Authority News : “अबकी बार बातों से नहीं, आंदोलन से मिलेगा हक़!”, पाली गांव में किसानों का फूटा गुस्सा, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का कार्य ठप, 39 गांवों के किसानों ने एकजुट होकर दिखाई ताकत, बोले– 6% प्लॉट दो या काम बंद करो!, गांवों में गूंजा एक ही स्वर — “हक़ दो, चैन से रहेंगे!”

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। वर्षों से शांतिपूर्वक अपने हक की मांग कर रहे किसानों का सब्र आखिरकार मंगलवार को टूट गया। ग़ुस्से से उबलते किसानों ने पाली गांव में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा चल रहे निर्माण कार्य को पूरी तरह ठप करा दिया, जिससे प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया। किसानों का साफ कहना है कि अगर उनकी 6 प्रतिशत प्लॉट की लंबित मांग को तत्काल नहीं माना गया, तो वे अन्य गांवों में भी प्राधिकरण के कार्य को रुकवा देंगे।
वर्षों से अधूरी मांग — कब तक करेंगे इंतज़ार?
पाली, थापखेड़ा, घंघौला, जुनपत, मायचा, खैरपुर, रामपुर फतेहपुर और घोड़ी बछेड़ा समेत करीब 39 गांवों के किसानों की ज़मीनें वर्ष 2002 से 2006 के बीच ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने अधिग्रहित की थीं।
बदले में किसानों को 6 प्रतिशत प्लॉट देने का वादा किया गया था, लेकिन दो दशक बीत जाने के बाद भी यह वादा अधूरा ही है। किसानों का कहना है कि वे शांति और विश्वास के साथ वर्षों से प्रशासन और नेताओं के दरवाज़े खटखटा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें सिर्फ़ आश्वासन ही मिला है, समाधान नहीं।
पाली गांव में ठप हुआ प्राधिकरण का कार्य
मंगलवार की सुबह पाली गांव में जब ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की निर्माण टीम काम पर पहुँची, तो ग्रामीण पहले से ही एकत्र थे। किसानों ने प्राधिकरण के कर्मचारियों और ठेकेदारों को काम रोकने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जब तक सरकार और प्राधिकरण हमारी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेते, तब तक कोई विकास कार्य नहीं होगा। इस दौरान किसानों ने “6 प्रतिशत प्लॉट हमारा हक़ है, कोई दान नहीं!” और “किसान एकता ज़िंदाबाद!” जैसे नारे लगाए।
किसानों की अगुवाई संतराम, अमित भाटी, श्याम सिंह भाटी, प्रकाश प्रधान, सतीश भाटी, सुरेंद्र भाटी, अजय पाल नागर, मोहित, ज्ञानू सिंह, पप्पू, दिनेश शर्मा सहित कई प्रमुख नेताओं ने की।
कई बार ज्ञापन, पर कोई सुनवाई नहीं
किसानों का कहना है कि वे पिछले दो महीनों में जिला प्रशासन, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को बार-बार ज्ञापन दे चुके हैं। लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण अधिकारी हर बार “जल्द विचार किया जाएगा” कहकर टाल देते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि किसानों के धैर्य का अब परीक्षण नहीं, बल्कि शोषण हो रहा है।
एक किसान नेता ने कहा “हमने लोकतांत्रिक तरीकों से हर दरवाज़ा खटखटाया, पर अब लगता है कि किसान की आवाज़ तब तक नहीं सुनी जाती जब तक वह सड़कों पर उतरकर विरोध न करे।”
किसानों की चेतावनी — अब संघर्ष प्रदेशव्यापी होगा
किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि आने वाले दिनों में उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो अन्य गांवों में भी प्राधिकरण के कार्यों को बंद कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि “यह आंदोलन अब पाली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में फैलेगा।”
एक वरिष्ठ किसान ने कहा “हमने प्राधिकरण को ज़मीन दी ताकि विकास हो, लेकिन अगर विकास का फल हमें नहीं मिलेगा तो हम भी विकास को रोक देंगे।”
किसानों के इस सख्त रुख से प्रशासन में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के अनुसार, प्राधिकरण अधिकारियों ने जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है और किसानों से वार्ता की संभावना भी जताई है।
किसानों की मुख्य मांगें
अधिग्रहित भूमि के बदले 6% प्लॉट का तत्काल आवंटन किया जाए।
जिन किसानों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है, उनकी लंबित फाइलें निपटाई जाएं।
प्राधिकरण द्वारा गांवों में बिना नोटिस किए कार्य बंद किया जाए जब तक समाधान न निकले।
किसानों और प्राधिकरण के बीच स्थायी संवाद समिति बनाई जाए।
गांवों में गूंजा एक ही स्वर — “हक़ दो, चैन से रहेंगे!”
पाली गांव में किसानों की भारी भीड़ एकजुट होकर एक ही आवाज़ में बोल रही थी “हमने खेत छोड़े हैं, अपना वजूद नहीं!”
महिलाएं, बुज़ुर्ग और युवा— सभी की भागीदारी इस आंदोलन में देखने को मिली। किसानों ने कहा कि वे अब “विकास के लिए कुर्बानी देने वाले नहीं, बल्कि अधिकार पाने वाले नागरिक हैं।”
प्राधिकरण की चुप्पी पर उठे सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्राधिकरण किसानों की मांगों को गंभीरता से लेगा?
या फिर एक और लंबी लड़ाई की शुरुआत होगी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते संवाद नहीं किया, तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
अब किसानों का संघर्ष निर्णायक मोड़ पर
पाली गांव से उठी यह चिंगारी अब पूरे ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में फैल सकती है। किसानों का रुख साफ है “अब आश्वासन नहीं, निर्णय चाहिए।”
इस आंदोलन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब तक किसान का हक़ नहीं मिलेगा, तब तक विकास की गाड़ी आगे नहीं बढ़ेगी।



