Corruption Free India News : “लीज डीड की शर्तें कागज़ों में कैद, किसानों को हक़ से वंचित”, पढ़ाई और इलाज में छूट दिलाने की मांग तेज़, करप्शन फ्री इंडिया संगठन ने प्राधिकरण को सौंपा ज्ञापन, तानाशाही का आरोप और धरने की चेतावनी, संगठन का आंदोलन और ज्ञापन सौंपा गया

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
ग्रेटर नोएडा में एक बार फिर से शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। शहर के स्कूल और अस्पताल, जिन्हें प्राधिकरण ने सस्ती दरों पर ज़मीन दी थी, उनकी लीज डीड की मूल शर्तों का पालन करने में पूरी तरह नाकाम नज़र आ रहे हैं। इन शर्तों के मुताबिक़, स्थानीय किसानों और गरीब परिवारों को शिक्षा और इलाज में विशेष छूट मिलनी चाहिए थी, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
यह पूरा मामला सिर्फ किसानों और गरीबों की सुविधा का ही नहीं बल्कि प्राधिकरण की विश्वसनीयता का भी है। जब लीज डीड की शर्तें सार्वजनिक दस्तावेज़ों में लिखी हुई हैं, तो फिर उनके पालन में इतनी लापरवाही क्यों? सवाल उठता है कि क्या स्कूल और अस्पताल प्राधिकरण की “सस्ती जमीन” का फायदा उठाकर केवल मुनाफाखोरी कर रहे हैं, और क्या प्राधिकरण इस पर आंख मूंदकर बैठा है?
आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज़ हो सकता है और ग्रेटर नोएडा की गलियों से लेकर प्राधिकरण कार्यालय तक गूंज सकता है।
लीज डीड की शर्तें – किसानों और गरीबों के लिए सुनहरे वादे
करप्शन फ्री इंडिया संगठन के सदस्यों ने बताया कि जब शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों को जमीन आवंटित की गई थी, तो उसमें स्पष्ट लिखा गया था किसानों के बच्चों की पढ़ाई में छूट दी जाएगी। गांव के गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने का प्रावधान होगा। अस्पतालों को स्थानीय किसानों के इलाज में भारी छूट देनी होगी।
प्रत्येक अस्पताल में सुबह और शाम दो-दो घंटे ओपीडी फ्री रखी जाएगी। गांवों के 10% गरीब परिवारों का इलाज पूरी तरह मुफ्त करना होगा। शहर के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को इलाज में 50% छूट दी जाएगी। लेकिन, संगठन का कहना है कि ये सारी शर्तें केवल कागज़ों में कैद होकर रह गई हैं और ज़मीनी स्तर पर किसानों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।

संगठन का आंदोलन और ज्ञापन सौंपा गया
करप्शन फ्री इंडिया संगठन की कोर कमेटी के प्रमुख सदस्य बलराज हूंण के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्राधिकरण के ओएसडी मुकेश कुमार को ज्ञापन सौंपा।
संगठन के संस्थापक चौधरी प्रवीण भारतीय और आलोक नागर ने कहा कि यह किसानों और गरीबों के साथ सीधा अन्याय है। उन्होंने साफ शब्दों में आरोप लगाया कि स्कूल और अस्पताल मनमानी कर रहे हैं और प्राधिकरण के अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं।
नेताओं के तीखे बयान
चौधरी प्रवीण भारतीय “सस्ती ज़मीन मिलने के बाद भी अस्पताल और स्कूल किसानों और गरीबों का शोषण कर रहे हैं। यह तानाशाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” मास्टर दिनेश नागर “यह हमारे अधिकारों का खुला हनन है। यदि शर्तें लागू नहीं की गईं तो संगठन अनिश्चितकालीन धरना देगा।”
आलोक नागर “प्राधिकरण की लापरवाही ने किसानों और गरीबों को उनके हक़ से वंचित कर दिया है। अब हम सड़क से सदन तक आवाज़ उठाएंगे।”
तानाशाही का आरोप और धरने की चेतावनी
संगठन का कहना है कि पिछले कई वर्षों से लगातार यह मांग की जा रही है, लेकिन अधिकारियों और संस्थानों की “मिलीभगत” के कारण लीज डीड की शर्तें लागू नहीं हो पा रही हैं। अब संगठन ने साफ चेतावनी दी है कि अगर यह नियम तुरंत लागू नहीं किए गए, तो अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।
कौन-कौन रहे मौजूद?
ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन से जुड़े कई प्रमुख और स्थानीय लोग भी मौजूद रहे। इनमें आलोक नागर, मास्टर दिनेश नागर, बलराज हूंण, कुलवीर भाटी, धर्मेंद्र भाटी, दुलीचंद नागर, सुमन नागर, नीलम चेची, प्रेमलता, पायल, गोरी, ममता सिंह, हबीब सैफी और बोबी गुर्जर शामिल रहे।



