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Fortis Hospital News : बरसात की ठंडक में छिपा सेहत का खतरा, ग्रेटर नोएडा में फ्लू, डायरिया और फंगल इंफेक्शन के मामले बढ़े; डेंगू-मलेरिया में थोड़ी राहत लेकिन सावधानी ज़रूरी, अस्पताल की ओपीडी में बढ़ते केस – आंकड़ों की जुबानी

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
मानसून की बारिश ने ग्रेटर नोएडा और आसपास के इलाकों में तपती गर्मी से राहत जरूर दी है, लेकिन यह राहत कई लोगों के लिए नई मुश्किलें लेकर भी आई है। ठंडी हवाओं और बूंदाबांदी के साथ-साथ बरसात अपने साथ अनेक बीमारियों का खतरा भी बढ़ाकर लाती है। इस बार का मौसम भी अपवाद नहीं है।

फोर्टिस ग्रेटर नोएडा के इंटर्नल मेडिसिन विभाग के निदेशक, डॉ. दिनेश कुमार त्यागी का कहना है कि हाल के दिनों में अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या 1.5 से 2 गुना तक बढ़ गई है। इनमें से अधिकांश लोग फ्लू, दस्त और फंगल इंफेक्शन जैसी मौसमी बीमारियों से पीड़ित हैं।

अस्पताल की ओपीडी में बढ़ते केस – आंकड़ों की जुबानी

डॉ. त्यागी द्वारा साझा किए गए आंकड़े बताते हैं कि:

लगभग 40–45% मरीज दस्त (डायरिया) और वायरल फिवर से जूझ रहे हैं।

करीब 20–25% लोग त्वचा संबंधी फंगल इंफेक्शन की शिकायत लेकर आ रहे हैं।

जबकि शेष 30–35% मरीजों में गले का संक्रमण, पाचन समस्याएं और अन्य मौसमी रोग सामने आ रहे हैं।

यानी, इस मौसम में हर दूसरा व्यक्ति पेट से जुड़ी समस्या या वायरल बुखार का शिकार हो रहा है।

युवाओं पर ज्यादा असर

डॉ. त्यागी बताते हैं कि खासतौर पर 45 साल तक की युवा आबादी इन मौसमी बीमारियों से अधिक प्रभावित हो रही है। ऑफिस जाने वाले लोग, कॉलेज स्टूडेंट्स और बाहर का खाना खाने वाले युवाओं में फ्लू और फंगल इंफेक्शन के मामले तेजी से बढ़े हैं।

इसका कारण यह है कि युवा वर्ग अक्सर बाहर का फास्ट फूड खाता है, बारिश में भीग जाता है या लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहता है। यही लापरवाही बीमारी को दावत देती है।

डेंगू और मलेरिया में कमी, लेकिन लापरवाही न करें

पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार डेंगू और मलेरिया के मामले कम देखने को मिले हैं। यह शहरवासियों के लिए राहत की बात है। लेकिन डॉ. त्यागी चेतावनी देते हैं कि “डेंगू और मलेरिया पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, इसलिए मच्छरों से बचाव को लेकर सतर्क रहना बेहद ज़रूरी है।”

बरसात के मौसम में घर के आसपास जमा पानी, कूलर और गमलों में पानी डेंगू और मलेरिया मच्छरों की सबसे बड़ी पनाहगाह बनते हैं।

खानपान पर दें खास ध्यान

बरसात के मौसम में सबसे ज्यादा खतरा पेट से जुड़ी बीमारियों का होता है। डॉ. त्यागी सलाह देते हैं कि:

बाहर का खाना न खाएं।

ताज़ा और साफ-सुथरा भोजन ही लें।

लंबे समय तक रखा हुआ खाना तुरंत फेंक दें।

सलाद या फल खाने से पहले उनका छिलका जरूर उतारें।

हाथ धोने की आदत को न भूलें।

पीने के लिए फ़िल्टर किया हुआ या उबला पानी ही प्रयोग करें।

मच्छरों से बचाव है ज़रूरी

बरसात के मौसम में मच्छरों का आतंक बढ़ जाता है। इससे बचाव के लिए ये उपाय कारगर हैं:

पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें।

मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।

घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें।

नियमित रूप से कूलर और गमलों का पानी खाली करें।

भीगने से बचें, सही फुटवियर पहनें

बारिश में भीगने से न सिर्फ सर्दी-जुकाम होता है, बल्कि सांस की समस्या भी बढ़ सकती है। बाहर निकलते समय छाता या रेनकोट का प्रयोग करें।

गीले कपड़ों को तुरंत बदलें।

पैरों को फंगल इंफेक्शन से बचाने के लिए रबर या प्लास्टिक के जूते-चप्पल पहनें।

थोड़ी लापरवाही, बड़ी परेशानी

डॉ. त्यागी का कहना है कि बरसात का मौसम आनंद देने वाला है लेकिन जरा सी लापरवाही बड़ी परेशानी बन सकती है। साफ-सफाई, सावधानी और संतुलित जीवनशैली अपनाकर ही इस मौसम का आनंद स्वस्थ रहकर लिया जा सकता है।

जनस्वास्थ्य पर असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश के इन महीनों में यदि समय पर सावधानी बरती जाए तो न सिर्फ व्यक्तिगत स्वास्थ्य बल्कि सामूहिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी बोझ कम होगा। सरकारी और निजी अस्पतालों को भीड़ से बचाने के लिए ज़रूरी है कि लोग घर पर ही एहतियात बरतें।

राहत और खतरे का मौसम

ग्रेटर नोएडा में मानसून जहां एक तरफ हरियाली और ठंडक लेकर आया है, वहीं दूसरी ओर फ्लू, डायरिया और फंगल इंफेक्शन के मामलों ने चिंता बढ़ाई है। डेंगू और मलेरिया की कम दर राहत जरूर है, मगर सतर्कता अभी भी सबसे बड़ा हथियार है।

रफ़्तार टुडे की न्यूज़
Raftar Today
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