Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा में राष्ट्रचिंतना की 30वीं गोष्ठी, “स्वाधीनता दिवस और अखंड भारत” की गूंज, इतिहास, संस्कृति और देशभक्ति से सराबोर हुआ सभागार, संगीतमय देशभक्ति का रंग, समापन एक संकल्प, एक दिशा

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
भाद्र मास शुक्ल पक्ष प्रतिपदा, दिनांक 10 अगस्त 2025 को ग्रेटर नोएडा के GNIOT सभागार में राष्ट्रचिंतना की 30वीं गोष्ठी “स्वाधीनता दिवस — अखंड भारत समारोह” बड़े ही उत्साह, गरिमा और देशभक्ति के माहौल में आयोजित की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ और अतिथि परिचय
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रोफेसर विवेक कुमार, हैड, एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, नोएडा ने सभी विशिष्ट अतिथियों का परिचय कराते हुए किया। उनके स्वागत संबोधन ने माहौल को औपचारिकता से जोड़ते हुए एक देशभक्ति की लहर से भर दिया।
अध्यक्षीय उद्बोधन — प्राचीन भारत की झलक
श्री राजेश बिहारी, अध्यक्ष, राष्ट्रचिंतना, ग्रेटर नोएडा ने प्राचीन भारत के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज का यूरेशिया कभी जंबूद्वीप के नाम से जाना जाता था। उन्होंने भागवत पुराण, ऋग्वेद और अन्य प्राचीन ग्रंथों से उद्धरण देते हुए बताया कि भारत की संस्कृति और भौगोलिक सीमा कितनी विस्तृत और महान रही है।
विशिष्ट अतिथि का संबोधन — आंतरिक सुरक्षा का महत्व
मेजर जनरल दिनेश शर्मा जी ने अपने वक्तव्य में वर्तमान समय में आंतरिक सुरक्षा के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने इसके विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए यह स्पष्ट किया कि राष्ट्र की मजबूती केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि भीतर की स्थिरता और एकता पर भी निर्भर करती है।

मुख्य अतिथि का प्रेरणादायक संबोधन
मुख्य अतिथि श्रीमान राजेन्द्र नायक (IAS), पूर्व कंट्रोलर जनरल, भारत एवं राज्य मंत्री, राजस्थान सरकार ने अपने ओजस्वी उद्गार में कहा —
“अखंड भारत के लिए हमें अपनी संस्कृति, भाषा और परंपरा पर गर्व होना चाहिए।”
उन्होंने अफसोस जताया कि आज हम अपनी जड़ों से दूर हो रहे हैं और यही कारण रहा कि हमारी कमजोरियों का फायदा उठाकर विदेशी शक्तियों ने हमें गुलाम बनाया।
मुख्य वक्ता का ऐतिहासिक दृष्टिकोण
मुख्य वक्ता राष्ट्रीय विचारक भाई महावीर जी, पूर्व संघ प्रचारक, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता ने भारत के गौरवशाली अतीत का उल्लेख करते हुए कहा —
भारत कभी विश्वगुरु था, जहां दुनिया भर से लोग शिक्षा लेने आते थे। लेकिन स्वार्थ, ईर्ष्या, लोभ और एक केंद्रीय शक्ति के अभाव ने हमें कमजोर कर दिया।
उन्होंने याद दिलाया कि राजस्थान में महाराणा प्रताप, पंजाब में सिख शक्ति, सहारनपुर की राम प्यारी गुर्जरी और अनगिनत वीरांगनाएं एक साथ लड़ रही थीं। करोड़ों भारतीय सपूतों के बलिदान और 1946 में तीनों सेनाओं के विद्रोह ने अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर किया।
उनका आह्वान था — “हम प्रण लें कि भारत फिर अखंड होगा।”
जगतगुरु का आशीर्वचन
रामानंदाचार्य जगतगुरु स्वामी श्री वैदेही बल्लभ देवाचार्य जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वर्षों से मां भारती की सेवा में जुटा है और प्रबुद्ध लोगों को राष्ट्र कार्य के लिए तैयार करता है। उन्होंने आग्रह किया कि घर-घर में संस्कार निर्माण की प्रक्रिया को जीवित रखा जाए और सनातन धर्म की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहें।
संगीतमय देशभक्ति का रंग
इस अवसर पर दनिश जी और सविता जी ने अपने वीर रस से ओतप्रोत गीतों के माध्यम से सभा को भावविभोर कर दिया। गीतों की गूंज ने पूरे सभागार में ऊर्जा और उत्साह का संचार किया।
विशिष्ट उपस्थिति
इस आयोजन में उपाध्यक्ष राजेन्द्र कुमार सोनी जी, डॉ. संदीप जी, डॉ. निधि जी, श्रीमती संगीता वर्मा जी, डॉ. दिव्या अग्रवाल, संदीप कुमार सिन्हा जी, डॉ. बी.के. श्रीवास्तव, श्री निर्मल श्रीवास्तव सहित कई गणमान्य व्यक्तित्व मौजूद रहे।
समापन — एक संकल्प, एक दिशा
यह गोष्ठी केवल एक सांस्कृतिक और बौद्धिक विमर्श नहीं थी, बल्कि यह एक संकल्प यात्रा थी — अखंड भारत के निर्माण, संस्कृति के संरक्षण और राष्ट्र की एकता के लिए।
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