BJP Organization News : गाली-गलौज से संगठन तक!, केंद्रीय मंत्री व सांसद और जिला अध्यक्ष को अपशब्द कहने वाला नेता अब बनेगा फिर से जिला महामंत्री?, भाजपा संगठन में मचा घमासान
2019 में जिला संगठन में कमान संभालने के लिए रफ़्तार टूडे के एडिटर के आगे पीछे घूमना लगा। और 2019 में जिला महामंत्री बनने के बाद अपना पल्ला झाड़ लिया। यह ऐसे ही है जैसे भाजपा नोएडा सांसद और वर्तमान जिला अध्यक्ष को गाली देना नहीं भूले ऐसे ही रफ़्तार टूडे के एडिटर का भी एहसान भूल गए

दादरी/गौतम बुद्ध नगर। भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पार्टी के भीतर ही भीतर असंतोष की आग सुलग रही है, और वजह है—एक ऐसा नेता, जिसने न केवल केंद्रीय मंत्री और क्षेत्रीय सांसद, और वर्तमान जिला अध्यक्ष के खिलाफ सार्वजनिक रूप से आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया, बल्कि गौतम बुद्ध नगर के जिला अध्यक्ष के साथ भी कथित तौर पर गाली-गलौज और दुर्व्यवहार किया। अब वही नेता अब फिर से जिला महामंत्री जैसे अहम संगठनात्मक पद की दौड़ में सबसे आगे बताया जा रहा है। 2019 में जिला संगठन में कमान संभालने के लिए रफ़्तार टूडे के एडिटर के आगे पीछे घूमना लगा। और 2019 में जिला महामंत्री बनने के बाद अपना पल्ला झाड़ लिया। यह ऐसे ही है जैसे भाजपा नोएडा सांसद और वर्तमान जिला अध्यक्ष को गाली देना नहीं भूले ऐसे ही रफ़्तार टूडे के एडिटर का भी एहसान भूल गए
इस घटनाक्रम ने भाजपा कार्यकर्ताओं से लेकर वरिष्ठ नेताओं तक को असहज कर दिया है। पार्टी के भीतर यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या अनुशासनहीनता और अपशब्दों की राजनीति अब संगठन में पदोन्नति का आधार बन गई है?
पुराने विवाद, नई जिम्मेदारी की तैयारी
बताया जा रहा है कि संबंधित नेता इससे पहले दादरी में रह चुके हैं। उनके लेकर भी पार्टी के अंदर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। आरोप है कि रहते हुए उन्होंने पार्टी के लिए अपेक्षित संगठनात्मक कार्य नहीं किए। इसके उलट, कई मौकों पर पार्टी लाइन से हटकर बयानबाजी की और वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ सार्वजनिक मंचों पर आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया।
सूत्रों के मुताबिक, इसी नेता ने कुछ समय पहले केंद्रीय मंत्री और क्षेत्रीय सांसद और वर्तमान जिला अध्यक्ष को लेकर बेहद अमर्यादित टिप्पणी की थी, जिससे पार्टी की काफी किरकिरी हुई। इतना ही नहीं, गौतम बुद्ध नगर के जिला अध्यक्ष के साथ भी कथित रूप से दुर्व्यवहार और गाली-गलौज का मामला सामने आया था।
इन घटनाओं के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि पार्टी नेतृत्व ऐसे व्यक्ति पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा, लेकिन अब उल्टा ही होता दिख रहा है।
2012 नगरपालिका उम्मीदवार तक का कर चुके है विरोध
विवाद यहीं नहीं थमता। पार्टी के अंदर यह भी चर्चा है कि 2012 उक्त नेता के कार्यकाल के दौरान हुए नगरपालिका चुनावों में टिकट वितरण को लेकर गंभीर अनियमितताएं हुई थीं।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पार्टी के कई वरिष्ठ और जमीनी कार्यकर्ता इन मुद्दों को लेकर खुलकर नाराज़गी जता रहे हैं। उनका कहना है कि यदि ऐसे लोगों को संगठन में ऊंचे पद दिए गए, तो ईमानदार और समर्पित कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटेगा।
ब्राह्मण नेता बनने की कोशिश या सत्ता का समीकरण?
पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह नेता खुद को एक “ब्राह्मण चेहरे” के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। संगठन के भीतर यह चर्चा भी है कि जातीय संतुलन साधने के नाम पर ऐसे नेताओं को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिनका संगठनात्मक रिकॉर्ड सवालों के घेरे में रहा है।
कुछ नेताओं का मानना है कि पार्टी को समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना चाहिए, लेकिन अनुशासन, मर्यादा और संगठनात्मक मूल्यों की कीमत पर नहीं।
कार्यकर्ताओं में उबाल, नेतृत्व पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद गौतम बुद्ध नगर और दादरी क्षेत्र के कई कार्यकर्ताओं में भारी नाराज़गी है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक पार्टी के लिए निस्वार्थ भाव से काम किया, संघर्ष किया, लेकिन आज उन्हें नजरअंदाज कर ऐसे लोगों को आगे बढ़ाया जा रहा है, जो विवादों के लिए जाने जाते हैं।
कुछ कार्यकर्ताओं ने नाम न छापने की शर्त पर कहा—
“अगर केंद्रीय मंत्री, सांसद और जिला अध्यक्ष को गाली देने वाला व्यक्ति जिला महामंत्री बन सकता है, तो फिर संगठन में अनुशासन का क्या मतलब रह जाता है?”
जिला संगठन में बढ़ती खेमेबंदी
इस मामले ने भाजपा के जिला संगठन में खेमेबंदी को भी उजागर कर दिया है। एक गुट इस नेता की नियुक्ति के पक्ष में है, जबकि दूसरा गुट इसका खुलकर विरोध कर रहा है। विरोधी गुट का कहना है कि इससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचेगा और आगामी चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
वहीं समर्थक गुट इसे “राजनीतिक साजिश” बताते हुए कह रहा है कि कुछ लोग जानबूझकर नेता की छवि खराब करने में लगे हैं।
क्या शीर्ष नेतृत्व लेगा संज्ञान?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इस पूरे मामले पर संज्ञान लेगा या फिर विवादों से घिरे इस नेता को जिला महामंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठा दिया जाएगा?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि पार्टी ने समय रहते इस तरह के मामलों पर सख्त रुख नहीं अपनाया, तो इसका सीधा असर संगठन की साख और जमीनी कार्यकर्ताओं की निष्ठा पर पड़ेगा।
संगठन बनाम व्यक्ति
गौतम बुद्ध नगर भाजपा संगठन आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। एक तरफ संगठनात्मक अनुशासन और मर्यादा का सवाल है, तो दूसरी तरफ सत्ता संतुलन और अंदरूनी राजनीति।
अब देखना यह होगा कि पार्टी नेतृत्व अनुशासनहीनता पर लगाम कसता है या फिर विवादों को नजरअंदाज कर आगे बढ़ता है। आने वाले दिनों में यह फैसला न केवल जिला संगठन की दिशा तय करेगा, बल्कि पार्टी की आंतरिक राजनीति का भी आईना बनेगा।



