीक बनने की ओर अग्रसर है।



