World Hepatitis Day : वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे 2025 विशेषज्ञों की चेतावनी, मानसून में हेपेटाइटिस का खतरा बढ़ा, समय रहते जांच और जागरूकता है ज़रूरी, मानसून में दूषित पानी और भोजन से फैल रहा है हेपेटाइटिस, गंदा पानी और असुरक्षित जीवनशैली बनी वजह

नोएडा/ग्रेटर नोएडा | रफ़्तार टुडे ब्यूरो | 28 जुलाई 2025
विश्व हेपेटाइटिस दिवस के मौके पर नोएडा और ग्रेटर नोएडा के प्रमुख चिकित्सा विशेषज्ञों ने आमजन को आगाह किया है कि मानसून का मौसम जलजनित बीमारियों, विशेष रूप से हेपेटाइटिस ए और ई के लिए बेहद संवेदनशील होता है। साथ ही, हेपेटाइटिस बी और सी जैसे वायरस लंबे समय तक बिना लक्षण के शरीर में मौजूद रहकर लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं – जिससे लिवर सिरोसिस या कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
मानसून में दूषित पानी और भोजन से फैल रहा है हेपेटाइटिस
फोर्टिस नोएडा के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. निशांत नागपाल ने बताया कि:
“हर साल मानसून के दौरान नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हेपेटाइटिस ए और ई के मामलों में तेज़ी आती है। सड़क किनारे मिलने वाला दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन संक्रमण का सबसे बड़ा कारण है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हेपेटाइटिस ए, बी या सी अचानक ‘फुलमिनेंट हेपेटाइटिस’ में बदल जाए तो यह स्थिति जानलेवा हो सकती है, क्योंकि इसमें लिवर अचानक काम करना बंद कर देता है।
डॉ. नागपाल ने आगे बताया कि हेपेटाइटिस सी नोएडा क्षेत्र में सर्वाधिक पाया जाने वाला प्रकार है, जो लिवर कैंसर और सिरोसिस का कारण बनता है। हालांकि अब 12 हफ्तों की प्रभावी दवाओं से इसका इलाज संभव है।
गंदा पानी और असुरक्षित जीवनशैली बनी वजह – ग्रेटर नोएडा में साल दर साल बढ़ रहे मामले
फोर्टिस ग्रेटर नोएडा के निदेशक (आंतरिक चिकित्सा) डॉ. दिनेश कुमार ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि:
“हमारे अस्पताल में मानसून के दौरान हेपेटाइटिस ए और ई के सबसे अधिक मामले आते हैं। इसके बाद हेपेटाइटिस सी के केस भी लगातार बढ़ रहे हैं। ग्रेटर नोएडा में हर साल हेपेटाइटिस के मामलों में 8–10% की बढ़ोतरी देखी जाती है।”
उन्होंने यह भी बताया कि हेपेटाइटिस बी के मामले कम होते हैं लेकिन सबसे अधिक जटिल और घातक साबित हो सकते हैं।
जो लोग बार-बार खून चढ़वाते हैं, नशे के लिए इंजेक्शन का इस्तेमाल करते हैं, या असुरक्षित यौन संबंध बनाते हैं, उनके लिए हेपेटाइटिस बी और सी का खतरा कई गुना अधिक है।
पुराने संक्रमण बन सकते हैं नई मुसीबत – डॉ. आदर्श कुमार चौहान
मैश मानस हॉस्पिटल, नोएडा के लैप्रोस्कोपिक जीआई सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. आदर्श कुमार चौहान ने जानकारी दी कि:
“2021 में सेक्टर 79 की एक ही सोसाइटी में एक हफ्ते के भीतर हेपेटाइटिस ए के 9 मामले सामने आए थे। यह संक्रमण दूषित पानी और असुरक्षित भोजन से फैला था। आज भी हालात कुछ बेहतर नहीं हैं।”
उन्होंने सलाह दी कि जिन लोगों को बार-बार इंजेक्शन लगते हैं, डायलिसिस पर हैं, या जिनका रक्त संक्रमण का इतिहास रहा है, उन्हें समय-समय पर हेपेटाइटिस बी और सी की स्क्रीनिंग कराते रहना चाहिए।
बचाव ही सबसे बेहतर इलाज – वैक्सीनेशन, स्वच्छता और सावधानी अनिवार्य
विशेषज्ञों के मुताबिक हेपेटाइटिस ए और बी के लिए सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीन मौजूद है। वहीं हेपेटाइटिस सी का इलाज नई एंटीवायरल दवाओं से संभव है, बशर्ते संक्रमण का पता समय पर लग जाए।
बचाव के लिए क्या करें?
- केवल फिल्टर या उबला हुआ पानी पिएं
- खाने से पहले हाथ धोना न भूलें
- सड़क किनारे बिकने वाले कटे फल या खुला खाना न खाएं
- इंजेक्शन, टैटू, कान छेदना या मेडिकल प्रक्रिया केवल पंजीकृत केंद्रों से कराएं
- असुरक्षित यौन संबंधों से बचें और जागरूकता रखें
लक्षणों को न करें नजरअंदाज़ – लिवर खराब होने तक नहीं आते संकेत
हेपेटाइटिस बी और सी के कई मामलों में लक्षण महीनों या वर्षों तक नहीं दिखाई देते। कई बार ये संक्रमण तब पकड़ में आते हैं जब लिवर पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुका होता है।
संभावित लक्षणों में शामिल हैं:
- थकान
- भूख में कमी
- आंखों या त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया)
- पेट में सूजन या दर्द
- गहरे रंग का पेशाब
विशेषज्ञों की सामूहिक अपील: “समय पर जांच कराएं, खुद भी बचें और दूसरों को भी बचाएं”
डॉ. निशांत, डॉ. दिनेश और डॉ. आदर्श सभी का यही कहना है कि हेपेटाइटिस एक छुपी हुई महामारी बनती जा रही है। इससे बचने के लिए आम जनता को जागरूक, सतर्क और स्वास्थ्य के प्रति गंभीर होना ज़रूरी है।
ग्रेटर नोएडा-नोएडा क्षेत्र में हेपेटाइटिस के कुछ प्रमुख आँकड़े (2021–2025):
| वर्ष | कुल रिपोर्टेड केस | हेपेटाइटिस A/E (%) | हेपेटाइटिस B (%) | हेपेटाइटिस C (%) |
|---|---|---|---|---|
| 2021 | 870 | 56% | 15% | 29% |
| 2022 | 943 | 52% | 16% | 32% |
| 2023 | 1011 | 50% | 17% | 33% |
| 2024 | 1089 | 48% | 17% | 35% |
| 2025* | 1150 (अनुमानित) | 46% | 18% | 36% |
(*डेटा अस्पतालों के अनुमान और रफ़्तार टुडे की स्वतंत्र रिपोर्टिंग पर आधारित है)
निष्कर्ष: स्वास्थ्य की रक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है
वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि लोगों को स्वास्थ्य के प्रति ज़िम्मेदार और सतर्क नागरिक बनाना है। स्वच्छता, समय पर जांच, टीकाकरण और सही जीवनशैली अपनाकर इस जानलेवा वायरस से आसानी से बचा जा सकता है।
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