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Greater Noida Authority News : अब ग्रेटर नोएडा का ट्रीटेड वाटर भी होगा पीने लायक!, आईआईटी दिल्ली बना रहा डीपीआर, सभी एसटीपी में लगेगा अतिरिक्त फिल्टर, जल प्रदूषण रोकने की दिशा में प्राधिकरण की बड़ी पहल

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
अब ग्रेटर नोएडा के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से निकलने वाला शोधित पानी पहले से भी अधिक स्वच्छ और उपयोगी बनेगा। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने आईआईटी दिल्ली के सहयोग से सभी एसटीपी को तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।
यह प्रक्रिया केवल शोधित जल की गुणवत्ता को सुधारने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उपयोग औद्योगिक उत्पादन और सार्वजनिक उपयोग के लिए भी किया जा सकेगा। आने वाले सप्ताह में इस संबंध में डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


एसटीपी की वर्तमान स्थिति और उनके अपग्रेड की योजना

ग्रेटर नोएडा में इस समय चार प्रमुख एसटीपी कार्यरत हैं:

स्थानक्षमता (एमएलडी)
बादलपुर2 एमएलडी
कासना137 एमएलडी
ईकोटेक-215 एमएलडी
ईकोटेक-320 एमएलडी

इन सभी प्लांट्स को त्रिस्तरीय शोधन प्रणाली (ट्रेसरी ट्रीटमेंट सिस्टम) में तब्दील किया जाएगा। इसका मतलब है कि इन एसटीपी पर एक अतिरिक्त फिल्टर लगाया जाएगा जिससे पानी की फीकल (Fecal) मात्रा 100 mg/l से भी कम हो जाएगी।


अब ट्रीटेड वाटर होगा ‘ड्रिंकिंग स्टैंडर्ड’ के बराबर!

वर्तमान में ग्रेटर नोएडा के एसटीपी से निकलने वाले ट्रीटेड वाटर में फीकल मैटर 230 mg/l तक पाया जा रहा है, जबकि NGT ने इसे 100 mg/l से कम करने के निर्देश दिए हैं।
इस तकनीकी अपग्रेडेशन के बाद पानी की TDS, BOD और COD स्तर भी काफी हद तक घट जाएगा, जिससे यह पानी पेयजल के मानकों के लगभग समकक्ष हो जाएगा।


आईआईटी दिल्ली बना रहा डीपीआर, जल्द मिलेगी रिपोर्ट

सीवर विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक विनोद शर्मा ने बताया कि इस तकनीक की डीपीआर आईआईटी दिल्ली द्वारा तैयार की जा रही है।

  • प्रति एमएलडी लागत: ₹20 लाख अनुमानित
  • डीपीआर प्राप्त होने की संभावना: अगले सप्ताह
  • इसके आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार अगली कार्यवाही की जाएगी

औद्योगिक इकाइयों को भी मिलेगा स्वच्छ जल, जल संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

इस अपग्रेड तकनीक के बाद ट्रीटेड वॉटर का इस्तेमाल सिर्फ सीवर में बहाने के लिए नहीं होगा, बल्कि इसे औद्योगिक गतिविधियों में उपयोग किया जा सकेगा। इससे:

✅ ग्राउंड वॉटर दोहन में कमी
✅ औद्योगिक उत्पादन की लागत में गिरावट
✅ पर्यावरण संरक्षण को मजबूती
✅ जल प्रदूषण को रोकने में बड़ी मदद


एसीईओ का बयान – हर एसटीपी होगा हाईटेक!

“सभी एसटीपी को तकनीकी रूप से अपग्रेड करने की तैयारी है। आईआईटी दिल्ली से डीपीआर बनवाई जा रही है। प्राधिकरण की कोशिश है कि ट्रीटेड वाटर को स्वच्छ बनाया जा सके। इस पानी का इस्तेमाल औद्योगिक उत्पादनों के लिए भी किया जा सकेगा।”
सौम्या श्रीवास्तव, एसीईओ, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण


नोएडा सेक्टर-54 बना उदाहरण, अब ग्रेटर नोएडा भी तैयार

गौरतलब है कि इस तकनीक का पायलट मॉडल पहले से ही नोएडा के सेक्टर-54 स्थित एसटीपी में लागू है। वहां इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अब ग्रेटर नोएडा भी उसी रास्ते पर बढ़ रहा है।


जल की हर बूंद होगी उपयोगी — यही है मिशन!

प्राधिकरण की यह योजना न सिर्फ एक तकनीकी पहल है, बल्कि यह जल संसाधनों के स्थायी संरक्षण की दिशा में उठाया गया एक अत्यंत आवश्यक और सकारात्मक कदम है।
अब देखना यह होगा कि डीपीआर मिलने के बाद टेंडर, फंडिंग और इम्प्लीमेंटेशन की प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी की जाती है।


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Raftar Today
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