Fortis Hospital News : 18 माह के मासूम को मिला नया जीवन, मूंगफली से हुआ कार्डियक अरेस्ट, फोर्टिस नोएडा के डॉक्टरों ने 6 घंटे की जंग में बचाई सांसें, अस्पताल पहुंचते ही कार्डियक अरेस्ट, 6 घंटे की हाई-रिस्क ब्रोंकोस्कोपी

नोएडा, रफ़्तार टूडे। एक छोटी सी लापरवाही कैसे जानलेवा बन सकती है, इसका उदाहरण मेरठ के 18 माह के एक मासूम बच्चे के मामले में सामने आया। मूंगफली का एक दाना इस बच्चे के लिए मौत का कारण बन सकता था, लेकिन समय रहते विशेषज्ञ इलाज और डॉक्टरों की सतर्कता ने उसे नया जीवन दे दिया।
यह जीवनरक्षक उपचार नोएडा स्थित Fortis Hospital Noida में किया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने अत्यंत जटिल और हाई-रिस्क प्रक्रिया के जरिए बच्चे के वायुमार्ग में फंसी मूंगफली को सफलतापूर्वक निकाला।
कैसे बिगड़ी स्थिति?
जानकारी के अनुसार, बच्चे ने दुर्घटनावश मूंगफली निगल ली थी। शुरुआत में उसे मेरठ के एक स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसके लक्षण कुछ हल्के पड़ गए। चिकित्सकों को लगा कि संभवतः मूंगफली स्वयं बाहर निकल गई है या खाद्य नली में चली गई है।
लेकिन कुछ ही घंटों बाद स्थिति तेजी से बिगड़ गई। मूंगफली ने नमी सोखकर आकार बढ़ा लिया और बच्चे के वायुमार्ग में फंस गई। इससे उसे अचानक सांस लेने में गंभीर कठिनाई होने लगी। आधी रात को हालत बिगड़ने पर परिजन उसे तत्काल फोर्टिस नोएडा लेकर पहुंचे।
अस्पताल पहुंचते ही कार्डियक अरेस्ट
अस्पताल पहुंचने पर बच्चे का ऑक्सीजन स्तर बेहद कम था और उसे रेस्पिरेटरी फेलियर के चलते कार्डियक अरेस्ट हो गया। पिडियाट्रिक आईसीयू टीम ने तुरंत एडवांस लाइफ सपोर्ट शुरू किया, जिसमें इमरजेंसी इंट्यूबेशन और मैकेनिकल वेंटिलेशन शामिल था।
इसके बाद ब्रोंकोस्कोपी के जरिए वायुमार्ग में फंसी बाहरी वस्तु की पहचान की गई।
6 घंटे की हाई-रिस्क ब्रोंकोस्कोपी
इस जटिल प्रक्रिया का नेतृत्व डॉ. मयंक सक्सेना (एडिशनल डायरेक्टर, पल्मोनोलॉजी) ने किया। क्रायो-बायप्सी फोरसेप और डॉरमिया बास्केट जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग कर मूंगफली के सभी टुकड़ों को सावधानीपूर्वक निकाला गया।
पूरी प्रक्रिया में लगभग 5 से 6 घंटे लगे। इसमें अत्यधिक सटीकता, धैर्य और टीमवर्क की आवश्यकता थी।
अगले 24 घंटों तक बच्चे की स्थिति नाजुक बनी रही। वह डॉ. अंकित प्रसाद (कंसल्टेंट, पिडियाट्रिक्स) की निगरानी में पिडियाट्रिक आईसीयू में भर्ती रहा। धीरे-धीरे उसकी हालत में सुधार हुआ और पूरी तरह स्थिर होने के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
डॉक्टरों की चेतावनी
डॉ. मयंक सक्सेना ने बताया कि मूंगफली जैसी ऑर्गेनिक वस्तुएं वायुमार्ग में फंसने पर बेहद खतरनाक हो सकती हैं। ये नमी सोखकर फूल जाती हैं और वायुमार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों में इस तरह की घटना के बाद तत्काल जांच, इमेजिंग और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत ब्रोंकोस्कोपी बेहद जरूरी है। शुरुआती लक्षण हल्के लग सकते हैं, लेकिन वे तेजी से गंभीर रूप ले सकते हैं।
फोर्टिस हेल्थकेयर की विशेषज्ञता
मोहित सिंह, जोनल डायरेक्टर, फोर्टिस नोएडा ने कहा कि यह मामला एडवांस इमरजेंसी केयर और मल्टी-डिसिप्लिनरी टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण है।
Fortis Healthcare भारत की अग्रणी एकीकृत स्वास्थ्य सेवा प्रदाता कंपनी है। कंपनी देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 36 हेल्थकेयर सुविधाओं का संचालन करती है। इसके नेटवर्क में 6,000 से अधिक ऑपरेशनल बेड और 400 से अधिक डायग्नॉस्टिक लैब्स शामिल हैं।
अभिभावकों के लिए अहम संदेश
विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की है कि 3 वर्ष से कम आयु के बच्चों को मूंगफली, छोटे खिलौने या अन्य छोटे आकार की वस्तुएं न दें। यदि बच्चा अचानक खांसने लगे, सांस लेने में दिक्कत हो या आवाज में बदलाव आए, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
यह मामला न केवल चिकित्सा कौशल की मिसाल है, बल्कि समय पर सही निर्णय और विशेषज्ञ हस्तक्षेप की अहमियत भी दर्शाता है।



