Breaking News : “यूजीसी कानून वापस लो” की गूंज से गूंजा डीएम दफ्तर, ब्राह्मण सभा का प्रदर्शन, प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, आंदोलन की चेतावनी से गरमाया माहौल, कानून पर पुनर्विचार की मांग, उत्पीड़न का हथियार बन सकता है कानून”

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। यूजीसी कानून को लेकर ग्रेटर नोएडा में रविवार को सियासी और सामाजिक हलचल तेज़ हो गई, जब ब्राह्मण सभा के बैनर तले बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता जिला मुख्यालय पहुंचे। डीएम कार्यालय के बाहर “कानून वापस लो” और “समानता बचाओ” जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। सभा ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित यूजीसी कानून समाज में असंतुलन पैदा करेगा और सामान्य वर्ग के हितों के खिलाफ है। प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया।
कानून पर पुनर्विचार की मांग
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि कोई भी कानून यदि समाज के एक वर्ग को असुरक्षित महसूस कराए तो उस पर गंभीर पुनर्विचार आवश्यक है। सभा के नेताओं का तर्क था कि यह अधिनियम एकपक्षीय प्रतीत होता है और इससे सामाजिक समरसता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
सभा के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे सरकार से टकराव नहीं चाहते, बल्कि संवाद के माध्यम से समाधान चाहते हैं। उनका मानना है कि कानून निर्माण में सभी वर्गों की भावनाओं और चिंताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
“उत्पीड़न का हथियार बन सकता है कानून”
सभा के पदाधिकारियों ने आशंका जताई कि यदि यह कानून वर्तमान स्वरूप में लागू होता है तो यह सामान्य वर्ग के उत्पीड़न का सशक्त माध्यम बन सकता है। उनका कहना था कि समाज पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में किसी भी प्रकार का विवादास्पद प्रावधान सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत की सनातन परंपरा सदैव समावेशी रही है और किसी भी कानून को उसी भावना के अनुरूप होना चाहिए। यदि कानून से समाज में विभाजन की आशंका हो, तो उसे संशोधित या वापस लिया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन
प्रदर्शन के बाद ब्राह्मण सभा के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि समाज के व्यापक हितों को देखते हुए यूजीसी कानून को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए या उस पर पुनर्विचार किया जाए।
सभा के नेताओं ने कहा कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी।
बड़ी संख्या में जुटे पदाधिकारी
इस मौके पर सुरेश चंद्र पचौरी, ममता तिवारी, धन प्रकाश शर्मा, जीपी गोस्वामी, राहुल, अशोक कुमार शर्मा, एसएन शैली, अखिलेश पाठक, प्रदीप उपाध्याय, प्रियंका उपाध्याय, सुशील, श्याम लाल, कपिल शर्मा, ललित सहित अन्य गणमान्य सदस्य मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह आंदोलन किसी वर्ग विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज में संतुलन बनाए रखने के लिए है।
सभा के नेताओं ने कहा कि वे भारत को “विश्व गुरु” बनाने के सपने के साथ आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि देश के सभी वर्गों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार हो।
आंदोलन की चेतावनी
सभा ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने समय रहते इस विषय पर सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो वे चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे। इसमें धरना, प्रदर्शन और जनजागरण अभियान शामिल हो सकते हैं।
हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और प्रशासन की मौजूदगी में पूरा कार्यक्रम संपन्न हुआ। डीएम कार्यालय पर सुरक्षा व्यवस्था भी मुस्तैद रही, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस ज्ञापन पर क्या रुख अपनाती है। क्या यूजीसी कानून पर पुनर्विचार होगा या सभा को आंदोलन की राह पकड़नी पड़ेगी? फिलहाल ग्रेटर नोएडा में इस मुद्दे ने नई चर्चा को जन्म दे दिया है।



