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Noida Authority News : “बारिश आई तो जाएगी कुर्सी!”, नोएडा प्राधिकरण का अल्टीमेटम, नाले नहीं साफ हुए तो सीधे सस्पेंशन; मानसून से पहले अफसरों की खुली पोल, 15 जून तक हर साल चमक जाते थे नाले, इस बार टेंडर तक नहीं हुए जारी… अब जलभराव रोकने के लिए सीनियर मैनेजरों पर लटकी कार्रवाई की तलवार, सीईओ कृष्णा करुणेश के कार्यभार संभालने के बाद बदली व्यवस्था

“जलभराव मिला तो कार्रवाई तय”, ओएसडी क्रांति शेखर का कड़ा संदेश, हर साल 15 जून तक पूरा हो जाता था सफाई अभियान

नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा में मानसून आने से पहले ही प्रशासनिक सुस्ती और सिस्टम की लापरवाही खुलकर सामने आने लगी है। शहर को जलभराव से बचाने के लिए हर साल समय रहते नालों और नालियों की सफाई का काम शुरू हो जाता था, लेकिन इस बार हालात ऐसे हैं कि कई सर्किलों में अब तक टेंडर तक जारी नहीं किए गए। ऐसे में मानसून से पहले पूरे शहर के नालों की सफाई होना मुश्किल नजर आ रहा है। दूसरी ओर नोएडा प्राधिकरण ने अब अधिकारियों पर सख्ती दिखाते हुए साफ कर दिया है कि यदि बारिश के दौरान किसी भी क्षेत्र में जलभराव हुआ तो संबंधित सीनियर मैनेजर के खिलाफ सीधी कार्रवाई होगी और जरूरत पड़ने पर सस्पेंशन तक किया जाएगा।

“जलभराव मिला तो कार्रवाई तय”, ओएसडी क्रांति शेखर का कड़ा संदेश
नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी क्रांति शेखर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जिन अधिकारियों ने अब तक नाला सफाई के टेंडर जारी नहीं किए हैं, उनके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि मानसून के दौरान जिस सर्किल में पानी भरने की शिकायत मिलेगी, वहां के जिम्मेदार वरिष्ठ प्रबंधक को बख्शा नहीं जाएगा।
प्राधिकरण की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब शहर के कई हिस्सों में पहले से ही नालों में कचरा जमा है और बरसात शुरू होते ही जलभराव की आशंका बढ़ गई है।


हर साल 15 जून तक पूरा हो जाता था सफाई अभियान
नोएडा में हर वर्ष मानसून से पहले बड़े और छोटे नालों की सफाई के लिए लगभग 10 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए जाते रहे हैं। अप्रैल तक टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जाती थी और 15 जून तक अधिकांश नाले साफ कर दिए जाते थे, ताकि बारिश के दौरान पानी निकासी सुचारु बनी रहे।
लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। कई सर्किलों ने अभी तक टेंडर प्रक्रिया ही शुरू नहीं की। परिणामस्वरूप सफाई कार्य जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा। यदि अभी टेंडर जारी भी कर दिए जाएं, तो भी नियमानुसार प्रक्रिया पूरी होने और कार्य आवंटन में लंबा समय लगेगा।

सीईओ कृष्णा करुणेश के कार्यभार संभालने के बाद बदली व्यवस्था
जनवरी 2026 में जब कृष्णा करुणेश ने नोएडा प्राधिकरण में सीईओ का पदभार संभाला, तब उन्होंने जनस्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया। जनस्वास्थ्य विभाग को सिविल विभाग के साथ मर्ज कर दिया गया।
इस फैसले का उद्देश्य था कि साफ-सफाई और नाला प्रबंधन जैसे कार्य अब केवल सीमित अधिकारियों तक न रहकर दस वर्क सर्किलों के जरिए संचालित हों। इससे अधिक संख्या में जेई, सुपरवाइजर और प्रबंधक निगरानी में शामिल हो सकें और फील्ड स्तर पर समस्याओं की पहचान जल्दी हो सके।

दो बड़े टेंडरों की जगह अब 10 हिस्सों में काम
पहले जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से नाला सफाई के लिए दो बड़े टेंडर जारी होते थे, जिनकी कीमत करीब पांच-पांच करोड़ रुपये होती थी। लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद काम को दस वर्क सर्किलों में बांट दिया गया। अब हर सर्किल को अलग-अलग टेंडर जारी करने थे।
यहीं से पूरा सिस्टम उलझ गया। कई सीनियर मैनेजरों को यह समझने में परेशानी हुई कि नाला सफाई जैसे “फ्लोटिंग मैटेरियल” वाले कार्य को अलग-अलग हिस्सों में कैसे बांटा जाए।

अब समय कम, चुनौती बड़ी
प्राधिकरण के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यदि आज भी टेंडर प्रक्रिया पूरी कर दी जाए तो भी नियमों के अनुसार टेंडर खोलने और आवंटन में कम से कम 45 दिन का समय लगेगा। ऐसे में 15 जून तक पूरे शहर के नालों की सफाई लगभग असंभव मानी जा रही है।

शहरवासियों की बढ़ी चिंता
स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर वर्ष मानसून से पहले बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अलग होती है। लोगों को डर है कि यदि समय रहते सफाई कार्य नहीं हुआ तो इस बार भी सेक्टरों, अंडरपास और मुख्य सड़कों पर जलभराव गंभीर समस्या बन सकता है।
कई आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों ने भी मांग की है कि प्राधिकरण केवल चेतावनी देने तक सीमित न रहे, बल्कि तुरंत युद्धस्तर पर सफाई अभियान शुरू करे।

अब मानसून से पहले प्रशासन की अग्निपरीक्षा
नोएडा जैसे तेजी से विकसित होते शहर में जलनिकासी व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि समय पर नाले साफ नहीं हो पाए तो इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा।
अब सबकी नजर नोएडा प्राधिकरण पर टिकी है कि क्या वह मानसून से पहले हालात संभाल पाएगा या फिर पहली बारिश में ही शहर की सड़कें फिर पानी में डूबती नजर आएंगी।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

Raftar Today
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